अगर आप अपने किसी मित्र, रिश्तेदार, परिचित या फिर भाईचारे में ही क्यों ना सही, यदि उनके जीवन की हर खुशी में हर समय शामिल हुए हैं तो उनके दुख तकलीफ में भी शामिल होना आपका दायित्व बनता है..!

-प्रदीप सिंघल

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