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खेल समय का (-सिंघल प्रदीप)

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ये समय तय करता है, कि आपने जो मेहनत की है, जो कोशिश की है। वो कितनी सही और कितनी गलत है। -प्रदीप सिंघल

सुप्रसिद्घ हरियाणवी भजन देना है तो दे-दे साँवरे (Lyrics-Bhimsen Bhiwani)

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सुप्रसिद्ध हरियाणवी भजन:- देना हो तो दे-दे साँवरे, क्यूँ ज्यादा तरसावै सै-२ ना देना तो साफ नाट, क्यूँ लखदातार कुहावै सै-२ तेरे काट-काट कै चक्कर, मैं तो तेरे दर के हार लिया। मैं ना पिंड तेरा इब छोडूँ, मनै मन मै पक्का धार लिया। भगत तेरा भुखा सोवै, तू 56 भोग उडावै सै। ना देना तो.... तेरे भण्डारे मैं कमीं नहीं, यो कैणा दुनिया सारी का। भगत तेरा दुख पावै, तो के फायदा साहूकारी का। लेन-देन का जिक्र करै ना, मनै बातां मैं बहकावै सै। ना देना तो.... तनै देना पडै जरूरी, मैं ज़िद्दी घणां अनाड़ी सूँ। बाबा सेठ तू नंबर वन सै, तो मैं नंबर एक भिखारी हूँ। सब भगतां के आगै क्यूँ तू , अपनी पोल खुलावै सै। ना देना तो.... मैं हर ग्यारस नै, तेरे धाम पै चलकै आऊँ सूँ। फोकट मैं कोणया माँगू, तेरे नये-नये भजन बनाऊं सूंँ। क्यूँ "भीमसेन" नै देवण मैं, तू कंजूसी दिखलावै सै। ना देना तो.... (तर्ज:- मेरे पाछे-पाछे आवण का) हमारी जानकारी के मुताबिक इस भजन को लिखे लगभग आज 15 वर्षों से भी अधिक समय हो गया। लेकिन ये सदाबहार भजन आपको फिर भी कहीं ना कहीं सुनाई जरूर दे जायेगा। धार्मिक कीर्तन क...

मतलब की दुनिया सारी लीरिक्स (-Naresh Narsi Ji)

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हकीकत-ए-दुनिया: मतलब की दुनिया सारी, मतलब की रिश्तेदारी। मतलब के लोग यहाँ पर, मतलब की है सब यारी। अन्धा करती इन्साँ को, मतलब ऐसी बिमारी। मतलब बिन बोले नाहिं, अपनी ही नारी। मतलब की दुनिया सारी..... मतलब पीछे एक भाई, भाई को गोली मारे। मतलब घर की बहू जलवा दे। मतलब ही सारी दुनिया में नाम करा दे। और मतलब ही बीच चौराहे पीटवा दे। बच के रहना सभी, गाँठ बान्धो अभी। एक दिन आ सकती भैया, अपनी भी बारी। मतलब की दुनिया..... मतलब को मत लब पर लाना, मतलब चीज़ बुरी है। पाला पड़े ना कभी मतलबी से। मतलब पीछे खोटे कर्म ना करना कभी भी प्यारे मेरा कहना यही है सभी से। मतलबी ना बनो, मान लो सज्जनों। मेरा मतलब समझाना, मर्जी तुम्हारी। मतलब की दुनिया..... मतलब के सब खेल तमाशे, इस दुनिया में। "नरसी" यहाँ कोई नहीं है किसी का। मतलब से मतलब हैं रखते भाई बन्धु प्यारे। रिश्तेदारी है नाम इसी का। मतलबी ये जहाँ, कौन किसका यहाँ। मतलब से भरी पड़ी है संसद हमारी। मतलब की दुनिया..... रचनाकार: श्री नरेश जांगिड़ -नरसी जी। फतेहाबाद -हरियाणा। मो० 9416241061 🙏🙏🙏🙏🙏 Watch On Youtube:...

बेटी हूँ तो क्या बेटे से ज्यादा फर्ज़ निभाऊँगी (Lyrics-Naresh Narsi Ji & Voice-Dr. Srishti Jangir)

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माना कठिन डगर है मेरी पर मंजिल पा जाऊँगी। बेटी हूँ तो क्या बेटे से ज्यादा फर्ज़ निभाऊँगी। आए जो कभी समय बुरा तो याद मुझे तुम कर लेना। मत कमज़ोर समझना खुद को आँख न आँसू भर लेना। बनकर लाठी संग आपके खड़ी नजर मैं आऊँगी। बेटी हूँ तो क्या.... मत मारो मुझे कोख में मम्मी इस धरती पर आने दो। मुझको मेरा हक दो पापा कुछ करके दिखलाने दो। पढ़-लिख करके तुम दोनों का मैं सम्मान बढ़ाऊँगी। बेटी हूँ तो क्या.... मुझे मार कर क्या तुम खुद को माफ कभी कर पाओगे। बिन बेटी के बेटे वालो बहु कहाँ से लाओगे। रिद्धि-सिद्धी और सरस्वती-लक्ष्मी बन घर भर जाऊँगी। बेटी हूँ तो क्या.... बहन न होगी तिलक न होगा किसके वीर कहाओगे। हनी सिंह के दीवानों तुम लता कहाँ से लाओगे। पोंछ ले आँसू "नरसी" अब मैं और नहीं मर पाऊँगी। बेटी हूँ तो क्या.... रचयिता:- श्री नरेश नरसी जी। फतेहाबाद-हरियाणा। स्वर:- डॉ० सृष्टि जांगिड़। मोबाइल: 9416241061 🙏🙏🙏🙏🙏 प्रषेक: प्रदीप सिंघल। शुभचिंतक: सिंघल परिवार से लाला श्री अमृतलाल सिंघल जी। श्रीमती सुलोचना सिंघल जी। प्रदीप सिंघल व मीनू सिंघल। अंशिका व पाकी सिं...

Coming Soon बेटी हूँ तो क्या बेटे से ज्यादा फर्ज़ निभाऊँगी (Lyrics: Naresh Narsi Ji & Voice: Srishti Jangir)

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मेरे बड़े भाई सम्मान आदरणीय श्री नरेश नरसी जी फतेहाबाद वाले, जिनकी लेख्नी व गायकी आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है। इनके शुभचिंतक और प्रशंसक इन्हें अपने परिवार का सदस्य समझते हैं। इन्होंने अपने सरल स्वभाव और मिलनसार अंदाज़ से लोगों के दिलों में अपना घर बनाया है। 23 जुलाई सुबह 7 बजे हिसार की जानी मानी म्यूज़िक कंपनी जुगनी सीरिज के माध्यम से हमारी लाड़ो बिटिया डॉ० सृष्टि जांगिड़ द्वारा पहली बार गाया जाने वाला और नरेश नरसी जी द्वारा लिखा गीत बेटी हूँ तो क्या हुआ ऱिलिज हो रहा है।  एक पिता जिसकी लाड़ो बिटिया पहली बार कोई गीत गाये और वो भी स्वयं उसी का लिखा हुआ। एक पिता के लिए ये बड़े गर्व की बात है। मैं इस खुशी के मौके पर जांगिड़ परिवार फतेहाबाद से हमारे भाई श्री नरेश नरसी जी और लाड़ो बिटिया सृष्टि जांगिड़ को अग्रिम शुभकामनाएँ देता हूँ और ये आशीर्वाद देता हूँ कि बिटिया रानी आप अपने पिता जी से भी ज्यादा तरक्की करें। अपने घर परिवार का नाम रोशन करें। आपकी आवाज सिर्फ अपने देश ही नहीं पूरी दुनिया में सुनाई दे और हर बेटी अपने पिता से कहे। रिद्धि सिद्धि और सरस्वती लक्ष्मी बन घर भर जाऊ...

क्यूँ ना सुणता डमरू वाला (लेखक व गायक: श्री भीमसैन जी -भिवानी)

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भोलेनाथ मैं तेरे नाम की रोज रटूँ सूं माला। क्यूँ ना सुणता डमरू आला, क्यूँ ना सुणता डमरू आला। तन्नै चाला कर दिया मोटा पी के भांग का लौटा। बस इतना मन्नै बता दे मेरा कर्म लिख्या क्यूँ खोटा। बंद किस्मत का भोलेनाथ जी कद खोलेगा ताला। क्यूँ ना सूणता.... महंगाई मैं भोले ना घर का चालै गुजारा। क्यूँ आँख मूंद के बैठया ना समझे मेरा इशारा। देना सै तो ढंग ते दे ना बेशक कर दे टाला। क्यूँ ना सुणता.... तू उनकी करै सुणाई जो कांवड़ तेरी ल्यावैं। इब मन्नै बता दे भोले तै के मेरे ते चाहवै। "भीमसैन" तै भोलेनाथ तेरा आज पड़या सै पाला। क्यूँ ना सुणता.... लेखक व गायक: श्री भीमसैन जी भिवानी। दादा आपको मेरी ओर से कोटि कोटि प्रणाम। 🙏🙏🙏🙏🙏 प्रषेक: प्रदीप सिंघल। (जीन्द वाले) (नोट: उदेश्य सिर्फ इतना ही है कि दादा श्री भीमसैन जी भिवानी वालों के लिखे व गाये भजन जन जन तक पहुँचे)

रै सुण खाटू आले तेरे बिना ना रोटी भावै (-Naresh Narsi Ji)

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सुप्रसिद्ध हरियाणवी भजन: ज्यूँ-ज्यूँ ग्यारस नीङे आवै, याद कसूती आवै। रै सुण खाटू आले, तेरे बिना ना रोटी भावै। रै सुण लीले आले, तेरे बिना  ना रोटी भावै। (1) बैरण नींद आवै कोन्या, पीछे मेरे पड़रह्या तू। क्यूकर मैं भुलाऊं तन्ने, भीतर ले में बड़रह्या तू। सुपणे में भी खाटू दिखै, साबत रात जगावै। रै सुण खाटू आले.... रै सुण लीले आले.... (2) कालजे मैं म्हारै बाबा, उठ रही हुक सी। तेरी याद की या दिल पै, लागै सै बंदूक सी। कामकाज मैं जी ना लागै, तेरी याद सतावै। रै सुण खाटू आले.... रै सुण लीले आले.... (3) ग्यारस पै मिली या चिट्ठी, तेरे मेरे मेल की। आजा-आजा बोलै सीटी, खाटू आली रेल की। घड़ी-घड़ी न्यू लागै के, तू हेल्ला मार बुलावै। रै सुण खाटू आले.... रै सुण लीले आले.... (4) एकले का जी ना लागै, बैठया सोचूं कोली मैं। खाटू के मैं आ के खेलूं, भगतां से होली मैं। जे नहीं बुलाया मन्ने, दुनिया तेरी हंसी उडावै। रै सुण खाटू आले.... रै सुणलीले आले.... (5) श्याम रंग आली बाबा, चूंदड़ी मैं ओढूं जी। इब तो मैं बाबा तेरा, पिंड कोन्या छोडूं जी। छोड़ के दुनियादारी  "नरसी", ...