The Story of Middle Class People
मैंने अब तक यही महसूस किया कि हम मध्य वर्गीय लोगों का ज्यादातर जीवन उम्मीद के सहारे बीत जाता है मुझे याद है जब मैंने सन् 1998 में दिल्ली से दसवीं की बोर्ड परीक्षा पास कि तो, नंबर कुछ खास ना आ पाने की वजह से परिवार वालों को यही लगा कि ये अब पढ़ाई में नहीं चल सकता। अच्छा होगा कि कोई काम काज ही करवा दें। लगभग उस समय मेरी आयु लगभग 18 वर्ष की होगी, यूं तो व्यापारी परिवार से हूँ जिस कारण हमारे यहाँ नौकरी से ज्यादा अपने काम को ही महत्त्व दिया जाता है। बेशक से व्यापार छोटा ही किया जाये पर व्यापार करने के लिए ही प्रेरित किया जाता है। सपने तो हम लोगों के बहुत बड़े बड़े होते हैं लेकिन हमें उन्हें पूरा करने का हक नहीं होता क्योंकि परिवार के पास इतनी क्षमता ही नहीं होती कि बच्चों के भविष्य पर ध्यान दिया जाए। बस किसी तरह आज गुजर जाये कल जो होगा देखा जायेगा। दिन बीतते साइकिल से शुरू हुआ जीवन साइकिल के पहिये की तरह घूमता रहा।
To be continued....
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