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Surname Singhal (अग्रसेन जी के वंशज)

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#सिंघल_हिन्दी_में #Singhal_इंग्लिश_में #ਸਿਂਘਲ_पंजाबी_में 🙏🙏🙏🙏🙏  

जीवन में उम्मीद का प्रभाव (-PS)

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-singhalpardeep.blogspot.com

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कभी रूठना ना मुझसे तू श्याम साँवरे (Lyrics -Romi Ji & Voice -Sanjay Mittal Ji)

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सुप्रसिद्ध भजन: कभी रूठना ना मुझसे.... स्थाई: कभी रूठना ना मुझसे तू श्याम साँवरे-੨ मेरी जिंदगी है अब तेरे नाम साँवरे-੨ मेरा साँवरे सवेरा तेरे नाम से-੨ तेरे नाम से ही जिंदगी की शाम साँवरे-੨ (1) चिंतन हो सदा इस मन में तेरा, चरणों में तेरे मेरा ध्यान रहे। चाहे दुख में रहूँ चाहे सुख में रहूँ, होंठों पे सदा तेरा नाम रहे। तेरे नाम से ही मेरी पहचान है। तेरी सेवा में ही मेरा कल्याण है। मेरा रोम-रोम तेरा कर्जाई है, तेरे कितने गिनाऊँ एहसान साँवरे। कभी रूठना ना.... (2) दिल तुमसे लगाना सीखा है, तुमसे ही सीखा याराना। जीवन को संवारा है तुमने, बदले में मैं दूँ क्या नज़राना। मैंने दिल हारा ये भी तेरी प्रीत है। मेरी हार में भी श्याम मेरी जीत है। बस दिल की यही है एक आरजू, तुझे दिल का बना लूँ मेहमान साँवरे। कभी रूठना ना.... (3) दुनिया के मैं अवगुण क्या देखूँ, मेरे अवगुण कई हजार प्रभु। तुम अवगुण मेरे सब ढ़कलोगे, इतना है मुझे एतबार प्रभु। मेरे अवगुणों से नजरों को फेर लो हाँ फेर लो। अपनी बाँहों में प्रभु जी मुझे घेर लो हाँ घेर लो। ऐसी कृपा करो ना इस दास (रोमी) पे, रहे पापों का ना कोई भी निशान साँवरे। कभी रू...
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अगर आप अपने किसी मित्र, रिश्तेदार, परिचित या फिर भाईचारे में ही क्यों ना सही, यदि उनके जीवन की हर खुशी में हर समय शामिल हुए हैं तो उनके दुख तकलीफ में भी शामिल होना आपका दायित्व बनता है..! -प्रदीप सिंघल

25 नवंबर सांय 6 बजे के करीब मेरे पिता जी का स्वर्गवास हो गया (-Pardeep Singhal)

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मेरे पिता जी ने मुझे सदा सरलता व सादगी के साथ जीवन व्यतीत करने की शिक्षा दी। उन्हें ढोंग-दिखावे से सख्त नफरत थी। उनका मानना था कि यदि दिल में प्यार प्रेम नहीं तो जुबां से कहने का क्या फायदा। जब मैं छोटा था तो उन्होंने मुझे अपनी साइकिल पर बैठा खूब घुमाया और जब 1998 के बाद पढ़ाई छोड़ मैंने कामकाज संभाला तो उन्होंने मेरे साथ दोपहिया वाहन पर पीछे बैठ खूब सफर तय किया। हमारे दो पहिया वाहन पर लोगों को अक्सर दो हैलमेट नजर आते थे। लगभग 22 साल उन्होंने मेरे पीछे बैठ सिर्फ पिता ही नहीं एक अच्छे दोस्त, अच्छे भाई, अच्छे संगी की तरह साथ निभाया। हमने दिल्ली की सड़को पर कई हजार किलोमीटर का सफर एक साथ तय किया। सिर्फ घर से अपने व्यवसायी स्थल ही नहीं, रिश्तेदारी से लेकर भाईचारे तक और घूमने फिरने तक हमने कई यात्राएं एक साथ की। स्वयं चाहे कैसा भी पहना और खाया पर मुझे अच्छे से अच्छा पहनाने और खिलाने का प्रयास किया। ऐसे पिता के लिए जितना लिखा जाये शायद उतना ही कम है। आप में से बहुत से प्रतिष्ठित मेरे फेसबुक मित्र उनसे दो चार बार मिले भी हैं। जिसके लिए मैं आपका हृदय से आभार करता हूँ और आप सभी से आग्रह करता हू...

लेखक का कर्तव्य (-Singhal)

लेखक का कर्तव्य सत्य लिखना है ना कि किसी की झूठी प्रशंसा करना। जो चीज़ उसने महसूस ही नहीं कि, जिससे वो स्वयं रूबरू ही नहीं हुआ। उसके बारे में कुछ भी झूठ, मनगढंत लिखकर वो सिर्फ स्वयं का ही नहीं, बल्कि पूरे समाज का दोषी कहलाता है। लोगों ने उसे अपना आदर्श माना है, उसे अपना प्रेरणा स्रोत समझा है। ना कि कोई मदारी जो कि अपना पेट भरने के लिए खेल तमाशा दिखाये और सबका मन बहलाये। -प्रदीप सिंघल

सत्य (-श्री नरेश नरसी जी की कलम से)

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मर्मस्पर्शी भजनों के लेखक व गायक सरदार श्री हरिमहेन्द्र सिंह "रोमी" जी

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भजन लीरिक्स: स्थाई: अगर दिल खोला होता उस दिलदार से। खुलवाना ना पड़ता फिर औज़ार से। दिल की होती तुमको कभी बीमारी ना। दिल की बातें कर लेते दिलदार से। (1) प्यार के दो पल मिले उसे प्यार से जी ले। श्याम का अमृत मिला उसे प्यार से पी ले। अगर तुमने संभाला होता दिल को प्यार से। खुलवाना ना पड़ता.... (2) रो रहा है क्यों तू प्यारे क्यों है तू गुमसुम। दिल की अपने बात पगले इक बारी तो सुन। अगर दिल को लुटाया होता उस दिलदार पे। खुलवाना ना पड़ता.... (3) दिल की हकीकत को सदा दिलदार ही जाने। हाल-ए-दिल "रोमी" साँवरा यार ही जाने। मरहम रखवाया होता अगर साँवरे यार से। खुलवाना ना पड़ता.... लेखक व गायक: सरदार श्री हरिमहेन्द्र सिंह "रोमी" जी। को मेरा कोटि कोटि प्रणाम। 🙏🙏🙏🙏🙏 प्रेषक: प्रदीप सिंघल (नोट: उद्देश्य सिर्फ इतना ही कि अच्छी रचनाएं अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे) 🙏🙏🙏🙏🙏

17 अक्टूबर कुलपिता महाराजा श्री अग्रसेन जी की जयंती पर प्रस्तुत है ये गीत (-SARC)

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भजन लीरिक्स: श्री राम प्रभु के वंशज है हम और माधवी के लाल। हम गर्व से सीना तान के कहते हम है अग्रवाल। हम अग्रवंश के बेटों का सारे जग में डंका बजता है। हर दान धर्म में अग्रवंश ही सबसे आगे रहता है। कुलदेवी है महालक्ष्मी और है नागलोक ननिहाल। हम गर्व से..... म्हारे अग्रसेन ने सत्य अहिंसा राह पे हमको चलाया है। व्यापार करो सत्कर्म करो हमको तो ये समझाया है। जो भी इनकी राह पे चलता हो जाता वो निहाल। हम गर्व से..... इस अग्रवंश की शान देखकर हर कोई आहें भरता है। हमको भी इसमें जन्म मिले ये सबकी जुबां पे रहता है। महालक्ष्मी की छाया "संजय" हम पे रहती हर हाल। हम गर्व से..... लेखक व गायक: अग्रविभुति श्री संजय अग्रवाल जी। रायगढ़ - छतीसगढ़। मोबाइल: 810-945-95-55 ।। जय श्री अग्रसेन जयते नम:।। आप सभी अग्रबंधुओं को कुलपितामह महाराजा श्री अग्रसेन जी की जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ। प्रेषक: अग्रवंशी प्रदीप सिंघल।  

बात दिल की जुबां पे आ जाये तो क्या होता है, वही होता है जो मंजूरे खुदा होता है।

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नाम सिंघल है मेरा दिल की खिड़की से बात करता हूँ। दिमाग से नहीं दिल से रिश्ते नाते निभाता हूँ। तुम कुछ भी समझो, तुम कुछ भी कहो, मैं तो बस दिल की बात दिल से करता हूँ। -प्रदीप सिंघल

कुलपितामह महाराजा श्री अग्रसेन जी पर भजन (लेखक व गायक: -राजेन्द्र अग्रवाल जी)

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Bhajan Lyrics:- जय अग्रसेन महाराज तेरी महिमा भारी।  बजता डंका जग में पूजे दुनिया सारी। जय अग्रसेन महाराज.... महाभारत के रण में कन्हैया के साथ थे। सुना है गरीबों के तुम्ही दीनानाथ थे। तेरे वंश पे लक्ष्मी का उपकार है भारी। जय अग्रसेन महाराज.... ईंट एक रूपया लेकर किया कल्याण था।  सारे गुणों के धारी नहीं अभिमान था। सुर नर मुनि गण भी थे तेरे आभारी। जय अग्रसेन महाराज.... अग्रोहा में लगता जैसे आज भी बसेरा है। मिलता है सब कुछ दर से बना जो भी तेरा है। "राजू" पर भी भगवन करो नज़र तुम्हारी।  जय अग्रसेन महाराज.... लेखक व गायक: राजेन्द्र अग्रवाल जी। प्रषेक: प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले) सभी अग्रबंधुओं को....  ।। जय जय महालक्ष्मी ।। ।। जय जय श्री अग्रसेन ।।

दर्द भरी कहानी

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जब किसी व्यक्ति के स्वाभिमान को ठेस पहुंचती है। तो वो व्यक्ति अंदर से पूूरी तरह टुट 

सिंघल तो कहे दिल की बात (Pardeep Singhal)

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इससे पहले की लोग तुम्हें भूल जाएं, तुम लोगों को याद दिलाते रहना कि तुम उन्हीं के बीच मौजूद हो! -प्रदीप सिंघल

खेल समय का (-सिंघल प्रदीप)

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ये समय तय करता है, कि आपने जो मेहनत की है, जो कोशिश की है। वो कितनी सही और कितनी गलत है। -प्रदीप सिंघल

सुप्रसिद्घ हरियाणवी भजन देना है तो दे-दे साँवरे (Lyrics-Bhimsen Bhiwani)

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सुप्रसिद्ध हरियाणवी भजन:- देना हो तो दे-दे साँवरे, क्यूँ ज्यादा तरसावै सै-२ ना देना तो साफ नाट, क्यूँ लखदातार कुहावै सै-२ तेरे काट-काट कै चक्कर, मैं तो तेरे दर के हार लिया। मैं ना पिंड तेरा इब छोडूँ, मनै मन मै पक्का धार लिया। भगत तेरा भुखा सोवै, तू 56 भोग उडावै सै। ना देना तो.... तेरे भण्डारे मैं कमीं नहीं, यो कैणा दुनिया सारी का। भगत तेरा दुख पावै, तो के फायदा साहूकारी का। लेन-देन का जिक्र करै ना, मनै बातां मैं बहकावै सै। ना देना तो.... तनै देना पडै जरूरी, मैं ज़िद्दी घणां अनाड़ी सूँ। बाबा सेठ तू नंबर वन सै, तो मैं नंबर एक भिखारी हूँ। सब भगतां के आगै क्यूँ तू , अपनी पोल खुलावै सै। ना देना तो.... मैं हर ग्यारस नै, तेरे धाम पै चलकै आऊँ सूँ। फोकट मैं कोणया माँगू, तेरे नये-नये भजन बनाऊं सूंँ। क्यूँ "भीमसेन" नै देवण मैं, तू कंजूसी दिखलावै सै। ना देना तो.... (तर्ज:- मेरे पाछे-पाछे आवण का) हमारी जानकारी के मुताबिक इस भजन को लिखे लगभग आज 15 वर्षों से भी अधिक समय हो गया। लेकिन ये सदाबहार भजन आपको फिर भी कहीं ना कहीं सुनाई जरूर दे जायेगा। धार्मिक कीर्तन क...

मतलब की दुनिया सारी लीरिक्स (-Naresh Narsi Ji)

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हकीकत-ए-दुनिया: मतलब की दुनिया सारी, मतलब की रिश्तेदारी। मतलब के लोग यहाँ पर, मतलब की है सब यारी। अन्धा करती इन्साँ को, मतलब ऐसी बिमारी। मतलब बिन बोले नाहिं, अपनी ही नारी। मतलब की दुनिया सारी..... मतलब पीछे एक भाई, भाई को गोली मारे। मतलब घर की बहू जलवा दे। मतलब ही सारी दुनिया में नाम करा दे। और मतलब ही बीच चौराहे पीटवा दे। बच के रहना सभी, गाँठ बान्धो अभी। एक दिन आ सकती भैया, अपनी भी बारी। मतलब की दुनिया..... मतलब को मत लब पर लाना, मतलब चीज़ बुरी है। पाला पड़े ना कभी मतलबी से। मतलब पीछे खोटे कर्म ना करना कभी भी प्यारे मेरा कहना यही है सभी से। मतलबी ना बनो, मान लो सज्जनों। मेरा मतलब समझाना, मर्जी तुम्हारी। मतलब की दुनिया..... मतलब के सब खेल तमाशे, इस दुनिया में। "नरसी" यहाँ कोई नहीं है किसी का। मतलब से मतलब हैं रखते भाई बन्धु प्यारे। रिश्तेदारी है नाम इसी का। मतलबी ये जहाँ, कौन किसका यहाँ। मतलब से भरी पड़ी है संसद हमारी। मतलब की दुनिया..... रचनाकार: श्री नरेश जांगिड़ -नरसी जी। फतेहाबाद -हरियाणा। मो० 9416241061 🙏🙏🙏🙏🙏 Watch On Youtube:...

बेटी हूँ तो क्या बेटे से ज्यादा फर्ज़ निभाऊँगी (Lyrics-Naresh Narsi Ji & Voice-Dr. Srishti Jangir)

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माना कठिन डगर है मेरी पर मंजिल पा जाऊँगी। बेटी हूँ तो क्या बेटे से ज्यादा फर्ज़ निभाऊँगी। आए जो कभी समय बुरा तो याद मुझे तुम कर लेना। मत कमज़ोर समझना खुद को आँख न आँसू भर लेना। बनकर लाठी संग आपके खड़ी नजर मैं आऊँगी। बेटी हूँ तो क्या.... मत मारो मुझे कोख में मम्मी इस धरती पर आने दो। मुझको मेरा हक दो पापा कुछ करके दिखलाने दो। पढ़-लिख करके तुम दोनों का मैं सम्मान बढ़ाऊँगी। बेटी हूँ तो क्या.... मुझे मार कर क्या तुम खुद को माफ कभी कर पाओगे। बिन बेटी के बेटे वालो बहु कहाँ से लाओगे। रिद्धि-सिद्धी और सरस्वती-लक्ष्मी बन घर भर जाऊँगी। बेटी हूँ तो क्या.... बहन न होगी तिलक न होगा किसके वीर कहाओगे। हनी सिंह के दीवानों तुम लता कहाँ से लाओगे। पोंछ ले आँसू "नरसी" अब मैं और नहीं मर पाऊँगी। बेटी हूँ तो क्या.... रचयिता:- श्री नरेश नरसी जी। फतेहाबाद-हरियाणा। स्वर:- डॉ० सृष्टि जांगिड़। मोबाइल: 9416241061 🙏🙏🙏🙏🙏 प्रषेक: प्रदीप सिंघल। शुभचिंतक: सिंघल परिवार से लाला श्री अमृतलाल सिंघल जी। श्रीमती सुलोचना सिंघल जी। प्रदीप सिंघल व मीनू सिंघल। अंशिका व पाकी सिं...

Coming Soon बेटी हूँ तो क्या बेटे से ज्यादा फर्ज़ निभाऊँगी (Lyrics: Naresh Narsi Ji & Voice: Srishti Jangir)

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मेरे बड़े भाई सम्मान आदरणीय श्री नरेश नरसी जी फतेहाबाद वाले, जिनकी लेख्नी व गायकी आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है। इनके शुभचिंतक और प्रशंसक इन्हें अपने परिवार का सदस्य समझते हैं। इन्होंने अपने सरल स्वभाव और मिलनसार अंदाज़ से लोगों के दिलों में अपना घर बनाया है। 23 जुलाई सुबह 7 बजे हिसार की जानी मानी म्यूज़िक कंपनी जुगनी सीरिज के माध्यम से हमारी लाड़ो बिटिया डॉ० सृष्टि जांगिड़ द्वारा पहली बार गाया जाने वाला और नरेश नरसी जी द्वारा लिखा गीत बेटी हूँ तो क्या हुआ ऱिलिज हो रहा है।  एक पिता जिसकी लाड़ो बिटिया पहली बार कोई गीत गाये और वो भी स्वयं उसी का लिखा हुआ। एक पिता के लिए ये बड़े गर्व की बात है। मैं इस खुशी के मौके पर जांगिड़ परिवार फतेहाबाद से हमारे भाई श्री नरेश नरसी जी और लाड़ो बिटिया सृष्टि जांगिड़ को अग्रिम शुभकामनाएँ देता हूँ और ये आशीर्वाद देता हूँ कि बिटिया रानी आप अपने पिता जी से भी ज्यादा तरक्की करें। अपने घर परिवार का नाम रोशन करें। आपकी आवाज सिर्फ अपने देश ही नहीं पूरी दुनिया में सुनाई दे और हर बेटी अपने पिता से कहे। रिद्धि सिद्धि और सरस्वती लक्ष्मी बन घर भर जाऊ...

क्यूँ ना सुणता डमरू वाला (लेखक व गायक: श्री भीमसैन जी -भिवानी)

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भोलेनाथ मैं तेरे नाम की रोज रटूँ सूं माला। क्यूँ ना सुणता डमरू आला, क्यूँ ना सुणता डमरू आला। तन्नै चाला कर दिया मोटा पी के भांग का लौटा। बस इतना मन्नै बता दे मेरा कर्म लिख्या क्यूँ खोटा। बंद किस्मत का भोलेनाथ जी कद खोलेगा ताला। क्यूँ ना सूणता.... महंगाई मैं भोले ना घर का चालै गुजारा। क्यूँ आँख मूंद के बैठया ना समझे मेरा इशारा। देना सै तो ढंग ते दे ना बेशक कर दे टाला। क्यूँ ना सुणता.... तू उनकी करै सुणाई जो कांवड़ तेरी ल्यावैं। इब मन्नै बता दे भोले तै के मेरे ते चाहवै। "भीमसैन" तै भोलेनाथ तेरा आज पड़या सै पाला। क्यूँ ना सुणता.... लेखक व गायक: श्री भीमसैन जी भिवानी। दादा आपको मेरी ओर से कोटि कोटि प्रणाम। 🙏🙏🙏🙏🙏 प्रषेक: प्रदीप सिंघल। (जीन्द वाले) (नोट: उदेश्य सिर्फ इतना ही है कि दादा श्री भीमसैन जी भिवानी वालों के लिखे व गाये भजन जन जन तक पहुँचे)

रै सुण खाटू आले तेरे बिना ना रोटी भावै (-Naresh Narsi Ji)

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सुप्रसिद्ध हरियाणवी भजन: ज्यूँ-ज्यूँ ग्यारस नीङे आवै, याद कसूती आवै। रै सुण खाटू आले, तेरे बिना ना रोटी भावै। रै सुण लीले आले, तेरे बिना  ना रोटी भावै। (1) बैरण नींद आवै कोन्या, पीछे मेरे पड़रह्या तू। क्यूकर मैं भुलाऊं तन्ने, भीतर ले में बड़रह्या तू। सुपणे में भी खाटू दिखै, साबत रात जगावै। रै सुण खाटू आले.... रै सुण लीले आले.... (2) कालजे मैं म्हारै बाबा, उठ रही हुक सी। तेरी याद की या दिल पै, लागै सै बंदूक सी। कामकाज मैं जी ना लागै, तेरी याद सतावै। रै सुण खाटू आले.... रै सुण लीले आले.... (3) ग्यारस पै मिली या चिट्ठी, तेरे मेरे मेल की। आजा-आजा बोलै सीटी, खाटू आली रेल की। घड़ी-घड़ी न्यू लागै के, तू हेल्ला मार बुलावै। रै सुण खाटू आले.... रै सुण लीले आले.... (4) एकले का जी ना लागै, बैठया सोचूं कोली मैं। खाटू के मैं आ के खेलूं, भगतां से होली मैं। जे नहीं बुलाया मन्ने, दुनिया तेरी हंसी उडावै। रै सुण खाटू आले.... रै सुणलीले आले.... (5) श्याम रंग आली बाबा, चूंदड़ी मैं ओढूं जी। इब तो मैं बाबा तेरा, पिंड कोन्या छोडूं जी। छोड़ के दुनियादारी  "नरसी", ...

मुझको विश्वास है साँवरे (Lyrics -श्री रोमी जी)

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तुम हमारे बनों ना बनों हम तुम्हारे रहेंगे सदा। तुम हमारी सुनों ना सुनों हम तो दिल की कहेंगे सदा। मुझको विश्वास है साँवरे इक ना इक दिन हमारे बनोगे। सर झुका जो रहेगा मेरा इक ना इक दिन तो हाथ धरोगे। माना हम हैं नालायक बड़े हमको लायक बना लीजिये। आप से बस यही प्रार्थना अपना सेवक बना लीजिये। छीन करके मेरे अवगुणों को सद्गुणों से ये झोली भरोगे। सर झुका जो रहेगा.... मुझको विश्वास है साँवरे.... हमको मंजिल की परवाह नहीं तेरी राहों पे हम चल पड़े। हमको दुनिया से क्या वास्ता हम तो तेरी शरण में पड़े। मुझको विश्वास है साँवरे इक ना इक दिन तो संग चलोगे। सर झुका जो रहेगा.... मुझको विश्वास है साँवरे.... मेरी आँखों में सूरत तेरी नाम होठों पे बस आपका। "रोमी" बातें करे आपकी दिल पे अधिकार है आपका। मुझको विश्वास है साँवरे इक ना इक दिन तो दिलबर बनोगे। सर झका जो रहेगा.... मुझको विश्वास है साँवरे.... इस भजन के लेखक व गायक: आदरणीय Singh Harimahendra Pal "रोमी" जी। को हमारा कोटि-कोटि प्रणाम। शुभ चिंतक: श्रीभगवान अहलावत जी। श्री सुरेश शर्मा जी। श्री संजीव गोयल ज...

श्री नरेश नरसी भाई को आने वाले नये भजन पुष्पों के लिए मुबारकबाद (-Pardeep Singhal)

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श्री नरेश नरसी जी। फतेहाबाद - हरियाणा। 2 जुलाई 2020 को पता चला कि नरेश नरसी भाई के शीघ्र ही आने वाले कुछ नये भजनों की रिकॉर्डिंग और शूटिंग चल रही है। मन को बड़ी प्रसन्नता हुई। वैश्विक महामारी कोरोना काल के चलते लगे जनता कर्फ्य व लॉकडाउन के दौरान काफी लंबे समय से कुछ नया सुनने को नहीं मिला। लेकिन इन सबके बीच एक ऐसे लेखक व गायक द्वारा कुछ नया सुनने को मिलना, एक उपहार स्वरूप है। जिन्होंने अपने सरल स्वभाव और मिलनसार अंदाज़ से अपने प्रशंसकों को सिर्फ अपना दीवाना ही नहीं बनाया। बल्कि अपने प्रशंसकों के दिलों में घर बनाया। जो कि काबिले ऐ तारीफ है जिसके बारे में जितना कहा जाए उतना ही कम है। मैं भी इनके प्रशंसको की बेशुमार भीड़ में से एक बहुत ही छोटा और साधारण सा प्रशंसक हूँ। जो कि अपने साधारण तरीके से अपना प्रेम व्यक्त करता रहता हूँ। मेरी प्रभु से यही कामना है कि आपके लिखे व गाये भजन जन जन तक पहुंचे। दुनिया के हर कोने में लोग आपकी लेख्नी व गायकी के दीवाने हों। 🙏🙏🙏🙏🙏 शुभचिंतक: प्रदीप सिंघल। (जीन्द वाले) नजफगढ़ - नई दिल्ली।

तेरा कीर्तन ही साँवरिया (Present By Sewak Music)

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तेरा कीर्तन ही साँवरिया व्यापार हो गया। तेरे भक्तों के मनोरंजन का आधार हो गया। तेरे जागरण का खर्चा लाखों में होता है। जो भजन सुनाते उनसे इक सौदा होता है। फिर कहते वो आने को तैयार हो गया। तेरे भक्तों के मनोरंजन.... लाखों लेकर जो तेरा वहाँ भजन सुनाते हैं। तुझको ही भूलकर बस वो भक्तों को नचाते हैं। लगता है जैसे ठुमकों का बाजार हो गया। तेरे भक्तों के मनोरंजन.... जो गायक Online तेरा कीर्तन करते थे। वो मुफ्त में सबको अपनी सेवाएं देते थे। सुनते हैं वहाँ भी पैसों का व्यवहार हो गया। तेरे भक्तों के मनोरंजन.... ये सच है श्याम मेरा बस प्रेम का भूखा है। दो भाव भरे आँसू से पल भर में पिघलता है। "संजय" फिर क्यूं ये दिखावा हर बार हो गया। तेरे भक्तों के मनोरंजन.... रचियता व स्वर: श्री संजय अग्रवाल जी। रायगढ़ - छतीसगढ़। मोबाइल: 8109459555 ।। जय श्री श्याम जी ।। प्रषेक: प्रदीप सिंघल। (जीन्द वाले)

The Thinking Of Pardeep Singhal

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मेरा ये मानना है कि जिस तरह प्रभु श्री कृष्ण जी के लिए माता देवकी जी और माता यशोद्धा जी दोनों ही वंदनीय थी। एक ने जन्म दिया और दूसरी ने पालन पोषण किया। ठीक उसी तरह हर व्यक्ति को अपनी जन्मभूमि और कर्मभूमि को कभी नहीं भूलना चाहिए। एक भूमि पर हमारा जन्म हुआ और दूसरी पर हमारी मेहनत, हमारी लग्न के बलबूते हमारे और हमारे परिवार के सपने साकार हुए। सोशल मीडिया के माध्यम से मैं अपनी जन्मभूमि और कर्मभूमि का शुकराना करने का हमेशा प्रयास करता हूँ। बहुत से लोग मुझे मेरी जन्मभूमि के नाम प्रदीप सिंघल जीन्द वाले के नाम से भी जानते हैं। आज हमारे दिल्ली के घर के बाहर लगी नाम प्लेट भी हमारी जन्मभूमि का हृदय से आभार व्यक्त करती है। इक हसरत है मेरी जब जब लोगों की जुबां पर मेरा नाम आए, लोगों की जुबां पर मेरा जन्मभूमि और कर्मभूमि से प्रेम भी याद आ जाए। लेख: अग्रवंशी प्रदीप सिंघल।

हम श्याम दीवाने हैं (-AKM The Writer & Singer Of Most Popular Bhajan)

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मेरा मनपसंद भजन: हम श्याम दीवाने हैं यह शान से कहते हैं। दिन रात सांवरे की मस्ती में ही रहते हैं। मिल जाए कोई प्रेमी ना हेलो ना हाय। बाबा का नाम लेकर, बाबा का नाम लेकर जय श्याम जी कहते हैं। दिन रात.... जब संग सांवरा है किस बात की चिंता है। खुशियां और गम सारे, खुशियां और गम सारे हंसते हुए सहते हैं। दिन रात.... कोई पूछे पता हमसे क्या ठोर ठिकाना है। हम अपने सांवरे के , हम अपने सांवरे के चरणों में ही रहते हैं। दिन रात.... मेरी जीवन नैया का है श्याम खिवैया तू। जब डूबे सब दुनिया , जब डूबे सब दुनिया हम शान से बहते हैं। दिन रात.... क्या लेना है दुनिया से सब शोर शराबा है। "मीतू" के भजनों में, "मीतू" के भजनों में हम खोए रहते हैं। दिन रात.... On YouTube: https://youtu.be/57hzTj0RPS8 https://youtu.be/Kr4FogSQGF8 https://youtu.be/BGoxUBHtQXw https://youtu.be/6TfKywvFess लेखक एवं गायक : अमित कालरा " मीतू " जी। (गुरूग्राम - हरियाणा) 🙏🙏🙏🙏🙏 ।। जय श्री श्याम जी।। भजन प्रेषक : प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले )

नाम सिंघल है मेरा (-Pardeep Singhal)

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जीन्द शहर मैं जन्म होया,मेरा प्रांत खास सै हरियाणा। सब काम नजफगढ़ दिल्ली मैं,मेरा शौक श्याम के गुण गाना। इन पंक्तियों को लिखने के लिए  वि शेष आभार: दादा श्री भीमसेन जी। भिवानी - हरियाणा। 🙏🙏🙏🙏🙏 On Fb: अग्रवंशी प्रदीप सिंघल https://www.facebook.com/PardeepSinghalJindWale On YouTube: अग्रवंशी प्रदीप सिंघल https://www.youtube.com/channel/UCKIedCiUOcheDMMQ7aqajnA On Gyan App: अग्रवंशी प्रदीप सिंघल @APS ON Twitter: Pardeep Singhal @Pardeep55657109 Email Add. PARDEEPSINGHAL35@GMAIL.COM On Blog: http://singhalpardeep.blogspot.com

तेरे ये वशंज तुझको पुकारे (बाबा अग्रसेन जी)

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तर्ज: - शिर्डी वाले साईं बाबा.. तेरे ही वंशज तुझको पुकारे, दर्शन को तरसे नैना हमारे। अग्रोहा वाले हे महाराजा, दर पे तुम्हारे हम सब हैं आये। सर को झुकाये कर को हैं जोड़े, आँखों से आंसू बहते ही जाये। अग्रोहा वाले.... अनोखा नगर बसाया, अग्रोहा नाम कहाया। अनोखी रीत चलाई, जहाँ में प्रीत बढ़ाई। अठारह यज्ञ कराये अग्रवंशी कहलाये। अठारह पुत्र थे उनके अठारह गोत्र है जिनके, अंहिसा को अपनाया हमारा मान बढ़ाया। तेरी महिमा का किस्सा बयां हम सब करें क्या। अब तो है हर पल दिल में हमारे, गुजरे ये जीवन तेरे सहारे। अग्रोहा वाले.... महालक्ष्मी को मनाया ऐसा वरदान पाया। मची यूं धूम तुम्हारी सुखी थी जनता सारी। इन्द्र भी तुझसे हारा, फंस गया वो बेचारा। चला ना कोई बहाना, पड़ा अग्रोहा आना। नहीं कोई तुमसा दूजा करें, हम तेरी पूजा। तेरे द्वारे जो आता, कभी खाली ना जाता। बिगड़ी हमारी तू ही बनाये भटके जो नईया पार लगाये। अग्रोहा वाले.... लेखक व गायक: अग्रविभुति: श्री संजय अग्रवाल जी। (रायगढ़ - छत्तीसगढ़) मोबाइल: 8109459555 ।। जय जय श्री बाबा अग्रसेन जी ।। 🙏🙏🙏🙏🙏 ...

अच्छी बातों और अच्छे विचारों का प्रचारक (-Pardeep Singhal)

एक व्यक्ति लिखने में बहुत ही अच्छा माहिर है। वो प्रतिदिन अपनी डायरी में कुछ ना कुछ जरूर लिखता। रोजाना लिखता है और डायरी को अपनी अलमारी में रख देता है। नित प्रतिदिन ऐसा ही करता है। एक दिन वो दुनिया से चला जाता है और वो डायरी अलमारी में ही रखी रह जाती है। उसके जाने के बाद अब वो डायरी महज एक घर का पुराना समान बनकर रह जाती है। ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो लोगों के बीच पहुंचनी चाहिए। लेकिन नहीं पहुँच पाती। कहीं हमारा अभिमान, तो कहीं हमारी अज्ञानता, तो कहीं हमारी नासमझी, तो कहीं हमारी झिझक के चलते वो अच्छी चीजें अलमारी तक ही सीमित रह जाती हैं। मैं इसीलिए सभी से आग्रह करता हूँ कि एक दूसरे के विचार, एक दूसरे की लिखी बातें जो आपको अच्छी लगती हैं, आपको उनकी ओर खींचती हैं, आकर्षित करती हैं। कोशिश किया कीजिये उन्हें ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की। मेरे कुछ मित्र बहुत ही अच्छा लिखते हैं। मैं कोशिश भी करता हूँ कि सोशल मीडिया के हर मंच से उनकी लिखी रचनाएँ, उनके लिखे भजन ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे। ये कार्य मैं किसी लालच या फिर लोभ से दूर निस्वार्थ भावना के साथ करने का प्रयास करता हूँ। जिसक...

सरदार श्री हरमहेन्द्र सिंह रोमी जी (खलीलाबाद)

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The Writer Of Most Popular Bhajans: 👇 क्यूं भटके मन बांवरे क्यूं तू रोता है। 👇 कभी रूठना ना मुझसे तू श्याम साँवरे। 👇 कांहे करता तू खूद पे गुमान बांवरे। 👇 टाबरां री आंगली पकड़ सांवरे। 👇 जीवन तो प्यारे इक रेल है। 🙏🙏🙏🙏🙏 नोट: उदेश्य सिर्फ इतना ही कि सिंह साहब हरमहेन्द्र सिंह "रोमी" जी की लिखी शिक्षादायी व प्रेरणादायी रचनाएँ जन जन तक पहुंचे। शुभ चिंतक: प्रदीप सिंघल। (जीन्द वाले) नजफगढ़ - नई दिल्ली।

सैंकड़ों सुप्रसिद्ध भजनों के लेखक (NNF)

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मेरे मनपसंद भजन: 👇 दिल में तू श्याम नाम की ये ज्योति जला के देख। आऐगा मेरा साँवरा दिल से बुला के देख। 👇 मैं के बोलूं श्याम धनी तन्नै सब बाता का बेरा सै। पिछले साल घणे तारे पर इबकै नंबर मेरा सै। 👇 मेरा संकट कटग्या जी मेहन्दीपुर के दरबार में। मेरा संकट कटग्या जी मेहन्दीपुर के दरबार में। 👇 आओ भक्तों तुमको खाटू की सैर कराएं। राजस्थान की धरती पे श्री श्याम ध्वजा लहराएं। 👇 इन्तजाम कर दिया है तुमने रोजी रोटी का। विश्वकर्मा जी से नक्शा पास करा दे कोठी का। 👇 दुनिया में डंका बाज्या अंजनी के लाल का। लाल लंगोटा संग में सोटा कमाल का। 👇 वक्त वक्त की बात बताऊँ वक्त बड़ा बलवान सुनो। इन्साँ क्या इस वक्त के आगे झुक गए खुद भगवान सुनो। 👇 मतलब की दुनिया सारी मतलब की रिश्तेदारी। मतलब के लोग यहां मतलब की है सब यारी। 👇 ऐ श्याम दीवाने पे इतना उपकार कीजिए। दो आंसू ले कर आया हूँ स्वीकार कीजिए। 👇 ओ बाबा जाट के घर मैं आज्या। आ के रोट राबड़ी खाज्या। 👇 खाटू आले श्याम इक काम कर दे। सारी दुनिया मैं मेरा नाम कर दे। 👇 नाच रहे हनुमान ...

जीवन तो प्यारे इक रेल है (Lyrics -रोमी जी)

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मेरी मनपसंद रचना: जीवन तो प्यारे, इक रेल है। कभी पैसेंजर - कभी मेल है। सुख-दुख की पटरी पे, दौड़ लगाती है। फिर भी मंजिल पे, बढ़ती जाती है। स्वासों का जब तक, इसमें तेल है। कभी पैसेंजर - कभी मेल है। जीवन तो प्यारे.... यात्री ज्यूँ चढ़ते और उतरते हैं। रिश्ते भी मिलते और बिछड़ते हैं। गौड़ के सिग्नल का, ये खेल है। कभी पैसेंजर - कभी मेल है। जीवन तो प्यारे.... अच्छे कर्मों का टिकट, कटाना है। टीटी जब मांगे, टिकट दिखाना है। वर्ना नर्कों की, होगी जेल है। कभी पैसेंजर - कभी मेल है। जीवन तो प्यारे.... "रोमी" कोई ना, बोझ उठायेगा। पाप की गठरी, अगर ले जायेगा। अंतिम यात्रा में, फिर तु फेल है। कभी पैसेंजर - कभी मेल है। जीवन तो प्यारे.... Singh Harimahendra Pal "रोमी" जी एक ऐसा नाम जिनकी लिखी हर रचना शिक्षाप्रद व प्रेरणादायी होती है। लेखक होना भी ऐसा चाहिए जो अपने चाहने वालों को सच से रूबरू करवाये। उसकी लिखी रचनाएँ ही उसकी पहचान हो। आपने इस भजन रचना में जीवन का बहुत ही अच्छा वर्णन किया है। बिलकुल सही कहा आपने पूरा जीवन ...

अग्रवाल समाज गोत्र (Aggarwal Community)

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।। जय श्री अग्रसेन जयते नम:।। 🙏🙏🙏🙏🙏 ऐरन, बंसल, बिंदल, भंदल, धारण, गोयन, गोयल, जिदंल। मधुकुल, कुच्छल, गर्ग, कंसल, नांगल, सिंघल, मंगल, मित्तल। तिंगल, तायल सारे जैसे, बगियाँ में फूल हैं साजे। 🙏🙏🙏🙏🙏

13 April 2017 (Old Memories)

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13 अप्रैल 2017 नजफगढ़ दिल्ली में एक ऐसे श्याम प्रेमी भाई राजेश जम्दगनी (शर्मा) जी से मुलाकात हुई। जिनका स्वभाव बहुत ही सरल और मिलनसार है। किसी ना किसी तरह से एक दूसरे के काम आने में सदैव तत्पर रहना आदत है भाई राजेश जी की। इनकी इसी उदारता और दयावान प्रवृत्ति के चलते प्रभु ने इन्हें बहुत कुछ दिया। हर सुख हर सुविधा इनके कदम चूमती है। इनके साथ मुझे भी राजस्थान खाटू धाम जाने का मौका तो मिला ही। साथ ही साथ दिल्ली या उसके पास होने वाले बाबा श्याम के कीर्तनों को सुनने जाने का भी अवसर मिला। बहुत अच्छे व्यक्तित्व के धनी हैं, इन्होंने अपनी दरियादिली के चलते लोगों के दिलों में जो जगह बनाई, उसका कोई सानी नहीं। जिसका जितना जिक्र किया जाए उतना कम है। विशेष आभार: श्री राजेश जम्दगनी जी। (शर्मा परिवार) नजफगढ़ - नई दिल्ली। एवं सुप्रसिद्ध भजन लेखक व गायक आदरणीय श्री नरेश नरसी (भाई) जी। (फतेहाबाद - हरियाणा) 🙏🙏🙏🙏🙏 लेख: प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले) नजफगढ़ - नई दिल्ली।

अग्रवाल समाज (-Pardeep Singhal)

अग्रवाल समाज एक ऐसा समाज जिसका जिक्र शब्दों में कर पाना इतना आसान नहीं। धार्मिक, सामाजिक, राजनैतिक, व्यापारिक तकरीबन हर क्षेत्र में आपको अग्रवाल समाज के लोग आगे आगे मिलेंगे। इस समाज ने एक से एक से व्यापारी, एक से एक अधिकारी, एक से एक डॉक्टर, एक से एक लेखक, एक से गायक दिये। जिन्होंने अपनी काबिलियत से अपने गाँव, अपने शहर ही नहीं अपने देश का भी नाम रोशन किया। जब दानवीरता की बात आती है तो ये समाज अपने सामर्थ्य अनुसार दिल खोल कर दान भी करता है। जिसका जिक्र हमारे इतिहास के पन्नों में भी दर्ज है। लेकिन कई बार दुख भी होता है जब इस समाज के लोगों के बारे में कुछ लोग कहते हैं कि बनिया कंजूस होता है। क्या पैसे को बचाना या फिर बेवजह खर्च ना करना कंजूसी कहलाता है। मैं ये नहीं कहूंगा कि बनिया समाज को कंजूस कहना गल्त है। लेकिन क्या एक दानवीर समाज को कंजूस कहकर संबोधीत करना गल्त नहीं है। ये सच है कि हमारा समाज व्यापारी है और व्यापारी की तरह सोचता है। लेकिन व्यापार तो हमारा कर्म है और कर्म ही हमारा धर्म भी है। पर ये बात भी सत्य है कि जब जब कोई हमारी चौखट पर उम्मीद लेकर आया। हमने प्रभु का नाम लेकर अप...

मैं श्याम तुम्हारा प्रेमी हूँ (Lyrics & Voice -ज्ञान पंकज जी)

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मेरा मनपसंद भजन: मैं श्याम तुम्हारा प्रेमी हूँ, इतनी सी मेरी कहानी है। सर झुका है तेरे चरणों में, आँखों में प्रेम का पानी है। मैं श्याम तुम्हारा.... कितने ही जन्म गुजार दिये, तब जाकर तुझको पाया है। तुमने ही अपना होने का, मुझको एहसास दिलाया है। कहीं और क्यों मैं फरियाद करूँ, क्यों और किसी को याद करूँ। मतलब की दुनिया पर बाबा, क्यों वक्त अपना बर्बाद करूँ। मैं श्याम तुम्हारा.... मैंने तेरे इस मंदिर को, अब अपना ठिकाना बना लिया। तेरे जलवों ने ही बाबा, मुझे तेरा दीवाना बना लिया। तुम सामने मेरे बैठे रहो, मैं मीठे भजन सुनाता रहूँ। तुम प्रेम निभाते रहना प्रभु, मैं अपना फर्ज निभाता रहूँ। मैं श्याम तुम्हारा.... कल क्या होगा इस "पंकज" का तुम जानो काम तुम्हारा है। जैसे चाहो वैसे रखना, मुझपे अधिकार तुम्हारा है। चाहे साँस चले या थम जाये, मन इन चरणों में रम जाये। तुम रहना प्रभु मेरे मन में, फिर और ना कोई रह पाये। मैं श्याम तुम्हारा.... (तर्ज: मैं पल दो पल का शायर हूँ) लेखक व गायक: श्री ज्ञान पंकज अग्रवाल जी। दिल्ली। मोबाइल नंबर: ...

हम गुनहगार है तेरे (Lyrics & Voice -रोमी जी)

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सुप्रसिद्ध भजन: हम गुनहगार हैं तेरे श्याम वर्षों से । मांगते हैं क्षमा तुझसे - तेरे भक्तों से ।। तूने सृष्टि की खातिर था शीश का दान दिया। तूने धर्म की रक्षा की सबका कल्याण किया। वीरों के वीर थे तुम शूरवीर थे। याचक बने श्रीकृष्ण तुम तो दानवीर थे। धर्म जो तूने हमें सिखलाया कर्म जो तूने करके दिखलाया। भूले बैठे हैं सारे आज देखो कलयूग में। हम गुनहगार हैं तेरे.... तेरी इस कुर्बानी से नहीं कुछ भी सीखा हमने। स्वार्थ ही स्वार्थ है प्रभु हम सबके जीवन में। दर तेरे आते हैं पिकनिक मनाते हैं। घर लौटकर बलिदान तेरा भुल जाते हैं। अहम में चूर हैं सत्य से दूर हैं। बनके प्रेमी तेरे फिर भी मशहूर हैं। दिखावा ही दिखावा है सबके जीवन में। हम गुनहगार हैं तेरे.... मेरी ये विनती है हमें सच्ची लग्न लगा। हमको भी थोड़ी सी भक्ति की राह दिखा। पड़े ना दिखावे में जग के छलावे में। हम बहके ना प्रभु ढोंगियो के छल - बहकावे में। मन में ईमान हो कभी ना गुमान हो। तेरे प्रेमी की जग में ऐसी पहचान हो। रखना तुम दूर "रोमी" को बुरे कर्मों से। हम गुनहगार हैं तेरे.... मर्मस्पर्शी रचनाओं के रच...

अपनी भक्ति का दो वरदान बाबा (Lyrics-Shyam Sundar Sharma Ji & Voice-रोमी जी)

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अपनी भक्ति का दो वरदान बाबा। मैं नित्त ही करता रहूँ तेरा गुणगान बाबा। तेरी दुनिया का धंधा कुछ समझ ना आया है। मोह माया का कैसा भ्रम जाल बिछाया है। इस जाल में फंस करके तुझको ही भुलाया है। जो अब तक पाया था सारा ही गंवाया है। अब दया करो तुम दे दो मुझको ज्ञान बाबा। अपनी भक्ति का.... स्वार्थ ने मुझको प्रभु अंधा बना दिया। बद से बदत्तर मैंने हर खोटा कर्म किया। अपना था जिसे समझा वो एक भुलावा था। इक तू ही हमें अपना मिला जग में श्याम पिया। दुःखडों का मारा हूँ करो कल्याण बाबा। अपनी भक्ति का.... तेरे चरणों की सेवा का यदि मौका मिल जाये। इस अधम जीव की भी ज़िन्दगानी बन जाये। तेरी रूप माधुरी का जी भर रस पान करूँ। मन पाप बसे मेरे उनकी जड़ हिल जाये। बदनाम हुआ मैं तो दिलादो मान बाबा। अपनी भक्ति का.... मैं प्रात: उठकर के तेरे कुण्ड में नहाऊँगा। चरणों में ध्यान लगा तेरी महिमा गाऊँगा। बन तेरा दीवाना तुझ में खो जाऊँगा। कर भक्तों की सेवा किस्मत चमकाऊँगा। फिर एक साथ बैठे भक्त - भगवान बाबा। अपनी भक्ति का.... इतना जो कर दोगे नहीं तुझे सताऊँगा। सा...

टाबरां री आंगली पकड़ साँवरे (Lyrics-रोमी जी)

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मेरा मनपसंद भजन : टाबरां री आंगली पकड़ सांवरे। बाथि घाल प्यार से जकड़ सांवरेे। टाबरां री फौज आई दूर - दूर से। देखै कांई टाबरां नै घुर - घुर के। छोड़ - छाड़ आया मैं अकड़ सांवरेे। बाथि घाल प्यार से जकड़ सांवरे। टाबरां री आंगली.... थारो सो दयालु बाबो दिखै कोणी ओर। पलकां उठार देखो टाबरां री ओर। थारे से ही नैन गये लड़ सांवरे। बाथि घाल प्यार से जकड़ सांवरे। टाबरां री आंगली.... छोड़ थारा दर कठे झाँकू कोणी श्याम। दर - दर माटी मैं तो फाँकू कोणी श्याम। रोऊँ थारे चरणां मै पड़ सांवरे। बाथि घाल प्यार से जकड़ सांवरे। टाबरां री आंगली.... भुल - चूक म्हारी बाबा माफ करो। मन्नडे री मैल म्हारी साफ करो। काटो म्हारे पापां वाली जड़ सांवरे। बाथि घाल प्यार से जकड़ सांवरे। टाबरां री आंगली.... सिर पे दयालु म्हारे हाथ धर दयो। टाबरां पे मेहर की नजर कर दयो। "रोमी" नाचै चौखट पे चढ़ सांवरे। बाथि घाल प्यार से जकड़ सांवरे। टाबरां री आंगली.... इस मर्मस्पर्शी भजन के रचियता व दिलकश आवाज के मालिक.. -Shri  Singh Harimahendra Pal "रोमी" जी को मे...

क्या क्या कमाया हमने (Lyrics-रोमी जी)

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आत्म चिंतन: क्या क्या कमाया हमने आओ हिसाब कर लें। दुनिया की बात छोड़े अपनी किताब पढ़ लें। कितनों का दिल दुखाया कितनों के दिल को तोड़ा। कितनों का प्यार पाया कितनों को खुद से जोड़ा। क्या क्या गंवाया हमने आओ हिसाब कर लें। क्या क्या कमाया.... कितनी करी है सेवा कितना करा दिखावा। कितना छला जगत को बनकर के इक छलावा। कैसे बिताया जीवन आओ हिसाब कर लें। क्या क्या कमाया.... कितना फर्ज निभाया कितना किया कर्म है। अब तक क्या हमने जाना अपना भी क्या धर्म है। कैसे निभाया रिश्ता आओ हिसाब कर लें। क्या क्या कमाया.... हम जागरण में जागे ज्योति सदा जलाई। जयकारे खूब बोले नाचे कमर हिलाई। कितना जगाया मन को "रोमी" हिसाब कर लें। क्या क्या कमाया.... इस भजन के लेखक व गायक: सरदार श्री हरमहेन्द्र सिंह "रोमी" जी को मेरा कोटि कोटि नमन। नमनकर्ता: प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले) 🙏🙏🙏🙏🙏 भजन प्रेषक: राजेश सोनी जी। नजफगढ़ - नई दिल्ली।

6/6/2020 (Happy Happy Birthday To You Singh Sahab)

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सरदार श्री हरमहेंद्र सिंह रोमी जी -मर्मस्पर्शी भजनों के लेखक व गायक (सिंह साहब) को हमारी ओर से जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी एफ बी पोस्ट व भजन रचनाओं से बहुत कुछ सीखा हम ने जिसका शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता। (1) उगता है अगर सुबह को सूरज, सांझ को वो ढ़ल जाता है। ये जीवन भी इसी तरह है, सुख दुख आता जाता है। (2) जीवन तो प्यारे इक रेल है, कभी पैसेंजर कभी मेल है। सुख दुख की पटरी पे दौड़ लगाती है, फिर भी मंजिल पे बढ़ती जाती है, स्वासों का जब तक इसमें तेल है। (3) चेहरे पे एक चेहरा झूठी शक्ल हमारी, दे दे धोखे सबको ये जिंदगी गुजारी। (4) हम हो गये हैं कैसे जब ये मैं सोचता हूँ, रोता हूँ रोमी छुपके खुद को ही कोसता हूँ। (5) जय बाबा की कहने की अब आदत हो गई। जय श्री श्याम कहने की अब आदत हो गई। 🙏🙏🙏🙏🙏 ऐसी बहुत सी बातें हैं जो आपकी ही रचनाओं की देन है। आप इसी तरह लिखते रहें और हम उन रचनाओं को सुनने के साथ साथ, जीवन में काम आने वाली बातें स्वयं तो सीखें ही। अपने बच्चों को भी सिखाते रहें। आपका आशीर्वाद हम पर सदैव बना रहे। शुभचिंतक -सिंघल परिवार जीन्द वाले।   ...

ना बेटी मारो (Lyrics & Voice -नरसी जी)

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फर्क नहीं बेटे बेटी में समझो माँ के प्यारो। ना बेटी मारो। भगवान की इस नेमत पे, क्यूं चलता जोर तुम्हारा। क्यूं बनते पाप के भागी, बिल्कुल भी नहीं विचारा। ममता की मूरत है बेटी ये सच्चाई स्वीकारो। ना बेटी मारो.... धन दौलत बेटे बांटे और सुख दुख बेटी बांटे। बिन स्वार्थ के सेवा में, वो सारा जीवन काटे। क्या देंगे कलयुग के बेटे, आओ सभी विचारो। ना बेटी मारो.... माँ का ही रूप है बेटी, जो इसको मरवाओगे। फिर किस मुँह से जाकर के, माँ से बेटा पाओगे। करके कन्यादान ऐ "नरसी" अपना जन्म सुधारो। ना बेटी मारो.... लेखक व गायक: श्री नरेश नरसी जी फतेहाबाद -हरियाणा। मोबाइल नंबर: 9416241061 🙏🙏🙏🙏🙏 प्रेषक: प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले)

दिल में तू श्याम नाम की ज्योति जला के देख (Lyrics-नरसी जी)

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सुप्रसिद्ध भजन: दिल में तू श्याम नाम की ज्योति जला के देख। आऐगा मेरा साँवरा दिल से बुला के देख। हारे का साथी श्याम है यारों का यार है। अहलावती का लाल ये सुनता पुकार है। चरणों में मेरे श्याम के दो आँसू बहा के देख। आऐगा मेरा साँवरा.... किस्मत के ताले खोलना बाबा के हाथ है। इक तेरे कष्ट मेटना पल भर की बात है। खुशियों से झोली भर देगा तू झोली फैला के देख। आऐगा मेरा साँवरा.... होगा असर दुआ में तो बोलेगी मूर्ति। जीवन में जो कमीं है श्याम कर देगा पूर्ति। "नरसी" अगर यकीं नहीं तो आजमा के देख। आऐगा मेरा साँवरा.... लेखक व गायक: श्री नरेश नरसी जी -फतेहाबाद (हरियाणा) मोबाइल नंबर: 9416241061 🙏🙏🙏🙏🙏 भजन प्रेषक: प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले)

31मई 2020 (दुखद समाचार)

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🙏🙏🙏🙏🙏 31 मई 2020 रविवार सुबह 9:30 बजे बाऊ जी श्री महाबीर प्रसाद जांगड़ा जी के देहांत का दुखद समाचार मिला। जिसे सुनकर सिंघल परिवार के सभी सदस्यों को बहुत दुख हुआ। इस दुख की घड़ी में हमें नरेश नरसी भाई के साथ, परिवार के बीच परिवार की तरह खड़े होना चाहिए। लेकिन पूरे विश्व में आई वैश्विक महामारी कोरोना के चलते और सामाजिक दूरी के नियम का पालन करते हुए, हमारा इस दुख की घड़ी में जांगड़ा परिवार के साथ खड़े हो पाना मुशिकल है। जिसके लिए हम जांगड़ा परिवार के प्रत्येक सदस्य से माफी चाहते हैं। और प्रभु से यही प्रार्थना करते हैं कि वो हमारे बाऊ जी को अपने चरणों में स्थान दें। तथा जांगड़ा परिवार को परिवार के मुखिया को खोने का जो दुख पहुंचा है उसे सहन करने की शक्ति दें। 🙏🙏🙏🙏🙏 शोकाकुल: सिंघल परिवार जीन्द वाले। नजफगढ़ - नई दिल्ली।                               -प्रदीप सिंघल। नोट: बाऊ जी श्री महाबीर प्रसाद जांगड़ा जी सुप्रसिद्ध भजन लेखक व गायक आदरणीय श्री नरेश नरसी जी (फतेहाबाद) के पिता जी हैं।

प्यारी सी मुलाकात (Shri Naresh Narsi Ji & Pardeep Singhal

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सुप्रसिद्ध भजन लेखक व गायक आदरणीय श्री नरेश नरसी जी (फतेहाबाद) की आवाज में पहली बार भजन सुनने काम मौका सन् 2016 के आखिरी महीने दिसंबर में नांगलोई के एक कीर्तन में मिला । उस समय वो स्टेज पर भजन गा रहे थे "दिल से तू श्याम नाम की ये ज्योति जला के देख - आऐगा मेरा साँवरा दिल से बुलाकर देख" भजन के बोल और उनकी आवाज में ऐसा खींचाव था कि स्टेज तक जाए बिना नहीं रह पाया। ऐसा लगा जैसे किसी अपने को सुन रहा हूँ। उस दिन उनसे कोई खास मुलाकात तो नहीं हो पाई पर उनकी आवाज को सुनकर सुकून बहुत मिला। उसके बाद पता चला कि वो नये साल पर दिल्ली के नारयाणा इलाके में अपने भजनों का खजाना लेकर आ रहे हैं। तो मैं भी नजफगढ़ दिल्ली से नारायणा पहुँच गया। अबके उन्हें अच्छी तरह से सुनने और मिलने का मौका भी मिल गया। बस इसके बाद रामलीला मैदान गाजियाबाद,नजफगढ़ शर्मा परिवार के यहां उन्हें बाबा श्याम के कई कीर्तनों में सुना भी और मिला भी। जितनी अच्छी लेख्नी और गायकी उतना ही अच्छा मिलनसार अंदाज़ जिसका शायद ही कोई सानी हो।                              ...

प्रीत मेरी निभानी पड़ेगी (Lyrics-नरसी जी)

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तुम्हें प्रीत मेरी निभानी पड़ेगी, मुझे श्याम अपना बनाकर तो देखो। बिछा दूंगा पलकें राहों में तेरी, कभी मेरी कुटिया में आकर तो देखो। ये दहलीज घर की तुम्हें ही पुकारे। आजा कन्हैया गरीबों के द्वारे। भला हूँ बुरा हूँ मैं जैसा हूँ तेरा, मेरी गलतियों को छुपाकर तो देखो। मैं नरसी नहीं हूँ नहीं हूँ सुदामा। मगर श्याम तुमको पड़ेगा निभाना। तुम्हारे चरण में पड़ा हूँ मैं दात्ता, जरा अपनी नजरें झुका कर तो देखो। ये किस बात की तुम सजा दे रहे हो। खाटू में बैठे मजा ले रहे हो। नहीं भूल पाओगे हमें श्याम सुंदर, नहीं जो यकीं तो भुला कर तो देखो। मेरा जिस्मों - जां अब अमानत है तेरी। मैं तेरा रहूँगा जमानत है मेरी। अगर जान मांगो तो अभी जान दे दूँ, कभी "नरसी" को आजमा कर तो देखो। लेखक एवं गायक: श्री नरेश "नरसी" जी। (फतेहाबाद - हरियाणा) !! जय श्री श्याम जी !! भजन प्रेषक: राधेश्याम वत्स (नांगलोई - दिल्ली)

श्याम बाबा श्याम बाबा तेरे पास आया हूँ (Lyrics-श्याम सुंदर शर्मा जी)

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सदाबहार अरदास: श्याम बाबा - श्याम बाबा, तेरे पास आया हूँ। चरणों में तेरे अरदास लाया हूँ। सच्चा है दरबार तुम्हारा, संकट काटो श्याम हमारा-२ जब जब भीड़ पड़ी भक्तों पे, दात्ता नंगे पांव पधारा-२ दुःख हरना, मेरे दुःख हरना - तेरा गुण गाया हूँ। चरणों में.... दीन - दयाल दया के सागर, फिर क्यों खाली मेरी गागर-२ विनती मेरी तुम सुन लेना, श्याम मुरारी हे नटनागर-२ भर देना, झोली भर देना - यही आस लाया हूँ। चरणों में.... जब फाल्गुन का मेला आये, हमको पास बुलाना होगा-२ मैं मारूँगा भर पिचकारी, तुमको रंग लगाना होगा-२ खेलूँगा, होली खेलूँगा - रंग गुलाल लाया हूँ।।चरणों में.... जब - जब तेरी याद सताये, "श्याम सुंदर" नैनो में पाये-२ "मातृदत्त" की यही कामना सारा जगत सुखी हो जाये-२ कर देना, सुखी कर देना - विश्वास लाया हूँ। चरणों में.... भजन रचयिता: महामंत्र रचयिता ।।ॐ श्री श्याम देवाय नमः।। "श्यामलीन श्री श्याम सुंदर शर्मा जी पालम वाले। स्वर: श्री संजू शर्मा जी - कोलकता। 🙏🙏🙏🙏🙏 भजन प्रेषक: राधेश्याम वत्स - नांगलोई/दिल्ली। हमारी जानकारी के मुताबिक इस रचना ...

मैं निर्धन तू सेठ साँवरा (Lyrics-भीमसैन जी)

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मैं निर्धन तू सेठ साँवरा के फायदा इस यारी का। बता कद ताला खोलेगा बाबा बंद किस्मत म्हारी का। तेरे ते ना माँगूगा तो और बता कित्त जाऊँ मैं। चेतक का के करना ओडी, रैड फरारी चाहूँ मैं। मैं पैदल खुद मजा लेवे सै लीले की असवारी का। बता कद ताला खोलेगा.... इतना दे-दे साँवरिया हो घर में सारी मौज मेरे। मैं भी जिद्द का पक्का सूं ना माँगण आऊँ रोज तेरे। सारी दुनिया में सै चर्चा तेरी लखदात्तारी का। बता कद ताला खोलेगा.... माँग-माँग के थक गया सूं इब शर्म घणी मनै आवे सै। के मजबूरी मनै देन में इतनी देर लगावे सै। भगत तेरा भी बाट देख रहया कदका अपनी बारी का। बता कद ताला खोलेगा.... आज पड़या सै पाला सुनले माँनू मैं भी हार नहीं। या फिर कह दे साँवरिया तनै "भीमसैन" तैैै  प्यार नहीं। मैं तेरा तू मेरा सै के लेना दुनियादारी का। बता कद ताला खोलेगा.... लेखक: दादा श्री भीमसैन जी - भिवानी। स्वर: प्रविन्दर पलक जी - फतेहाबाद !! जय श्री श्याम जी !! भजन प्रेषक : प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले)

बाबूल मेरेया पंजाबी गीत (Lyrics-सिंघल)

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पंजाबी गीत: बाबूल मेरेया करया ना कर अख्खां गिलियां। आऐगी पढ़ - लिख कर तेरी निक्की जेही गुड़िया। (1) जज बन जावांगी जां वकील बन जावांगी। करके मुकाम हासिल पिंड दी शान बढ़ावांगी। मैं उड़दी - उड़दी आवांगी बनके तेरी चिड़िया। बाबूल मेरेया.... (2) ले डिग्री बड़ी जेही जदो दूजे देश मैं जावांगी। कमां के ऐन्ने डॉलर बापू तेरी झोली पावांगी। रवांगी शुक्रगुजार तेरी मैनूं चाहा जो ओह मिल्या। बाबूल मेरेया.... (3) आके दिल्ली एयरपोर्ट ते मैं तैनूं फोन करांगी। मेरेया बाबूल "सिंघल" जी मैं तेरा वेट करांगी। बाबूल मेरेया.... लेखन सहयोगी एवं स्वर: एम एस मोनूं शर्मा (चनत्त - हिसार) Lyrics: Pardeep Singhal  (Jind Wale) Mob. 92-100-16-948 Dedicated To My Lovely Daughters @2017