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अप्रैल, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गर्व से कहते हैं कि हम बाणिये हैं (-Pardeep Singhal)

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  #गर्व_से_कहते_हैं_कि_हम_बाणिये_हैं_ ! ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ #हर समाज में कुछ ना कुछ खूबी जरूर होती है। ठीक उसी तरह हमारे समाज में भी बहुत सी खूबियां हैं। हमारे समाज के लोगों ने अपनी बुद्धिमता व व्यापारिक कला से सिर्फ अपना ही नहीं, अपने परिवार, अपने समाज, अपने देश तक का नाम रोशन किया। इसके सैंकड़ों उदाहरण मिल जाएंगे आपको। हमारे समाज में व्यापार के साथ एक कला और है जिसका जिक्र बहुत कम किया जाता है। अपनी मेहनत से व्यापार को ऊंचे स्तर पर ले जाने के साथ साथ, अपने व्यापार की आमदनी को संयम के साथ संजोने (संभालने) की कला। #हमारे गाँव देहात की तरफ अक्सर एक कहावत कही जाती है। हो सकता है आपने भी किसी बड़े बुजुर्ग से कभी सुना हो कि.. ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ #शरीर_की_ताकत_को_भैंस_और_पैसे_की_ताकत_को_सिर्फ_बाणिया_ओट_ (संभाल) #सकै । कुछ लोग आज भी इस कहावत का मान बखूबी रख रहे हैं। सबकुछ होने के बावजूद भी वही सादा रहन सहन, सादा पहनावा, सादा खान पान। उनका व्यक्तित्व, उनकी उदारता, उनकी दरियादिली ही उनकी पहचान है। ऐसे प्रत्येक #बाणिये_भाई को हृदय से नमन जो आज भी अपने संस्कारों को जीवित रखने में अग्रसर हैं। -प्रदीप सिंघल 💟💟...

बाणिया (-Pardeep Singhal)

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⬇⬇⬇⬇⬇⬇ जहां तक मुझे जानकारी है और मैंने सुना व पढ़ा है। पूरी धरती पर हमारे समाज को ऐसे ही सम्मान पूर्वक पुकारा जाता जा रहा है और रहती दुनिया तक पुकारा जाता रहेगा। 💟💟💟 💟💟 बनिये। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ बाणिये। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ लाला जी। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ सेठ जी। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ महाजन। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ गुप्ता जी। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ वैश्य बंधु। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ अग्रवाल साहब। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ अग्रबंधु। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ अग्रवंशी। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ लक्ष्मी पुत्र। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ गोत्र के साथ साहब  ( जैसे कि सिंघल साहब) 💟💟💟💟💟 लेकिन उसके बावजूद भी कुछ भाई बंधु कहते हैं कि ये मत कहो वो मत कहो। ऐसे कहो वैसे कहो। आखिर ऐसा क्यों। कुछ लोग तो अपने कमेंटस तक में अपनी भाषा, अपनी मर्यादा तक भूल जाते हैं। ये नहीं देखते कि सामने वाला कौन है..? उसकी पोस्ट का उद्देश्य क्या है। क्या उसकी पोस्ट में समाज हित की बात नहीं है। क्या उस व्यक्ति का हौंसला व मनोबल बढ़ाना हमारा दायित्व नहीं है। जो समाज की जानकारी हम तक पहुंचा रहा है। अपना कीमती समय समाज को दे रहा है। उसका शुक्रिया करने की बजाय उसी को बुरा भला कहने लग जाते हैं। इस धरती पर सबसे सभ्य व सबसे शांत समाजों में हमारी गिनती होती है। लेकिन उसके बावज...

बनिये की डयूटी (कर्तव्य ओर कर्म)

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जब भी कोई व्यक्ति किसी #बनिये भाई की दूकान, प्रतिष्ठान, कार्यस्थल को देखता है तो आमतौर पर यही कहता है कि देखो इसका काम कितना अच्छा चल रहा है। रोज़ाना खूब पैसे कमा रहा है। जबकि मेरा मानना है कि बनिया नहीं उसकी डयूटी, उसकी बैठक कमा रही है। अपने काम काज के प्रति उसकी मेहनत और समर्पण कमा रहा है। सुबह 5-6 बजे प्रभु का नाम लेकर दुकान को नुचकारते हुए खोलना और रात्रि को 10-11 बजे प्रभु का शुक्रिया करते हुए अपनी दूकान को बढ़ाना। लगातार 15-16 घंटे डयूटी देना। हर किसी से आप और जी कहकर बात करना, अपने स्वभाव से लोगों के दिलों को जीतना। कई घंटों की कड़ी मेहनत व कठिन तपस्या के बावजूद हर किसी से अच्छा व्यवहार करना। ना जाने ऐसी कितनी ही खूबियों का भंडार ले अपने कर्तव्य का पालन करना। दूकान पर आने वाले किसी भी धार्मिक और जन कल्याण संस्थाओं के सदस्यों का अपनी क्षमता व सामर्थ्य अनुसार सहयोग करना। 🙏🙏🙏🙏🙏 नोट: मैं मध्यम वर्गीय से हूँ, जो चीज़ जो खूबी अपने बनिये भाइयों में देखता हूँ उसे ही राष्ट्रीय अग्रवाल महासभा फेसबुक समूह के माध्यम से आप सभी अग्रबंधुओं के बीच शेयर करता हूँ। ये मेरा सौभाग्य है कि मु...

बनियों की दुकान में गद्दी का महत्व व उसके पीछे का रहस्य

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भोलेनाथ शिव शंकर जी का बनिये को वरदान: ⬇⬇⬇⬇⬇ कहते हैं कि एक बार पार्वती जी ने भोलेनाथ जी से आग्रह किया कि आप समाज के प्रत्येक वर्ग को मुंह मांगा वरदान दीजिए। भला माता पार्वती जी की बात को भोलेनाथ कैसे टाल सकते थे। जो जैसी ईच्छा लेकर आया उसे वैसा ही वरदान मिलता गया और वो हंसी खुशी लौटता गया। सुबह से लेकर शाम हो गई, शाम के समय एक बनिया आया तब तक सबकुछ समाप्त हो चूका था। माता पार्वती ने बनिये से कहा कि तुम इतनी देर से क्यूँ आये। क्या तुम्हें मालूम नहीं था कि आज समाज के हर वर्ग को मुंह मांगा वरदान दिया जा रहा है। तो बनिये ने कहा माते पास ही के गांव में मेरी दुकान है और दुकानदारी करते करते मुझे आने में इतनी देर हो गई जिसके लिए मैं माफी चाहता हूँ। माता पार्वती ने कहा कि क्या तुम्हारी एक दिन की दुकानदारी से इतनी कमाई हो गई कि जो तुमने सही समय पर वरदान लेने आना भी उचित नहीं समझा। बनिये ने कहा माते मैं दुकानदारी सिर्फ पैसा कमाने के लिए ही नहीं करता, आज के दिन मेरे गांव में मजदूरों को उनकी मजदूरी का पैसा मिलता है। जिसे देकर वो राशन पानी खरीदते हैं, यदि मैं आज दूकान नहीं खोलता तो आज किसी के घर मे...

मैं पल दो पल का शायर हूँ (लीरिक्स)

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मेेेेरा मनपसंंद गीत: ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ मैं पल दो पल का शायर हूँ, पल दो पल मेरी कहानी है-੨ पल दो पल मेरी हस्ती है, पल दो पल मेरी जवानी है-੨ ⬇⬇⬇⬇⬇ (1) मुझसे पहले कितने शायर आए और आकर चले गए। कुछ आहें भर कर लौट गए, कुछ नग़मे गाकर चले गए। वो भी एक पल का किस्सा थे, मैं भी एक पल का किस्सा हूँ। कल तुमसे जुदा हो जाऊँगा, जो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ। मैं पल दो पल.... ⬇⬇⬇⬇⬇ (2) कल और आएंगे नग़मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले। मुझसे बेहतर कहने वाले, तुमसे बेहतर सुनने वाले। कल कोई मुझको याद करे, क्यूँ कोई मुझको याद करे। मसरूफ़ ज़माना मेरे लिये, क्यूँ वक़्त अपना बर्बाद करे। मैं पल दो पल.... ⬇⬇⬇⬇⬇ गीतकार: साहिर लुधियानवी जी गायकार: मुकेश जी स्टारकास्ट: अमिताभ बच्चन साहब 💟💟💟💟💟 प्रेषक: प्रदीप सिंघल singhalpardeep.blogspot.com