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जुलाई, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बागड़ो नाची सामण मैं (©®Team of Song Present Team)

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  👉 हरियाणवी गीत: बागड़ो नाची सामण मैं.. 👇👇👇👇👇 मेरी झाँझरा का जोड़ा, हॉय शोर करण लाग्या। जद चाली मोरणी बणके, कईयां का दिल आग्या। 👇👇👇👇👇 नीर भरण गई मैं, कुएँ पे नीले दामण मैं। रे सिर पे टोकणी धर के, बागड़ो नाची सामण मैं। 👇👇👇👇👇 (1) इसा हाल्या दामण रे, हॉय रे हॉय सामण मैं। रे कमर पे दो-दो मटके थे, अर गात पड़ै था हल्वा सा। इसी चमकी नाथ नगीने जो, रूप का पाटया जलवा सा। होंठ रसीले लागैं थे, जणू नूण हो जामण मैं। रे सिर पे टोकणी.... 👇👇👇👇👇 (2) इसा छम-छम करके नाची मैं, मन्ने देख के बादल बरस गया। इसा खोग्या "फरिश्ता" मेरे में, वो लिखण ते भी तरस गया। पूरी की पूरी भीज गई, फिर लागी काँपण मैं। रे सिर पे टोकणी....  👇👇👇👇👇 इसा हाल्या दामण रे, हॉय रे हॉय सामण मैं। इसा हाल्या दामण रे, हॉय रे हॉय सामण मैं। 💟💟💟💟💟 इस हरियाणवी गीत से जुड़ी पूरी टीम को हार्दिक बधाई!  प्रेषक: प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले) singhalpardeep.blogspot.com

हम बोलेगा तो बोलेगे कि बोलता है

अक्सर लोग कहते हैं कि इस धरती पर जो भी होता है, वो सब कुछ ईश्वर की ईच्छा से ही होता है। ईश्वर सर्वशक्तिमान है, उनकी ईच्छा के बिना तो पत्ता भी नहीं हिल सकता। तो क्या दुनिया में जितने भी अपराध और दुष्कर्म होते हैं, वो सभी ईश्वर की इच्छा से होते हैं। किसी बेगुनाह को सजा हो जाना, किसी की बेवजह हत्या हो जाना, किसी की जेब कट जाना, किसी निर्बल स्त्री की इज्ज़त लूट जाना, एक साथ कई मनुष्य का मिलकर किसी औरत के साथ बलात्कार करना। यदि ईश्वर की इच्छा बिन पत्ता तक नहीं हिल सकता तो बलात्कारियों को एक स्त्री के सभी कपड़े उतारकर दुष्कर्म करने की शक्ति कौन प्रदान करता है। क्या ये सब ईश्वर की लीला है।

हर व्यक्ति के काम की बात

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सिर्फ मन की ही नहीं, काम की भी बात: ये सत्य है कि चाहे कोई कितना ही अमीर हो या फिर कितना ही गरीब, एक न एक दिन सभी को मर जाना है और ये भी सत्य है कि मनुष्य चाहे कितनी ही धन संपदा इकट्ठी करले, वो उसमें से एक रूपया भी साथ नहीं लेकर जा सकता है। ये भी सत्य है कि सुख और दुख जीवन का एक हिस्सा है, चाहे कोई अमीर हो या गरीब इनसे नहीं बच सकता उन्हें इनका सामना करना ही पड़ेगा। लेकिन ये भी तो जरूरी नहीं कि मनुष्य दुखों का सामना और अपने जन्म से लेकर मृत्यु तक का सफर गरीबी, बदहाली, लाचारी व बेबसी के साथ ही करे। एक व्यक्ति साइकिल पर चलते हुए, छोटी से घर में रहते हुआ अपना दुख प्रकट करे और लोगों को कहे कि मैं दुखी हूँ, परेशान हूँ। दूसरा व्यक्ति दुखी तो है, परेशान भी है लेकिन वो अपने महंगे बंगले, ए सी ऑफिस, महंगी गाड़ी में बैठकर दुखों का सामना करता है, उस लड़ाई को लड़ता है, तो जीवन किसका बेहतर कहलायेगा। मेरे ख्याल से तो उसका जो भौतिक सुखों के साधनों संग अपना जीवन बीता रहा है न कि उसका जो वही पुरानी घीसी-पीटी बातों को अपने जीवन का आधार मान अपना जीवन बीता रहा है। बहुत से लोग कई तरह के उदाहरण देते हैं जैसे ...

संघर्ष ही जीवन है// Struggle Is Life

संघर्ष: Allout-GoodKnight मशीन व रिफिल बनाने वाली बड़ी कंपनियों ने पूरे जोर-शोर, अपनी पूरी टीम के सहयोग से मच्छर भगाने वाले कई Product बनाये। लेकिन मच्छरों की एक पीढ़ी ढ़ीठ होकर जीवन और मृत्यु के बीच इस लड़ाई को लड़ने का संघर्ष करती रही, तो आज मच्छरों की अगली पीढ़ी उन सब उत्पादों के आस पास नृत्य करती रहती है। आखिरकार मनुष्य थक हार कर यही कह देता है कि इन उत्पादों का कोई फायदा नहीं, मच्छर खत्म नहीं हो सकते। ठीक उसी तरह जब एक पीढ़ी किसी चीज़ को पाने के लिए बेइतहां, मेहनत-मशक्कत करती है, संघर्ष करती है तो दूसरी पीढ़ी को उसका फायदा भी बेशुमार मिलता है। आज हमें जो भी चीज़े, जो भी सुविधाएं, जो भी साधन उचित मात्रा में पर्याप्त हैं। उन्हें प्राप्त करने के लिए हमारे बुजुर्गों ने न जाने कितना संघर्ष किया होगा, तब जाकर हम आज उन चीजों पर अपना स्वामित्व बना पाने में सफल हो पाये। हमारे आसपास ऐसे बहुत से लोग हैं जिनके पास 25-30 पहले न अपना घर था, न आने जाने का अपना कोई निजी वाहन था। लेकिन आज उन सबके पास अच्छा घर, आने जाने के एक नहीं बल्कि कई साधन हैं, जिन्हें वो अपनी जरूरत व दूरी अनुसार इस्तेमाल करते...

अग्रसेन जी की गौरव गाथा (श्रीमति रेखा मोहिनी बंसल "RMB" जी की जुबानी)

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महाराजा श्री अग्रसेन जी की गौरव गाथा: 💟💟💟💟💟💟 श्री अग्रसेन महाराज की, हम गाथा गाते हैं हम गाथा गाते हैं। श्री अग्रजनक के चरणों में हम शीश झुकाते हैं, हम शीश झुकाते हैं। जय अग्रसेन महाराज, जय जय अग्रवाल समाज-੨ ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ (1) महारानी भगवती देवी थी, राजा वल्लभसेन वल्लभसेन के पिता थे, जिनका नाम था बृहतसेन-੨ हरियाणा में प्रतापनगर की कथा सुनाते हैं, हम कथा सुनाते हैं। श्री अग्रजनक के चरणों में हम शीश झुकाते हैं। हम शीश..... जय अग्रसेन महाराज, जय जय अग्रवाल समाज-੨ (2) कुंदसेन भाई छोटे थे वल्लभसेन के, केशी नाम का सेनापति रहता था संग उसके-੨ कुंदसेन और केशी दोनों घात लगाते हैं, दोनों घात लगाते हैं। श्री अग्रजनक के चरणों..... जय अग्रसेन महाराज..... (3) राजा वल्लभ भगवती देवी ने शिव ध्यान किया, प्रसन्न हो शिव ने दो पुत्रों का वरदान दिया-੨ भगवती देवी और वल्लभ जी खुशी मनाते हैं बड़ी खुशी मनाते हैं।  श्री अग्रजनक के चरणों में..... जय अग्रसेन महाराज..... (4) अश्विन शुक्ला प्रतिपदा को सुंदर फूल खिला, महेन्द्रकाल में वल्लभ जी घर पुत्र ने जन्म लिया-੨ जो श्री अग्रसेन जी नाम से जाने जाते हैं, जाने जाते ...

Chatak-Matak // चटक-मटक // सुप्रसिद्ध हरियाणवी गीत के लीरिक्स

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 👉 सुप्रसिद्घ हरियाणवी गीत: चटक-मटक 👇👇👇👇👇 👉 ओ घाल्ली आख्याँ मैं स्याही, रे बिन्दी माथे पे लाई। 👉 बहू सब कर दी गाम की फैल, मैं बण-ठण के जब आई। 👇👇👇👇👇 👉 ओ सारे देवर-जेठां के, मैं गई खटक-खटक। 👉 ओ गज़ का घूंघट काढ़, चाल्ली मैं तो मटक-मटक। 👇👇👇👇👇 👉 ओ चूड़ा हाथां मैं खणकै, तागड़ी छण-छण छणके। 👉 घूमाती चोटी नै निकड़ी, गाल मैं मोरणी बणके। 👇👇👇👇👇 👉 "बिट्टू सोरखी" इशारे में, गया रे झटक। 👉 ओ गज़ का घूंघट काढ़, चाल्ली मैं तो मटक-मटक। 👇👇👇👇👇 👉 टोकणी डूंगे धर राख्खी, मटकणी चाल करे चाला। 👉 मेरे गौरे रंग पै, सूट यो जच रया पटियाला। 👇👇👇👇👇 👉 जो मन्ने देखै सांस जावै, उसकी अटक-अटक। 👉 ओ गज़ का घूंघट काढ़, चाल्ली मैं तो मटक-मटक। 💟💟💟💟💟 इस सुप्रसिद्घ हरियाणवी गीत "चटक-मटक" से जुड़ी पूरी टीम को हार्दिक शुभकामनाएँ! प्रेषक: प्रदीप सिंघल singhalpardeep.blogspot.com

Chatak-Matak // चटक-मटक // सुप्रसिद्ध हरियाणवी गीत के लीरिक्स

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👉 सुप्रसिद्घ हरियाणवी गीत: चटक-मटक 👇👇👇👇👇 👉 ओ घाल्ली आख्याँ मैं स्याही, रे बिन्दी माथे पे लाई। 👉 बहू सब कर दी गाम की फैल, मैं बण-ठण के जब आई। 👇👇👇👇👇 👉 ओ सारे देवर-जेठां के, मैं गई खटक-खटक। 👉 ओ गज़ का घूंघट काढ़, चाल्ली मैं तो मटक-मटक। 👇👇👇👇👇 👉 ओ चूड़ा हाथां मैं खणकै, तागड़ी छण-छण छणके। 👉 घूमाती चोटी नै निकड़ी, गाल मैं मोरणी बणके। 👇👇👇👇👇 👉 "बिट्टू सोरखी" इशारे में, गया रे झटक। 👉 ओ गज़ का घूंघट काढ़, चाल्ली मैं तो मटक-मटक। 👇👇👇👇👇 👉 टोकणी डूंगे धर राख्खी, मटकनी चाल करे चाला। 👉 मेरे गौरे रंग पै, सूट यो जच रया पटियाला। 👇👇👇👇👇 👉 जो मन्ने देखै सांस जावै, उसकी अटक-अटक। 👉 ओ गज़ का घूंघट काढ़, चाल्ली मैं तो मटक-मटक। 💟💟💟💟💟 इस सुप्रसिद्घ हरियाणवी गीत "चटक-मटक" से जुड़ी पूरी टीम को हार्दिक शुभकामनाएँ! प्रेषक: प्रदीप सिंघल singhalpardeep.blogspot.com