फर्क नहीं बेटे बेटी में समझो माँ के प्यारो। ना बेटी मारो। भगवान की इस नेमत पे, क्यूं चलता जोर तुम्हारा। क्यूं बनते पाप के भागी, बिल्कुल भी नहीं विचारा। ममता की मूरत है बेटी ये सच्चाई स्वीकारो। ना बेटी मारो.... धन दौलत बेटे बांटे और सुख दुख बेटी बांटे। बिन स्वार्थ के सेवा में, वो सारा जीवन काटे। क्या देंगे कलयुग के बेटे, आओ सभी विचारो। ना बेटी मारो.... माँ का ही रूप है बेटी, जो इसको मरवाओगे। फिर किस मुँह से जाकर के, माँ से बेटा पाओगे। करके कन्यादान ऐ "नरसी" अपना जन्म सुधारो। ना बेटी मारो.... लेखक व गायक: श्री नरेश नरसी जी फतेहाबाद -हरियाणा। मोबाइल नंबर: 9416241061 🙏🙏🙏🙏🙏 प्रेषक: प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले)
🙏🙏🙏🙏🙏 31 मई 2020 रविवार सुबह 9:30 बजे बाऊ जी श्री महाबीर प्रसाद जांगड़ा जी के देहांत का दुखद समाचार मिला। जिसे सुनकर सिंघल परिवार के सभी सदस्यों को बहुत दुख हुआ। इस दुख की घड़ी में हमें नरेश नरसी भाई के साथ, परिवार के बीच परिवार की तरह खड़े होना चाहिए। लेकिन पूरे विश्व में आई वैश्विक महामारी कोरोना के चलते और सामाजिक दूरी के नियम का पालन करते हुए, हमारा इस दुख की घड़ी में जांगड़ा परिवार के साथ खड़े हो पाना मुशिकल है। जिसके लिए हम जांगड़ा परिवार के प्रत्येक सदस्य से माफी चाहते हैं। और प्रभु से यही प्रार्थना करते हैं कि वो हमारे बाऊ जी को अपने चरणों में स्थान दें। तथा जांगड़ा परिवार को परिवार के मुखिया को खोने का जो दुख पहुंचा है उसे सहन करने की शक्ति दें। 🙏🙏🙏🙏🙏 शोकाकुल: सिंघल परिवार जीन्द वाले। नजफगढ़ - नई दिल्ली। -प्रदीप सिंघल। नोट: बाऊ जी श्री महाबीर प्रसाद जांगड़ा जी सुप्रसिद्ध भजन लेखक व गायक आदरणीय श्री नरेश नरसी जी (फतेहाबाद) के पिता जी हैं।
।। ॐ श्री श्याम देवाय नमः।। सुप्रसिद्ध हरियाणवी भजन: खाटू-धाम का नजारा~बड़ा क्यूट सांवरे। भगतां का दिल~लेता लूट सांवरे। बोलूं साची-साची~कोन्या बोलूं झूठ सांवरे। तेरा मेरा प्यार सै~अटूट सांवरे। खाटू धाम की या रेत~राखै भगतां से हेत, बाबा सेठां का तू सेठ~मन्ने आच्छा लागै सै। तेरा साच्चा दरबार~लीले घोड़े का सवार, बाबा तेरा यो परिवार~मन्ने आच्छा लागै सै। तेरा भोग प्रसाद~घड़ी-घड़ी आवै याद, तेरे चूरमें का स्वाद~मन्ने आच्छा लागै सै। वो निशान का उठाणा~श्याम कुंड में नहाणा, खाटू धाम आणा-जाणा~मन्ने आच्छा लागै सै। (१) तेरे प्रेम का ही होया~यो असर सांवरे। चारूं काणी आवै~तू नज़र सांवरे। मैं तो तब से ही होया~बेफिक्र सांवरे। मन्ने पकड़ी जो~खाटू की डगर सांवरे। तेरी कृपा का ना तोड़~मन्ने काढ़या यो निचोड़, रिंग्स खाटू का वो रोड़~मन्ने आच्छा लागै सै। (२) कैसे भूलूंगा मैं तेरा~एहसान सांवरे। तुम से ही मेरी~पहचान सांवरे। तूने होंठों पे बिखेरी~मुस्कान सांवरे। किस्मत हुई है~मेहरबान सांवरे। Narsi धरता तेरा ध्यान~अटकी तेरे में ही जान, करणा तेरा गुणगान~मन्ने आ...
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