वास्तविकता// इस रंग बदलती दुनिया में, निर्धन का साथी कोई नहीं (©®Writer)


 👉 आज के दौर की वास्तविकता:
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कोई नहीं-कोई नहीं।

तेरा सच्चा साथी कोई नहीं।

इस रंग बदलती दुनिया में, निर्धन का साथी कोई नहीं।

बलवान के संगी लाखों हैं, निर्बल का साथी कोई नहीं।


(1)

मतलब के रिश्ते-नाते हैं, मतलब है तो मीठी बातें हैं।

जब वक्त बुरा आ जाता है, उस वक्त का साथी कोई नहीं।

बलवान के संगी..... 

(2)

जब तक खुशियों के मेले हैं, सब अपनापन दिखलाते हैं।

है सुख तो सब हैं साथ, मगर दुख-दर्द का साथी कोई नहीं।

बलवान के संगी.....

(3)

ये कलयूग है इस कलयूग में, बस झूठ का सिक्का चलता है।

झूठे को मान-सम्मान मिले, पर सच का साथी कोई नहीं।

बलवान के संगी..... 

(4)

पल-पल ये रंग बदलती है, मैंने दुनिया को आजमाया है।

नादान न बन तू "दास" तेरे, किसी पाप का साथी कोई नहीं।

बलवान के संगी..... 

👉 Writer: Ashok Sharma Ji "Daas"

👉 Singer: Kumar Vishu Ji

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👉 singhalpardeep.blogspot.com


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