क्यूँ ना सुणता डमरू वाला (लेखक व गायक: श्री भीमसैन जी -भिवानी)



भोलेनाथ मैं तेरे नाम की रोज रटूँ सूं माला।
क्यूँ ना सुणता डमरू आला, क्यूँ ना सुणता डमरू आला।

तन्नै चाला कर दिया मोटा पी के भांग का लौटा।
बस इतना मन्नै बता दे मेरा कर्म लिख्या क्यूँ खोटा।
बंद किस्मत का भोलेनाथ जी कद खोलेगा ताला।
क्यूँ ना सूणता....

महंगाई मैं भोले ना घर का चालै गुजारा।
क्यूँ आँख मूंद के बैठया ना समझे मेरा इशारा।
देना सै तो ढंग ते दे ना बेशक कर दे टाला।
क्यूँ ना सुणता....

तू उनकी करै सुणाई जो कांवड़ तेरी ल्यावैं।
इब मन्नै बता दे भोले तै के मेरे ते चाहवै।
"भीमसैन" तै भोलेनाथ तेरा आज पड़या सै पाला।
क्यूँ ना सुणता....

लेखक व गायक:
श्री भीमसैन जी भिवानी।
दादा आपको मेरी ओर से कोटि कोटि प्रणाम।
🙏🙏🙏🙏🙏
प्रषेक: प्रदीप सिंघल। (जीन्द वाले)

(नोट: उदेश्य सिर्फ इतना ही है कि दादा श्री भीमसैन जी भिवानी वालों के लिखे व गाये भजन जन जन तक पहुँचे)

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