सुप्रसिद्ध हरियाणवी भजन:- देना हो तो दे-दे साँवरे, क्यूँ ज्यादा तरसावै सै-२ ना देना तो साफ नाट, क्यूँ लखदातार कुहावै सै-२ तेरे काट-काट कै चक्कर, मैं तो तेरे दर के हार लिया। मैं ना पिंड तेरा इब छोडूँ, मनै मन मै पक्का धार लिया। भगत तेरा भुखा सोवै, तू 56 भोग उडावै सै। ना देना तो.... तेरे भण्डारे मैं कमीं नहीं, यो कैणा दुनिया सारी का। भगत तेरा दुख पावै, तो के फायदा साहूकारी का। लेन-देन का जिक्र करै ना, मनै बातां मैं बहकावै सै। ना देना तो.... तनै देना पडै जरूरी, मैं ज़िद्दी घणां अनाड़ी सूँ। बाबा सेठ तू नंबर वन सै, तो मैं नंबर एक भिखारी हूँ। सब भगतां के आगै क्यूँ तू , अपनी पोल खुलावै सै। ना देना तो.... मैं हर ग्यारस नै, तेरे धाम पै चलकै आऊँ सूँ। फोकट मैं कोणया माँगू, तेरे नये-नये भजन बनाऊं सूंँ। क्यूँ "भीमसेन" नै देवण मैं, तू कंजूसी दिखलावै सै। ना देना तो.... (तर्ज:- मेरे पाछे-पाछे आवण का) हमारी जानकारी के मुताबिक इस भजन को लिखे लगभग आज 15 वर्षों से भी अधिक समय हो गया। लेकिन ये सदाबहार भजन आपको फिर भी कहीं ना कहीं सुनाई जरूर दे जायेगा। धार्मिक कीर्तन क...