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बतादे साँवरिया क्यों ना घर म्हारे आवै (लेखक: दादा -भीमसेन जी भिवानी वाले)

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हरियाणवी भजन: बतादे साँवरिया क्यों ना घर म्हारे आवै-੨ तेरी याद मैं श्यामधणी मन्ने अन्न पाणी ना भावै-੨ छप्पन भोग मिलैं सेठां के दौड़या दौड़या जावै-੨ मैं निर्धन म्हारे घर आवण मैं नखरे घणे दिखावै-੨ बतादे साँवरिया.... चाँदी के सिंहासन ऊपर बैठयो बैठयो हुक्म चलावै-੨ तेरे भक्त की टूटी खटिया दुनिया हाँसी उड़ावै-੨ बतादे साँवरिया.... कलयुग के मैं साँवरिया तैं लखदातार कुहावै-੨ मन्ने देण मैं कुणसा तेरा बता माल घट जावै-੨ बतादे साँवरिया.... "भीमसेन" सुण श्यामधणी तेरे नये नये भजन बणावै-੨ इसते ज्यादा और बता तू के मेरे तै चाहवै-੨ बतादे साँवरिया.... लेखक: दादा -भीमसेन जी भिवानी वाले। गायिका: निकिता अग्रवाल जी। प्रेषक: प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले) singhalpardeep.blogspot.com आप सभी को.... ।। जय श्री श्याम जी।।

इबके नम्बर मेरा सै (सदाबहार-अरदास//लेखक व गायक: श्री नरेश "नरसी" जी फतेहाबाद वाले)

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👉 सुप्रसिद्घ हरियाणवी भजन: ⬇⬇⬇⬇⬇ 👉 मैं के बोलूं श्याम धणी, तन्ने सब बातां का बेरा सै। 👉 पिछले साल घणे तारे, पर इबके नम्बर मेरा सै। ⬇⬇⬇⬇⬇ 👉 मेरे अगड़ पड़ोसी सारे, तन्ने उनका काम बणाया सै। 👉 किसी ने गाड़ ली कोठी और किसी ने महल बणाया सै। 👉 तन्ने यो के हाल बणाया सै, मेरा दो कमरां में डेरा सै। 👉 पिछले साल घणे तारे..... ⬇⬇⬇⬇⬇ 👉 तू दोनों हाथ लुटावे, तेरे घणे खजाने भरे पड़े। 👉 हम रोटी पूरी करते और कमा-कमा के मरे पड़े। 👉 छप्पन करोड़ का बम्पर खुल ज्या, इतना माल भतेरा सै। 👉 पिछले साल घणे तारे..... ⬇⬇⬇⬇⬇ 👉 मेरा सपना पूरा होगा, ना छोड़ी इब तक आस मन्ने। 👉 तू सुणेगा विनती मेरी, यो सै पक्का विश्वास मन्ने। 👉 देर सही अन्धेर नहीं, "नरसी" नै इतना बेरा सै। 👉 पिछले साल घणे तारे..... ⬇⬇⬇⬇⬇ (तर्ज: हरियाणवी गीत "मेरे पाछे-पाछे आवण का")  ⬇⬇⬇⬇⬇ 👉 लेखक व गायक: श्री नरेश "नरसी" जी। 👉 फतेहाबाद -हरियाणा। 👉 मोबाइल: 94-162-41-061 Fb Page: Naresh Narsi Fans #NNF 🙏🙏🙏🙏🙏 👉 प्रेषक: प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले) (हमें मिली जानकारी के अनुसार ये भजन लगभग सन् 2004 के आसपास लिखा...

वास्तविकता// इस रंग बदलती दुनिया में, निर्धन का साथी कोई नहीं (©®Writer)

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 👉 आज के दौर की वास्तविकता: 👇👇👇👇👇 कोई नहीं-कोई नहीं। तेरा सच्चा साथी कोई नहीं। इस रंग बदलती दुनिया में, निर्धन का साथी कोई नहीं। बलवान के संगी लाखों हैं, निर्बल का साथी कोई नहीं। (1) मतलब के रिश्ते-नाते हैं, मतलब है तो मीठी बातें हैं। जब वक्त बुरा आ जाता है, उस वक्त का साथी कोई नहीं। बलवान के संगी.....  (2) जब तक खुशियों के मेले हैं, सब अपनापन दिखलाते हैं। है सुख तो सब हैं साथ, मगर दुख-दर्द का साथी कोई नहीं। बलवान के संगी..... (3) ये कलयूग है इस कलयूग में, बस झूठ का सिक्का चलता है। झूठे को मान-सम्मान मिले, पर सच का साथी कोई नहीं। बलवान के संगी.....  (4) पल-पल ये रंग बदलती है, मैंने दुनिया को आजमाया है। नादान न बन तू "दास" तेरे, किसी पाप का साथी कोई नहीं। बलवान के संगी.....  👉 Writer: Ashok Sharma Ji "Daas" 👉 Singer: Kumar Vishu Ji 💟💟💟💟💟💟 👉 singhalpardeep.blogspot.com

Dj पै नाचूंगी-Dj पै नाचूंगी (Lyrics:Pardeep Sharma & Voice: Renuka Panwar)

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👉 Starting: 💟💟💟💟💟💟 पिया गाड़ी मैं घुमण चाल्लो, रेल में धक्के लागै सैं.... पिया गाड़ी मैं घुमण चाल्लो, रेल में धक्के लागै सैं.... ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ 👉 Dj पै नाचूंगी.... 💟💟💟💟💟💟 या जूत्ती पटियाले ते ल्याई, बाली लाहौर तै गढ़वाई। गाम यो देखै ऐड्डी ठा-ठा, जब बण-ठण के मैं-मैं आई। ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ आज नाचण की रे, कसर मैं पूरी काढूंगी। मार डूंगे मैं मण-मण के, आज Dj पै नाचूंगी। 💟💟💟💟💟💟 देख मेरा जेठ नचै सै ऐण्डी, जेठाणी शोर कर री हाई। मैं खा राख्खी सूं तेरी शर्म नै, ओ मेरी नन्दी के भाई। ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ जे इब करे तन्ने नखरे, फिर मैं भी माचूंगी। मार डूंगे मैं मण-मण के, आज Dj पै नाचूंगी। 💟💟💟💟💟💟 ओ मन्ने बेरा था तू नाचेगा, तू इतना नहीं हठिला सै। "प्रदीप" के गीतां पे, तू भी होया फिरै रंगीला सै। ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ देख मैं नई-नई पोज़ बनाके, पिया आज फोटो खींचूंगी। मार डूंगे मैं मण-मण के, आज Dj पै नाचूंगी। 💟💟💟💟💟💟 👉 गीतकार: प्रदीप शर्मा जी। 👉 गायिका: रेणुका पंवार जी। 👉 गीतअदाकार: अंजलि राघव जी। ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ 👉 इस हरियाणवी गीत से जुड़ी पूरी टीम को हार्दिक बधाई!  💟💟💟💟💟💟 👉 प्रेषक: प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले)  ...

Jija Tu Kala Mai Gori Ghani//जीजा तू काला मैं गौरी घणी (Lyrics©®Writer)

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👉 सुप्रसिद्घ हरियाणवी लोकगीत: ⬇⬇⬇⬇⬇ जीजा तू काला मैं गौरी घणी-੨ फोटो खींचवांवै दोनों जणे-੨ ओ.... जीजा जी-੨ जीजा जी.... जीजा जी-੨ ⬇⬇⬇⬇⬇ जीजा तू मोटा मैं पतली घणी-੨ तखड़ी तूल जांवै दोनों जणे-੨ ओ.... जीजा जी-੨ जीजा जी.... जीजा जी-੨ ⬇⬇⬇⬇⬇ जीजा तू ठिगणो मैं लाम्बी घणी-੨ फीते नप जांवै दोनों जणे-੨ ओ.... जीजा जी-੨ जीजा जी.... जीजा जी-੨ ⬇⬇⬇⬇⬇ जीजा तू बादल मैं बिजली-੨ बैरी पे पड़ जांवै दोनों जणे-੨ ओ.... जीजा जी-੨ जीजा जी.... जीजा जी-੨ ⬇⬇⬇⬇⬇ जीजा तू खेतां मैं बागां मैं-੨ मेले मिल जांवै दोनों जणे-੨ ओ.... जीजा जी-੨ जीजा जी.... जीजा जी-੨ ⬇⬇⬇⬇⬇ जीजा तू मूथरा मैं आगरा-੨ टेशन मिल जांवै दोनों जणे-੨ ओ.... जीजा जी-੨ जीजा जी.... जीजा जी-੨ 💟💟💟💟💟 सुप्रसिद्घ हरियाणवी फिल्म "चन्द्रावल" के इस गीत से जुड़ी पूरी टीम को मेरा हृदय से नमन! -प्रदीप सिंघल singhalpardeep.blogspot.com  

काम की बात (-PS)

👇👇👇👇👇👇 एक व्यक्ति टूथ पेस्ट बनाने वाली कंपनी में नौकरी पाने के लिए कंपनी के दफ्तर में इन्टर्वयू देने पहुंचा। इन्टर्वयू लेने वालों में से एक ने उससे पूछ लिया कि यदि आपको हमारे यहां नौकरी दे दी जाए, तो आपसे हमारी कंपनी को क्या फायदा होगा। उसने एक ही वाक्य में कहा कि आपकी एक महीने की सेल 500 करोड़ से 1000 पर पहुंच जाएगी। उसकी बात सुनते ही सभी लोग अपनी कुर्सियों को छोड़ खड़े हुए और उस व्यक्ति को बड़े ही गौर से देखने लगे। अपने-अपने तर्क रखने लगे कि हमारे पास इतने पुराने, इतने काबिल व इतने हुनरमंद लोग हैं, जिन्होंने न जाने कितनी कोशिशें, कितनी विज्ञापन एजेंसियों को हॉयर किया कि हमारी सेल दोगुनी हो जाए, पर सभी के सभी फेल हो गए और आप सिर्फ एक महीने में दोगुनी सेल की बात कह रहे हैं। यदि आप ऐसा कर पाने में सफल हो जाते हैं तो, कंपनी आपको अच्छी सैलरी, रहने के लिए अच्छा घर, आने-जाने के लिए अच्छी गाड़ी व साथ ही साथ बढ़ी हुई सेल पर कमीशन भी देगी।आप कल से कंपनी ज्वाइन कीजिये, लेकिन उसके इस कमेंट ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया कि, आखिर इस व्यक्ति में ऐसा क्या गुण है जो कि इसने इतने आत्मविश्वास ...

Money Is The Fuel Of Life (-PS)

Truth Of Life: Just as Petrol, Diesel and CNG are Very Important as Fuel to Run the Vehicle, In the Same Way, Money in the form of Fuel is also Very Important to Run the Vehicle of Life. -Pardeep Singhal जीवन का सत्य: जिस तरह गाड़ी को चलाने के लिए ईंधन के रूप में पेट्रोल, डीजल व सी एन जी बहुत जरूरी है। ठीक उसी तरह जीवन (Life) की गाड़ी को चलाने के लिए भी पैसा (Money) रूपी ईंधन बहुत जरूरी है। -प्रदीप सिंघल singhalpardeep.blogspot.com

Money Is The Fuel Of Life (-PS)

एक व्यक्ति से किसी ने पूछा कि आप क्या बनना चाहते हैं, तो उसने कहा कि मैं मनी मैगनेट बनना चाहता हूँ। वो शायद ऐसा इसलिए कह पाया कि उसे सही समय पर ये ज्ञान प्राप्त हो गया कि, जीवन में पैसे की क्या अहमियत है। शायद यही कारण है कि बड़े-बड़े स्टार, सेलिबर्टी टीवी पर उन चीजों के विज्ञापन भी करते हैं, जिन चीजों का इस्तेमाल वो अपने बच्चों को सपने में भी न करने दे। पैसे के लिए विज्ञापनों में वो समान बेचते हैं, जिसे एक आम इंसान भी बेचते हुए कई बार सोचेगा और आखिर में मना भी करदे तो कोई बड़ी बात नहीं। Money Is The Fuel Of Life -Pardeep Singhal

बागड़ो नाची सामण मैं (©®Team of Song Present Team)

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  👉 हरियाणवी गीत: बागड़ो नाची सामण मैं.. 👇👇👇👇👇 मेरी झाँझरा का जोड़ा, हॉय शोर करण लाग्या। जद चाली मोरणी बणके, कईयां का दिल आग्या। 👇👇👇👇👇 नीर भरण गई मैं, कुएँ पे नीले दामण मैं। रे सिर पे टोकणी धर के, बागड़ो नाची सामण मैं। 👇👇👇👇👇 (1) इसा हाल्या दामण रे, हॉय रे हॉय सामण मैं। रे कमर पे दो-दो मटके थे, अर गात पड़ै था हल्वा सा। इसी चमकी नाथ नगीने जो, रूप का पाटया जलवा सा। होंठ रसीले लागैं थे, जणू नूण हो जामण मैं। रे सिर पे टोकणी.... 👇👇👇👇👇 (2) इसा छम-छम करके नाची मैं, मन्ने देख के बादल बरस गया। इसा खोग्या "फरिश्ता" मेरे में, वो लिखण ते भी तरस गया। पूरी की पूरी भीज गई, फिर लागी काँपण मैं। रे सिर पे टोकणी....  👇👇👇👇👇 इसा हाल्या दामण रे, हॉय रे हॉय सामण मैं। इसा हाल्या दामण रे, हॉय रे हॉय सामण मैं। 💟💟💟💟💟 इस हरियाणवी गीत से जुड़ी पूरी टीम को हार्दिक बधाई!  प्रेषक: प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले) singhalpardeep.blogspot.com

हम बोलेगा तो बोलेगे कि बोलता है

अक्सर लोग कहते हैं कि इस धरती पर जो भी होता है, वो सब कुछ ईश्वर की ईच्छा से ही होता है। ईश्वर सर्वशक्तिमान है, उनकी ईच्छा के बिना तो पत्ता भी नहीं हिल सकता। तो क्या दुनिया में जितने भी अपराध और दुष्कर्म होते हैं, वो सभी ईश्वर की इच्छा से होते हैं। किसी बेगुनाह को सजा हो जाना, किसी की बेवजह हत्या हो जाना, किसी की जेब कट जाना, किसी निर्बल स्त्री की इज्ज़त लूट जाना, एक साथ कई मनुष्य का मिलकर किसी औरत के साथ बलात्कार करना। यदि ईश्वर की इच्छा बिन पत्ता तक नहीं हिल सकता तो बलात्कारियों को एक स्त्री के सभी कपड़े उतारकर दुष्कर्म करने की शक्ति कौन प्रदान करता है। क्या ये सब ईश्वर की लीला है।

हर व्यक्ति के काम की बात

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सिर्फ मन की ही नहीं, काम की भी बात: ये सत्य है कि चाहे कोई कितना ही अमीर हो या फिर कितना ही गरीब, एक न एक दिन सभी को मर जाना है और ये भी सत्य है कि मनुष्य चाहे कितनी ही धन संपदा इकट्ठी करले, वो उसमें से एक रूपया भी साथ नहीं लेकर जा सकता है। ये भी सत्य है कि सुख और दुख जीवन का एक हिस्सा है, चाहे कोई अमीर हो या गरीब इनसे नहीं बच सकता उन्हें इनका सामना करना ही पड़ेगा। लेकिन ये भी तो जरूरी नहीं कि मनुष्य दुखों का सामना और अपने जन्म से लेकर मृत्यु तक का सफर गरीबी, बदहाली, लाचारी व बेबसी के साथ ही करे। एक व्यक्ति साइकिल पर चलते हुए, छोटी से घर में रहते हुआ अपना दुख प्रकट करे और लोगों को कहे कि मैं दुखी हूँ, परेशान हूँ। दूसरा व्यक्ति दुखी तो है, परेशान भी है लेकिन वो अपने महंगे बंगले, ए सी ऑफिस, महंगी गाड़ी में बैठकर दुखों का सामना करता है, उस लड़ाई को लड़ता है, तो जीवन किसका बेहतर कहलायेगा। मेरे ख्याल से तो उसका जो भौतिक सुखों के साधनों संग अपना जीवन बीता रहा है न कि उसका जो वही पुरानी घीसी-पीटी बातों को अपने जीवन का आधार मान अपना जीवन बीता रहा है। बहुत से लोग कई तरह के उदाहरण देते हैं जैसे ...

संघर्ष ही जीवन है// Struggle Is Life

संघर्ष: Allout-GoodKnight मशीन व रिफिल बनाने वाली बड़ी कंपनियों ने पूरे जोर-शोर, अपनी पूरी टीम के सहयोग से मच्छर भगाने वाले कई Product बनाये। लेकिन मच्छरों की एक पीढ़ी ढ़ीठ होकर जीवन और मृत्यु के बीच इस लड़ाई को लड़ने का संघर्ष करती रही, तो आज मच्छरों की अगली पीढ़ी उन सब उत्पादों के आस पास नृत्य करती रहती है। आखिरकार मनुष्य थक हार कर यही कह देता है कि इन उत्पादों का कोई फायदा नहीं, मच्छर खत्म नहीं हो सकते। ठीक उसी तरह जब एक पीढ़ी किसी चीज़ को पाने के लिए बेइतहां, मेहनत-मशक्कत करती है, संघर्ष करती है तो दूसरी पीढ़ी को उसका फायदा भी बेशुमार मिलता है। आज हमें जो भी चीज़े, जो भी सुविधाएं, जो भी साधन उचित मात्रा में पर्याप्त हैं। उन्हें प्राप्त करने के लिए हमारे बुजुर्गों ने न जाने कितना संघर्ष किया होगा, तब जाकर हम आज उन चीजों पर अपना स्वामित्व बना पाने में सफल हो पाये। हमारे आसपास ऐसे बहुत से लोग हैं जिनके पास 25-30 पहले न अपना घर था, न आने जाने का अपना कोई निजी वाहन था। लेकिन आज उन सबके पास अच्छा घर, आने जाने के एक नहीं बल्कि कई साधन हैं, जिन्हें वो अपनी जरूरत व दूरी अनुसार इस्तेमाल करते...

अग्रसेन जी की गौरव गाथा (श्रीमति रेखा मोहिनी बंसल "RMB" जी की जुबानी)

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महाराजा श्री अग्रसेन जी की गौरव गाथा: 💟💟💟💟💟💟 श्री अग्रसेन महाराज की, हम गाथा गाते हैं हम गाथा गाते हैं। श्री अग्रजनक के चरणों में हम शीश झुकाते हैं, हम शीश झुकाते हैं। जय अग्रसेन महाराज, जय जय अग्रवाल समाज-੨ ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ (1) महारानी भगवती देवी थी, राजा वल्लभसेन वल्लभसेन के पिता थे, जिनका नाम था बृहतसेन-੨ हरियाणा में प्रतापनगर की कथा सुनाते हैं, हम कथा सुनाते हैं। श्री अग्रजनक के चरणों में हम शीश झुकाते हैं। हम शीश..... जय अग्रसेन महाराज, जय जय अग्रवाल समाज-੨ (2) कुंदसेन भाई छोटे थे वल्लभसेन के, केशी नाम का सेनापति रहता था संग उसके-੨ कुंदसेन और केशी दोनों घात लगाते हैं, दोनों घात लगाते हैं। श्री अग्रजनक के चरणों..... जय अग्रसेन महाराज..... (3) राजा वल्लभ भगवती देवी ने शिव ध्यान किया, प्रसन्न हो शिव ने दो पुत्रों का वरदान दिया-੨ भगवती देवी और वल्लभ जी खुशी मनाते हैं बड़ी खुशी मनाते हैं।  श्री अग्रजनक के चरणों में..... जय अग्रसेन महाराज..... (4) अश्विन शुक्ला प्रतिपदा को सुंदर फूल खिला, महेन्द्रकाल में वल्लभ जी घर पुत्र ने जन्म लिया-੨ जो श्री अग्रसेन जी नाम से जाने जाते हैं, जाने जाते ...

Chatak-Matak // चटक-मटक // सुप्रसिद्ध हरियाणवी गीत के लीरिक्स

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 👉 सुप्रसिद्घ हरियाणवी गीत: चटक-मटक 👇👇👇👇👇 👉 ओ घाल्ली आख्याँ मैं स्याही, रे बिन्दी माथे पे लाई। 👉 बहू सब कर दी गाम की फैल, मैं बण-ठण के जब आई। 👇👇👇👇👇 👉 ओ सारे देवर-जेठां के, मैं गई खटक-खटक। 👉 ओ गज़ का घूंघट काढ़, चाल्ली मैं तो मटक-मटक। 👇👇👇👇👇 👉 ओ चूड़ा हाथां मैं खणकै, तागड़ी छण-छण छणके। 👉 घूमाती चोटी नै निकड़ी, गाल मैं मोरणी बणके। 👇👇👇👇👇 👉 "बिट्टू सोरखी" इशारे में, गया रे झटक। 👉 ओ गज़ का घूंघट काढ़, चाल्ली मैं तो मटक-मटक। 👇👇👇👇👇 👉 टोकणी डूंगे धर राख्खी, मटकणी चाल करे चाला। 👉 मेरे गौरे रंग पै, सूट यो जच रया पटियाला। 👇👇👇👇👇 👉 जो मन्ने देखै सांस जावै, उसकी अटक-अटक। 👉 ओ गज़ का घूंघट काढ़, चाल्ली मैं तो मटक-मटक। 💟💟💟💟💟 इस सुप्रसिद्घ हरियाणवी गीत "चटक-मटक" से जुड़ी पूरी टीम को हार्दिक शुभकामनाएँ! प्रेषक: प्रदीप सिंघल singhalpardeep.blogspot.com

Chatak-Matak // चटक-मटक // सुप्रसिद्ध हरियाणवी गीत के लीरिक्स

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👉 सुप्रसिद्घ हरियाणवी गीत: चटक-मटक 👇👇👇👇👇 👉 ओ घाल्ली आख्याँ मैं स्याही, रे बिन्दी माथे पे लाई। 👉 बहू सब कर दी गाम की फैल, मैं बण-ठण के जब आई। 👇👇👇👇👇 👉 ओ सारे देवर-जेठां के, मैं गई खटक-खटक। 👉 ओ गज़ का घूंघट काढ़, चाल्ली मैं तो मटक-मटक। 👇👇👇👇👇 👉 ओ चूड़ा हाथां मैं खणकै, तागड़ी छण-छण छणके। 👉 घूमाती चोटी नै निकड़ी, गाल मैं मोरणी बणके। 👇👇👇👇👇 👉 "बिट्टू सोरखी" इशारे में, गया रे झटक। 👉 ओ गज़ का घूंघट काढ़, चाल्ली मैं तो मटक-मटक। 👇👇👇👇👇 👉 टोकणी डूंगे धर राख्खी, मटकनी चाल करे चाला। 👉 मेरे गौरे रंग पै, सूट यो जच रया पटियाला। 👇👇👇👇👇 👉 जो मन्ने देखै सांस जावै, उसकी अटक-अटक। 👉 ओ गज़ का घूंघट काढ़, चाल्ली मैं तो मटक-मटक। 💟💟💟💟💟 इस सुप्रसिद्घ हरियाणवी गीत "चटक-मटक" से जुड़ी पूरी टीम को हार्दिक शुभकामनाएँ! प्रेषक: प्रदीप सिंघल singhalpardeep.blogspot.com

अग्रसेन जी का भजन: (लेखक:- हेमन्त गोयल "गोपाल" जी)

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  👉 👉 Lyrics: 👇👇👇👇👇 अग्रसेन जी पिता हमारे, माधवी हमारी माता है-੨ अग्रोहा राजधानी हमारी, जिससे हमारा नाता है-੨ 👇👇👇👇👇 सत्य-अहिंसा-धर्म-दान का, हमको पाठ पढ़ाया है। एक ईंट और एक रुपये से, समरसता सीख सिखाया है। छोटी सी है रीत मगर ये, सीख बड़ी सिखाता है। अग्रोहा राजधानी.... 👇👇👇👇👇 क्षत्रिये कुल में जन्म लिया, वैश्य धर्म स्वीकार किया। कलम-तराजू के दम पर, जीत सारा संसार लिया। जहाँ भी बसे है अग्रवंश, वहीं का वो हो जाता है। अग्रोहा राजधानी.... 👇👇👇👇👇 लक्ष्मी पुत्र कहाते हैं हम, महालक्ष्मी का वरदान है। फैली बेल चहूँ दिशा में, पाते सदा सम्मान हैं। कहे "गोपाल" बड़भागी, जो #अग्रवाल कहलाता है। अग्रोहा राजधानी....  👇👇👇👇👇 ©®श्री हेमन्त गोयल "गोपाल" जी (श्याम कृपा)  👉 गायक: अभिजीत कोहर जी 🙏🙏🙏🙏🙏 👉 प्रेषक: प्रदीप सिंघल 👉 https://youtu.be/ft8O668UIBU

साल़ाहेली//Salaheli (©®ताऊ शेखावाटी//Tau Sekhawati)

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  👉 पारिवारिक हास्य कविता:- साल़ाहेली ..................... मित्रों!       👉 रिश्तों की दुनिया में हर रिश्ते में स्वार्थ का बोलबाला है। उदाहरण के लिए माँ-बाप बेटे को इसलिए लाड करते हैं, कि वो उनके बुढ़ापे का सहारा है। वहीं सास-ससुर अपने जंवाई को इसलिए मान देते हैं, कि वो उनकी बेटी के सुख दुख का साथी है...... आदि, आदि। ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ 👉 ऐसे में मात्र एक रिश्ता ऐसा है, जो जवानी से लेकर बुढ़ापे तक आपको भरपूर निश्वार्थ मान-सम्मान देने में कभी नहीं अघाता, वह रिश्ता होता है "सालाहेली" का। आप जब भी ससुराल जाते हैं। यह रिश्ता हर्षित मन "आवो नणदोई सा!" 👉 कहते हुए सदैव आपके स्वागत में पलक पांवड़े बिछाए तैयार मिलता है। तो कारोना के चल रहे इस उबाऊ पीरियड में आपके होठों पर क्षणिक मुस्कान लाने हेतु प्रस्तुत है.... उस निश्वार्थ रिश्ते पर कभी लिखी हुई मेरी प्रथम कृति "सालाहेली" की ये....... 👉 कविता:- साल़ाहेली ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ (1) सासरिए में सुख चाहो तो, मेरे यारो एक काम करो। सासू अर सुसरै सूं पैली, सालाहेली को मान करो।। ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ (2) सासू-ससुरा कै दिन का है, साली सासरिए जावैगी।  सालाहेली ही...

महाराजा श्री अग्रसेन जी की अमर कथा (-©®ताऊ शेखावटी)

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हमारे आदरणीय पंडित जी #ताऊ_शेखावटी_ (सीताराम शर्मा जी) द्वारा रचित "महाराजा श्री अग्रसेन जी की अमर कथा" आज सुबह ही वट्सअप पर प्राप्त हुई। जिसके लिए मैं उनका हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ और आग्रह करता हूँ कि आप अपनी कलम से इसी तरह अग्रकुल की गौरव गाथा बयान करते रहेंगे। ये कथा यूटयूब पर भी उपलब्ध है। अग्रबंधुओं यदि कथा आपको अच्छी लगे और आपको लगे कि ये अमर कथा जन जन तक पहुंचनी चाहिए तो, कृप्या इसे आगे बढ़ाने में हमारा सहयोग करें। https://youtu.be/TZktk-WQYxI https://youtu.be/TZktk-WQYxI  

महाराजा श्री अग्रसेन जी की गौरव गाथा (-रेखा मोहिनी बंसल@RMB)

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अग्रवंश के कुलपितामह महाराजा श्री अग्रसेन जी की गौरव गाथा: 💟💟💟💟💟💟 श्री अग्रसेन महाराज की, हम गाथा गाते हैं हम गाथा गाते हैं। श्री अग्रजनक के चरणों में हम शीश झुकाते हैं, हम शीश झुकाते हैं। जय अग्रसेन महाराज, जय जय अग्रवाल समाज-੨ ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ (1) महारानी भगवती देवी थी, राजा वल्लभसेन वल्लभसेन के पिता थे, जिनका नाम था बृहतसेन-੨ हरियाणा में प्रतापनगर की कथा सुनाते हैं, हम कथा सुनाते हैं। श्री अग्रजनक के चरणों में हम शीश झुकाते हैं। हम शीश..... जय अग्रसेन महाराज, जय जय अग्रवाल समाज-੨ (2) कुंदसेन भाई छोटे थे वल्लभसेन के, केशी नाम का सेनापति रहता था संग उसके-੨ कुंदसेन और केशी दोनों घात लगाते हैं, दोनों घात लगाते हैं। श्री अग्रजनक के चरणों..... जय अग्रसेन महाराज..... (3) राजा वल्लभ भगवती देवी ने शिव ध्यान किया, प्रसन्न हो शिव ने दो पुत्रों का वरदान दिया-੨ भगवती देवी और वल्लभ जी खुशी मनाते हैं बड़ी खुशी मनाते हैं।  श्री अग्रजनक के चरणों में..... जय अग्रसेन महाराज..... (4) अश्विन शुक्ला प्रतिपदा को सुंदर फूल खिला, महेन्द्रकाल में वल्लभ जी घर पुत्र ने जन्म लिया-੨ जो श्री अग्रसेन जी नाम से जाने...

गर्व से कहते हैं कि हम बाणिये हैं (-Pardeep Singhal)

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  #गर्व_से_कहते_हैं_कि_हम_बाणिये_हैं_ ! ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ #हर समाज में कुछ ना कुछ खूबी जरूर होती है। ठीक उसी तरह हमारे समाज में भी बहुत सी खूबियां हैं। हमारे समाज के लोगों ने अपनी बुद्धिमता व व्यापारिक कला से सिर्फ अपना ही नहीं, अपने परिवार, अपने समाज, अपने देश तक का नाम रोशन किया। इसके सैंकड़ों उदाहरण मिल जाएंगे आपको। हमारे समाज में व्यापार के साथ एक कला और है जिसका जिक्र बहुत कम किया जाता है। अपनी मेहनत से व्यापार को ऊंचे स्तर पर ले जाने के साथ साथ, अपने व्यापार की आमदनी को संयम के साथ संजोने (संभालने) की कला। #हमारे गाँव देहात की तरफ अक्सर एक कहावत कही जाती है। हो सकता है आपने भी किसी बड़े बुजुर्ग से कभी सुना हो कि.. ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ #शरीर_की_ताकत_को_भैंस_और_पैसे_की_ताकत_को_सिर्फ_बाणिया_ओट_ (संभाल) #सकै । कुछ लोग आज भी इस कहावत का मान बखूबी रख रहे हैं। सबकुछ होने के बावजूद भी वही सादा रहन सहन, सादा पहनावा, सादा खान पान। उनका व्यक्तित्व, उनकी उदारता, उनकी दरियादिली ही उनकी पहचान है। ऐसे प्रत्येक #बाणिये_भाई को हृदय से नमन जो आज भी अपने संस्कारों को जीवित रखने में अग्रसर हैं। -प्रदीप सिंघल 💟💟...

बाणिया (-Pardeep Singhal)

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⬇⬇⬇⬇⬇⬇ जहां तक मुझे जानकारी है और मैंने सुना व पढ़ा है। पूरी धरती पर हमारे समाज को ऐसे ही सम्मान पूर्वक पुकारा जाता जा रहा है और रहती दुनिया तक पुकारा जाता रहेगा। 💟💟💟 💟💟 बनिये। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ बाणिये। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ लाला जी। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ सेठ जी। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ महाजन। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ गुप्ता जी। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ वैश्य बंधु। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ अग्रवाल साहब। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ अग्रबंधु। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ अग्रवंशी। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ लक्ष्मी पुत्र। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ गोत्र के साथ साहब  ( जैसे कि सिंघल साहब) 💟💟💟💟💟 लेकिन उसके बावजूद भी कुछ भाई बंधु कहते हैं कि ये मत कहो वो मत कहो। ऐसे कहो वैसे कहो। आखिर ऐसा क्यों। कुछ लोग तो अपने कमेंटस तक में अपनी भाषा, अपनी मर्यादा तक भूल जाते हैं। ये नहीं देखते कि सामने वाला कौन है..? उसकी पोस्ट का उद्देश्य क्या है। क्या उसकी पोस्ट में समाज हित की बात नहीं है। क्या उस व्यक्ति का हौंसला व मनोबल बढ़ाना हमारा दायित्व नहीं है। जो समाज की जानकारी हम तक पहुंचा रहा है। अपना कीमती समय समाज को दे रहा है। उसका शुक्रिया करने की बजाय उसी को बुरा भला कहने लग जाते हैं। इस धरती पर सबसे सभ्य व सबसे शांत समाजों में हमारी गिनती होती है। लेकिन उसके बावज...

बनिये की डयूटी (कर्तव्य ओर कर्म)

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जब भी कोई व्यक्ति किसी #बनिये भाई की दूकान, प्रतिष्ठान, कार्यस्थल को देखता है तो आमतौर पर यही कहता है कि देखो इसका काम कितना अच्छा चल रहा है। रोज़ाना खूब पैसे कमा रहा है। जबकि मेरा मानना है कि बनिया नहीं उसकी डयूटी, उसकी बैठक कमा रही है। अपने काम काज के प्रति उसकी मेहनत और समर्पण कमा रहा है। सुबह 5-6 बजे प्रभु का नाम लेकर दुकान को नुचकारते हुए खोलना और रात्रि को 10-11 बजे प्रभु का शुक्रिया करते हुए अपनी दूकान को बढ़ाना। लगातार 15-16 घंटे डयूटी देना। हर किसी से आप और जी कहकर बात करना, अपने स्वभाव से लोगों के दिलों को जीतना। कई घंटों की कड़ी मेहनत व कठिन तपस्या के बावजूद हर किसी से अच्छा व्यवहार करना। ना जाने ऐसी कितनी ही खूबियों का भंडार ले अपने कर्तव्य का पालन करना। दूकान पर आने वाले किसी भी धार्मिक और जन कल्याण संस्थाओं के सदस्यों का अपनी क्षमता व सामर्थ्य अनुसार सहयोग करना। 🙏🙏🙏🙏🙏 नोट: मैं मध्यम वर्गीय से हूँ, जो चीज़ जो खूबी अपने बनिये भाइयों में देखता हूँ उसे ही राष्ट्रीय अग्रवाल महासभा फेसबुक समूह के माध्यम से आप सभी अग्रबंधुओं के बीच शेयर करता हूँ। ये मेरा सौभाग्य है कि मु...

बनियों की दुकान में गद्दी का महत्व व उसके पीछे का रहस्य

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भोलेनाथ शिव शंकर जी का बनिये को वरदान: ⬇⬇⬇⬇⬇ कहते हैं कि एक बार पार्वती जी ने भोलेनाथ जी से आग्रह किया कि आप समाज के प्रत्येक वर्ग को मुंह मांगा वरदान दीजिए। भला माता पार्वती जी की बात को भोलेनाथ कैसे टाल सकते थे। जो जैसी ईच्छा लेकर आया उसे वैसा ही वरदान मिलता गया और वो हंसी खुशी लौटता गया। सुबह से लेकर शाम हो गई, शाम के समय एक बनिया आया तब तक सबकुछ समाप्त हो चूका था। माता पार्वती ने बनिये से कहा कि तुम इतनी देर से क्यूँ आये। क्या तुम्हें मालूम नहीं था कि आज समाज के हर वर्ग को मुंह मांगा वरदान दिया जा रहा है। तो बनिये ने कहा माते पास ही के गांव में मेरी दुकान है और दुकानदारी करते करते मुझे आने में इतनी देर हो गई जिसके लिए मैं माफी चाहता हूँ। माता पार्वती ने कहा कि क्या तुम्हारी एक दिन की दुकानदारी से इतनी कमाई हो गई कि जो तुमने सही समय पर वरदान लेने आना भी उचित नहीं समझा। बनिये ने कहा माते मैं दुकानदारी सिर्फ पैसा कमाने के लिए ही नहीं करता, आज के दिन मेरे गांव में मजदूरों को उनकी मजदूरी का पैसा मिलता है। जिसे देकर वो राशन पानी खरीदते हैं, यदि मैं आज दूकान नहीं खोलता तो आज किसी के घर मे...

मैं पल दो पल का शायर हूँ (लीरिक्स)

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मेेेेरा मनपसंंद गीत: ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ मैं पल दो पल का शायर हूँ, पल दो पल मेरी कहानी है-੨ पल दो पल मेरी हस्ती है, पल दो पल मेरी जवानी है-੨ ⬇⬇⬇⬇⬇ (1) मुझसे पहले कितने शायर आए और आकर चले गए। कुछ आहें भर कर लौट गए, कुछ नग़मे गाकर चले गए। वो भी एक पल का किस्सा थे, मैं भी एक पल का किस्सा हूँ। कल तुमसे जुदा हो जाऊँगा, जो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ। मैं पल दो पल.... ⬇⬇⬇⬇⬇ (2) कल और आएंगे नग़मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले। मुझसे बेहतर कहने वाले, तुमसे बेहतर सुनने वाले। कल कोई मुझको याद करे, क्यूँ कोई मुझको याद करे। मसरूफ़ ज़माना मेरे लिये, क्यूँ वक़्त अपना बर्बाद करे। मैं पल दो पल.... ⬇⬇⬇⬇⬇ गीतकार: साहिर लुधियानवी जी गायकार: मुकेश जी स्टारकास्ट: अमिताभ बच्चन साहब 💟💟💟💟💟 प्रेषक: प्रदीप सिंघल singhalpardeep.blogspot.com

महा शिवरात्रि//फाल्गुन मास की चतुर्दशी//वीरवार 11 मार्च 2021

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Shri Vishnu Chalisa (Voice: Naresh Narsi Fatehabad)

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On YouTube: https://youtu.be/mEm_7Qmt-Jo https://youtu.be/mEm_7Qmt-Jo  

Ibke Number Mera Se (Lyrics & Voice: -NNF)

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           (तर्ज: मेरे पाछै पाछै आवण का)   सुप्रसिद्घ हरियाणवी भजन: ⬇⬇⬇⬇⬇ मैं के बोलूं श्याम धणी, तन्ने सब बातां का बेरा सै। पिछले साल घणे तारे, पर इबके नंबर मेरा सै। (1) मेरे अगड़ पड़ोसी सारे, तन्ने उनका काम बनाया सै। किसी ने गाड ली कोठी, किसी ने महल सजाया सै। तन्ने यो के हाल बणाया सै, मेरा दो कमरां मैं डेरा सै। पिछले साल.... (2) तू दोनों हाथ लुटावै, तेरे घणे खजाने भरे पड़े। हम रोटी पूरी करते, और कमा-कमा के मरे पड़े। 56 करोड़ का बम्पर खुल ज्या, इतना माल भतेरा सै। पिछले साल.... (3) मेरा सपना पूरा होगा, ना छोड़ी इब तक आस मन्ने। तू सुणेगा विनती मेरी, यो सै पक्का विश्वास मन्ने। देर सही अन्धेर नहीं, "नरसी" ने इतना बेरा सै। ⬇⬇⬇⬇⬇ लेखक व गायक: आदरणीय श्री नरेश नरसी जी। फतेहाबाद - हरियाणा मोबाइल: 94-162-41-061 💟💟💟💟💟 हमारी जानकारी के मुताबिक ये रचना लगभग सन् 2004 में लिखी गई। जिसे लिखे हुए आज लगभग 17 वर्ष से ज्यादा हो गये। लेकिन हरियाणवी भजनों में ये रचना आज भी श्याम प्रेमियों की पहली पसंद है। इस सदाबहार व सुप्रसिद्घ रचना के रचयिता को मेरा कोटि-कोटि प्रणा...

"हर भक्त हर प्रेमी के मन की बात//हर चौखट हर दर पे की जाने वाली अरदास" (-NNF)

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  (तर्ज: बार-बार तोहे क्या समझाऊँ)  मारवाड़ी भजन: ⬇ एक चीज़ म्हे माँगां बाबा ना करियो इन्कार। थारी दया से म्हारो फूलै फलै परिवार। (1) 24 घंटा घर में थारो वास रवै। टाबरियां नै थां पे ही विश्वास रवै। म्हे हां दीन भिखारी बाबा थे हो लखदातार। थारी दया से....  (2) सुख में दुख में बाबा थाणे याद करां। ना जाणां म्हे कैयां पूजा पाठ करां। भूल चूक री माफ़ी दीज्यो माणागां उपकार। थारी दया से.... (3) थां पर है जो अटल भरोसा टूटे ना। खाटू नगरी आणो जाणो छूटे ना। धन दौलत ना माँगां बाबा माँगां थारो प्यार। थारी दया से.... (4) थाणै ना भूलां जो भी हालात रवै। हर पल म्हानै याद म्हारी औकात रवै। "नरसी" की अर्ज़ी पे बाबा करल्यो सोच विचार। थारी दया से.... ⬇⬇⬇⬇⬇ लेखक व गायक: श्री नरेश नरसी जी - फतेहाबाद Mob. 9416241061 Fb Page: Naresh Narsi Fans 🙏🙏🙏🙏🙏 प्रेषक: प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले) singhalpardeep.blogspot.com

हकीकत-ए-दुनिया (-NNF)

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Fb Page: Naresh Narsi Fans Naresh Narsi Fatehabad -NNF Fb Page: Pardeep Singhal Fan of Devotional & Motivational Line's Pardeep Singhal Jind Wale अग्रवंशी प्रदीप सिंघल

दो मीठी-मीठी बात करले (Lyricist & Singer: Sonu Lakha)

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Latest Haryanvi Song: क्यूँ रूसी-रूसी आंढ़ै मुलाकात करले। रै तू जाण तै भी प्यारी मन्ने लागै, दो मीठी-मीठी बात करले। हॉय गुस्से में लाल होई आंढ़ै सै गोरी। कद सी बनेगी मीठे गणे की पोरी। आजा हंस के दो बात मेरे साथ करले। रै तू जाण तै प्यारी.... देख छोटी सी बात पै तू मुँह ना फुलावै। देख Sonu Lakha नै नाक ना चढ़ावै। देख आख्याँ में मेरी मेरा प्यार पढ़ले। रै तू जाण तै भी प्यारी.... गीतकार व गायकार: सोनूं लक्खा बहादुरगढ़ वाले। 🙏🙏🙏🙏🙏 प्रेषक: प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले)

पितृ भजन (Lyrics -Prince Jain & Voice -Subham Rithaliya)

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पितृ भजन: थाण तेरा बनवा कै दादा, सेवा रोज करूँगा। म्हारा बेड़ा पार लगा दयो, थारी पूजा रोज करूँगा।। (1) तेरी धोली चादर ल्या दूँगा-੨ मैं तेरे चरण दबा दयूँगा-੨ भजनों का सुमिरन, तेरे नाम का दोणू टैम करूँगा। (2) जिस घर पै किरपा थारी हो-੨ वहाँ बड़ती नहीं बीमारी हो-੨ खीर चूरमा भोग लगा, चरणां मैं ध्यान धरूँगा। (3) मावस नै जो भी ध्यान धरै-੨ दादा पितृ कल्याण करै-੨ डूब तेरी भक्ति मैं, तेरा प्रचार करूँगा। (4) थारी महिमा सब नै जानी सै-੨ "शुभम" की मीठी वाणी सै-੨ "प्रिंस जैन" की गेल्याँ, मैं थारा नाम रटूँगा। लेखक: प्रिंस जैन गायक: शुभम रिठालिया मोबाइल: 8750104889 🙏🙏🙏🙏🙏 प्रेषक: प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले)

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दौड़ा आएगा - दौड़ा आएगा (Lyrics & Voice:- Kundan Akela)

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भजन लीरिक्स: दौड़ा आएगा - दौड़ा आएगा। है विश्वास मेरी सुन अर्जी, रुक नहीं पाएगा। (1) दया का सार है बाबा ये लखदातार है बाबा। फंसी मझधार नैया लगाता पार है बाबा। कदम कदम पे साथ निभाता, दयालु ये दाता। हो संग सांवरिया तो फिर दुख, कैसे सताएगा। दौड़ा आएगा.... (2) ये मेरा खाटू वाला बड़ा ही है दिलवाला। शीश के दानी का तो यही अंदाज़ निराला। प्रेमियों के प्रेम का भूखा श्याम धनी मेरा। बड़े प्यार से आकर अपने गले लगाएगा। दौड़ा आएगा.... (3) बुला कर देखो दिल से सुना कर देखो दिल से। श्याम प्यारे को अपना बना कर देखो दिल से। कर लीले की अस्वारी ये छोड़ के खाटू धाम। झट से बिगड़ी आकर "कुंदन" श्याम बनाएगा। दौड़ा आएगा.... 🙏🙏🙏🙏🙏 लेखक व गायक: श्री कुंदन अकेला जी  मोबाइल: 94-158-25-464 आप सभी श्याम प्रेमियों को नववर्ष 2021 की हार्दिक शुभकामनाएँ !