बेटी हूँ तो क्या बेटे से ज्यादा फर्ज़ निभाऊँगी (Lyrics-Naresh Narsi Ji & Voice-Dr. Srishti Jangir)
माना कठिन डगर है मेरी पर मंजिल पा जाऊँगी। बेटी हूँ तो क्या बेटे से ज्यादा फर्ज़ निभाऊँगी। आए जो कभी समय बुरा तो याद मुझे तुम कर लेना। मत कमज़ोर समझना खुद को आँख न आँसू भर लेना। बनकर लाठी संग आपके खड़ी नजर मैं आऊँगी। बेटी हूँ तो क्या.... मत मारो मुझे कोख में मम्मी इस धरती पर आने दो। मुझको मेरा हक दो पापा कुछ करके दिखलाने दो। पढ़-लिख करके तुम दोनों का मैं सम्मान बढ़ाऊँगी। बेटी हूँ तो क्या.... मुझे मार कर क्या तुम खुद को माफ कभी कर पाओगे। बिन बेटी के बेटे वालो बहु कहाँ से लाओगे। रिद्धि-सिद्धी और सरस्वती-लक्ष्मी बन घर भर जाऊँगी। बेटी हूँ तो क्या.... बहन न होगी तिलक न होगा किसके वीर कहाओगे। हनी सिंह के दीवानों तुम लता कहाँ से लाओगे। पोंछ ले आँसू "नरसी" अब मैं और नहीं मर पाऊँगी। बेटी हूँ तो क्या.... रचयिता:- श्री नरेश नरसी जी। फतेहाबाद-हरियाणा। स्वर:- डॉ० सृष्टि जांगिड़। मोबाइल: 9416241061 🙏🙏🙏🙏🙏 प्रषेक: प्रदीप सिंघल। शुभचिंतक: सिंघल परिवार से लाला श्री अमृतलाल सिंघल जी। श्रीमती सुलोचना सिंघल जी। प्रदीप सिंघल व मीनू सिंघल। अंशिका व पाकी सिं...