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श्याम बाबा श्याम बाबा तेरे पास आया हूँ (Lyrics-श्याम सुंदर शर्मा जी)

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सदाबहार अरदास: श्याम बाबा - श्याम बाबा, तेरे पास आया हूँ। चरणों में तेरे अरदास लाया हूँ। सच्चा है दरबार तुम्हारा, संकट काटो श्याम हमारा-२ जब जब भीड़ पड़ी भक्तों पे, दात्ता नंगे पांव पधारा-२ दुःख हरना, मेरे दुःख हरना - तेरा गुण गाया हूँ। चरणों में.... दीन - दयाल दया के सागर, फिर क्यों खाली मेरी गागर-२ विनती मेरी तुम सुन लेना, श्याम मुरारी हे नटनागर-२ भर देना, झोली भर देना - यही आस लाया हूँ। चरणों में.... जब फाल्गुन का मेला आये, हमको पास बुलाना होगा-२ मैं मारूँगा भर पिचकारी, तुमको रंग लगाना होगा-२ खेलूँगा, होली खेलूँगा - रंग गुलाल लाया हूँ।।चरणों में.... जब - जब तेरी याद सताये, "श्याम सुंदर" नैनो में पाये-२ "मातृदत्त" की यही कामना सारा जगत सुखी हो जाये-२ कर देना, सुखी कर देना - विश्वास लाया हूँ। चरणों में.... भजन रचयिता: महामंत्र रचयिता ।।ॐ श्री श्याम देवाय नमः।। "श्यामलीन श्री श्याम सुंदर शर्मा जी पालम वाले। स्वर: श्री संजू शर्मा जी - कोलकता। 🙏🙏🙏🙏🙏 भजन प्रेषक: राधेश्याम वत्स - नांगलोई/दिल्ली। हमारी जानकारी के मुताबिक इस रचना ...

मैं निर्धन तू सेठ साँवरा (Lyrics-भीमसैन जी)

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मैं निर्धन तू सेठ साँवरा के फायदा इस यारी का। बता कद ताला खोलेगा बाबा बंद किस्मत म्हारी का। तेरे ते ना माँगूगा तो और बता कित्त जाऊँ मैं। चेतक का के करना ओडी, रैड फरारी चाहूँ मैं। मैं पैदल खुद मजा लेवे सै लीले की असवारी का। बता कद ताला खोलेगा.... इतना दे-दे साँवरिया हो घर में सारी मौज मेरे। मैं भी जिद्द का पक्का सूं ना माँगण आऊँ रोज तेरे। सारी दुनिया में सै चर्चा तेरी लखदात्तारी का। बता कद ताला खोलेगा.... माँग-माँग के थक गया सूं इब शर्म घणी मनै आवे सै। के मजबूरी मनै देन में इतनी देर लगावे सै। भगत तेरा भी बाट देख रहया कदका अपनी बारी का। बता कद ताला खोलेगा.... आज पड़या सै पाला सुनले माँनू मैं भी हार नहीं। या फिर कह दे साँवरिया तनै "भीमसैन" तैैै  प्यार नहीं। मैं तेरा तू मेरा सै के लेना दुनियादारी का। बता कद ताला खोलेगा.... लेखक: दादा श्री भीमसैन जी - भिवानी। स्वर: प्रविन्दर पलक जी - फतेहाबाद !! जय श्री श्याम जी !! भजन प्रेषक : प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले)

बाबूल मेरेया पंजाबी गीत (Lyrics-सिंघल)

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पंजाबी गीत: बाबूल मेरेया करया ना कर अख्खां गिलियां। आऐगी पढ़ - लिख कर तेरी निक्की जेही गुड़िया। (1) जज बन जावांगी जां वकील बन जावांगी। करके मुकाम हासिल पिंड दी शान बढ़ावांगी। मैं उड़दी - उड़दी आवांगी बनके तेरी चिड़िया। बाबूल मेरेया.... (2) ले डिग्री बड़ी जेही जदो दूजे देश मैं जावांगी। कमां के ऐन्ने डॉलर बापू तेरी झोली पावांगी। रवांगी शुक्रगुजार तेरी मैनूं चाहा जो ओह मिल्या। बाबूल मेरेया.... (3) आके दिल्ली एयरपोर्ट ते मैं तैनूं फोन करांगी। मेरेया बाबूल "सिंघल" जी मैं तेरा वेट करांगी। बाबूल मेरेया.... लेखन सहयोगी एवं स्वर: एम एस मोनूं शर्मा (चनत्त - हिसार) Lyrics: Pardeep Singhal  (Jind Wale) Mob. 92-100-16-948 Dedicated To My Lovely Daughters @2017

खाटू धाम की माटी म्हारै रास आ गई (Lyrics-नरसी जी)

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सुप्रसिद्ध भजन: कण - कण में तेरा वास प्रभु। जो करे दुखों का नाश प्रभु। दुनिया भर की खुशियां मेरे पास आ गई। थारे धाम की माटी म्हारै रास आ गई। कोई नहीं दिख्यो अपणो, जद तू ही नजर मनै आयो। खाटू नगरी आ बैठयो, जब मेरो जी घबरायो। पैर धरयो खाटू मैं, सांस मै सांस आ गई। खाटू धाम की माटी.... खाटू की माटी का, हमने देखा अजब नजारा। क्या निर्धन क्या सेठ, सभी को इसने पार उतारा। दुनिया सारी करके, ये विश्वास आ गई। थारे धाम की माटी.... रेत नहीं मामूली, ये तो है संजीवन बूटी। मौज करूं दिन साँवरा, सोऊं तान के खूंटी। होली और दीवाली, बारहों मास आ गई। खाटू धाम की माटी.... तेरी इस पावन मिट्टी में, मैं मिट्टी हो जाऊँ। सदा - सदा के लिए, तेरे इन चरणों में सो जाऊँ। "नरसी" के होंठो पे, इतनी प्यास आ गई। खाटू धाम की माटी.... लेखक एवं गायक: श्री नरेश "नरसी" जी। फतेहाबाद - हरियाणा। मोबाइल: 94-162-41-061 🙏🙏🙏🙏🙏 भजन प्रेषक : प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले)

The Story of Middle Class People

मैंने अब तक यही महसूस किया कि हम मध्य वर्गीय लोगों का ज्यादातर जीवन उम्मीद के सहारे बीत जाता है मुझे याद है जब मैंने सन् 1998 में दिल्ली से दसवीं की बोर्ड परीक्षा पास कि तो, नंबर कुछ खास ना आ पाने की वजह से परिवार वालों को यही लगा कि ये अब पढ़ाई में नहीं चल सकता। अच्छा होगा कि कोई काम काज ही करवा दें। लगभग उस समय मेरी आयु लगभग 18 वर्ष की होगी, यूं तो व्यापारी परिवार से हूँ जिस कारण हमारे यहाँ नौकरी से ज्यादा अपने काम को ही महत्त्व दिया जाता है। बेशक से व्यापार छोटा ही किया जाये पर व्यापार करने के लिए ही प्रेरित किया जाता है। सपने तो हम लोगों के बहुत बड़े बड़े होते हैं लेकिन हमें उन्हें पूरा करने का हक नहीं होता क्योंकि परिवार के पास इतनी क्षमता ही नहीं होती कि बच्चों के भविष्य पर ध्यान दिया जाए। बस किसी तरह आज गुजर जाये कल जो होगा देखा जायेगा। दिन बीतते साइकिल से शुरू हुआ जीवन साइकिल के पहिये की तरह घूमता रहा।                            To be continued....

मुझे याद आई छुट्टियाँ वो गर्मी की👇

सन् 1997 में स्कूल समय के दौरान आखिरी बार गर्मियों की छुट्टियाँ मिली। उसके बाद गर्मी तो निरंतर पड़ी, गर्मी को सहन करने की स्वयं की क्षमता भी घटी। लेकिन लगभग 23 वर्षों के लंबे अंतराल में गर्मियों की छुट्टियां कभी नहीं पड़ी। 2020 कोरोना काल ने ऐसा मौका दिया कि 20 मार्च से 26 मई तक छुट्टियाँ ही चल रही हैं। देखते हैं छुट्टियां 31 मई के बाद भी बढ़ती हैं या फिर ये छुट्टियों का सिलसिला यहीं खत्म हो जायेगा। ✍🏻"प्रदीप सिंघल"

अमीर पिता और गरीब पिता के बच्चों में फर्क 👇

अमीर पिता के बच्चों को धन-दौलत, ऐशो-आराम, मौज-मस्ती ये सब विरासत में मिलती है। गरीब पिता के बच्चों को गरीबी, बदहाली, बेबसी, लाचारी विरासत में मिलती है,उन्हें इससे लड़ने के लिए तमाम उम्र कड़ी मेहनत और लंबा संघर्ष करना पड़ता है। ✍🏻 प्रदीप सिंघल।