लेखक का कर्तव्य (-Singhal)
लेखक का कर्तव्य सत्य लिखना है ना कि किसी की झूठी प्रशंसा करना। जो चीज़ उसने महसूस ही नहीं कि, जिससे वो स्वयं रूबरू ही नहीं हुआ। उसके बारे में कुछ भी झूठ, मनगढंत लिखकर वो सिर्फ स्वयं का ही नहीं, बल्कि पूरे समाज का दोषी कहलाता है। लोगों ने उसे अपना आदर्श माना है, उसे अपना प्रेरणा स्रोत समझा है। ना कि कोई मदारी जो कि अपना पेट भरने के लिए खेल तमाशा दिखाये और सबका मन बहलाये।
-प्रदीप सिंघल
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