गर्व से कहते हैं कि हम बाणिये हैं (-Pardeep Singhal)
#गर्व_से_कहते_हैं_कि_हम_बाणिये_हैं_ ! ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ #हर समाज में कुछ ना कुछ खूबी जरूर होती है। ठीक उसी तरह हमारे समाज में भी बहुत सी खूबियां हैं। हमारे समाज के लोगों ने अपनी बुद्धिमता व व्यापारिक कला से सिर्फ अपना ही नहीं, अपने परिवार, अपने समाज, अपने देश तक का नाम रोशन किया। इसके सैंकड़ों उदाहरण मिल जाएंगे आपको। हमारे समाज में व्यापार के साथ एक कला और है जिसका जिक्र बहुत कम किया जाता है। अपनी मेहनत से व्यापार को ऊंचे स्तर पर ले जाने के साथ साथ, अपने व्यापार की आमदनी को संयम के साथ संजोने (संभालने) की कला। #हमारे गाँव देहात की तरफ अक्सर एक कहावत कही जाती है। हो सकता है आपने भी किसी बड़े बुजुर्ग से कभी सुना हो कि.. ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ #शरीर_की_ताकत_को_भैंस_और_पैसे_की_ताकत_को_सिर्फ_बाणिया_ओट_ (संभाल) #सकै । कुछ लोग आज भी इस कहावत का मान बखूबी रख रहे हैं। सबकुछ होने के बावजूद भी वही सादा रहन सहन, सादा पहनावा, सादा खान पान। उनका व्यक्तित्व, उनकी उदारता, उनकी दरियादिली ही उनकी पहचान है। ऐसे प्रत्येक #बाणिये_भाई को हृदय से नमन जो आज भी अपने संस्कारों को जीवित रखने में अग्रसर हैं। -प्रदीप सिंघल 💟💟...