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मर्मस्पर्शी भजनों के लेखक व गायक सरदार श्री हरिमहेन्द्र सिंह "रोमी" जी

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भजन लीरिक्स: स्थाई: अगर दिल खोला होता उस दिलदार से। खुलवाना ना पड़ता फिर औज़ार से। दिल की होती तुमको कभी बीमारी ना। दिल की बातें कर लेते दिलदार से। (1) प्यार के दो पल मिले उसे प्यार से जी ले। श्याम का अमृत मिला उसे प्यार से पी ले। अगर तुमने संभाला होता दिल को प्यार से। खुलवाना ना पड़ता.... (2) रो रहा है क्यों तू प्यारे क्यों है तू गुमसुम। दिल की अपने बात पगले इक बारी तो सुन। अगर दिल को लुटाया होता उस दिलदार पे। खुलवाना ना पड़ता.... (3) दिल की हकीकत को सदा दिलदार ही जाने। हाल-ए-दिल "रोमी" साँवरा यार ही जाने। मरहम रखवाया होता अगर साँवरे यार से। खुलवाना ना पड़ता.... लेखक व गायक: सरदार श्री हरिमहेन्द्र सिंह "रोमी" जी। को मेरा कोटि कोटि प्रणाम। 🙏🙏🙏🙏🙏 प्रेषक: प्रदीप सिंघल (नोट: उद्देश्य सिर्फ इतना ही कि अच्छी रचनाएं अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे) 🙏🙏🙏🙏🙏

17 अक्टूबर कुलपिता महाराजा श्री अग्रसेन जी की जयंती पर प्रस्तुत है ये गीत (-SARC)

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भजन लीरिक्स: श्री राम प्रभु के वंशज है हम और माधवी के लाल। हम गर्व से सीना तान के कहते हम है अग्रवाल। हम अग्रवंश के बेटों का सारे जग में डंका बजता है। हर दान धर्म में अग्रवंश ही सबसे आगे रहता है। कुलदेवी है महालक्ष्मी और है नागलोक ननिहाल। हम गर्व से..... म्हारे अग्रसेन ने सत्य अहिंसा राह पे हमको चलाया है। व्यापार करो सत्कर्म करो हमको तो ये समझाया है। जो भी इनकी राह पे चलता हो जाता वो निहाल। हम गर्व से..... इस अग्रवंश की शान देखकर हर कोई आहें भरता है। हमको भी इसमें जन्म मिले ये सबकी जुबां पे रहता है। महालक्ष्मी की छाया "संजय" हम पे रहती हर हाल। हम गर्व से..... लेखक व गायक: अग्रविभुति श्री संजय अग्रवाल जी। रायगढ़ - छतीसगढ़। मोबाइल: 810-945-95-55 ।। जय श्री अग्रसेन जयते नम:।। आप सभी अग्रबंधुओं को कुलपितामह महाराजा श्री अग्रसेन जी की जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ। प्रेषक: अग्रवंशी प्रदीप सिंघल।