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Surname Singhal (अग्रसेन जी के वंशज)

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#सिंघल_हिन्दी_में #Singhal_इंग्लिश_में #ਸਿਂਘਲ_पंजाबी_में 🙏🙏🙏🙏🙏  

जीवन में उम्मीद का प्रभाव (-PS)

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-singhalpardeep.blogspot.com

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कभी रूठना ना मुझसे तू श्याम साँवरे (Lyrics -Romi Ji & Voice -Sanjay Mittal Ji)

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सुप्रसिद्ध भजन: कभी रूठना ना मुझसे.... स्थाई: कभी रूठना ना मुझसे तू श्याम साँवरे-੨ मेरी जिंदगी है अब तेरे नाम साँवरे-੨ मेरा साँवरे सवेरा तेरे नाम से-੨ तेरे नाम से ही जिंदगी की शाम साँवरे-੨ (1) चिंतन हो सदा इस मन में तेरा, चरणों में तेरे मेरा ध्यान रहे। चाहे दुख में रहूँ चाहे सुख में रहूँ, होंठों पे सदा तेरा नाम रहे। तेरे नाम से ही मेरी पहचान है। तेरी सेवा में ही मेरा कल्याण है। मेरा रोम-रोम तेरा कर्जाई है, तेरे कितने गिनाऊँ एहसान साँवरे। कभी रूठना ना.... (2) दिल तुमसे लगाना सीखा है, तुमसे ही सीखा याराना। जीवन को संवारा है तुमने, बदले में मैं दूँ क्या नज़राना। मैंने दिल हारा ये भी तेरी प्रीत है। मेरी हार में भी श्याम मेरी जीत है। बस दिल की यही है एक आरजू, तुझे दिल का बना लूँ मेहमान साँवरे। कभी रूठना ना.... (3) दुनिया के मैं अवगुण क्या देखूँ, मेरे अवगुण कई हजार प्रभु। तुम अवगुण मेरे सब ढ़कलोगे, इतना है मुझे एतबार प्रभु। मेरे अवगुणों से नजरों को फेर लो हाँ फेर लो। अपनी बाँहों में प्रभु जी मुझे घेर लो हाँ घेर लो। ऐसी कृपा करो ना इस दास (रोमी) पे, रहे पापों का ना कोई भी निशान साँवरे। कभी रू...
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अगर आप अपने किसी मित्र, रिश्तेदार, परिचित या फिर भाईचारे में ही क्यों ना सही, यदि उनके जीवन की हर खुशी में हर समय शामिल हुए हैं तो उनके दुख तकलीफ में भी शामिल होना आपका दायित्व बनता है..! -प्रदीप सिंघल

25 नवंबर सांय 6 बजे के करीब मेरे पिता जी का स्वर्गवास हो गया (-Pardeep Singhal)

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मेरे पिता जी ने मुझे सदा सरलता व सादगी के साथ जीवन व्यतीत करने की शिक्षा दी। उन्हें ढोंग-दिखावे से सख्त नफरत थी। उनका मानना था कि यदि दिल में प्यार प्रेम नहीं तो जुबां से कहने का क्या फायदा। जब मैं छोटा था तो उन्होंने मुझे अपनी साइकिल पर बैठा खूब घुमाया और जब 1998 के बाद पढ़ाई छोड़ मैंने कामकाज संभाला तो उन्होंने मेरे साथ दोपहिया वाहन पर पीछे बैठ खूब सफर तय किया। हमारे दो पहिया वाहन पर लोगों को अक्सर दो हैलमेट नजर आते थे। लगभग 22 साल उन्होंने मेरे पीछे बैठ सिर्फ पिता ही नहीं एक अच्छे दोस्त, अच्छे भाई, अच्छे संगी की तरह साथ निभाया। हमने दिल्ली की सड़को पर कई हजार किलोमीटर का सफर एक साथ तय किया। सिर्फ घर से अपने व्यवसायी स्थल ही नहीं, रिश्तेदारी से लेकर भाईचारे तक और घूमने फिरने तक हमने कई यात्राएं एक साथ की। स्वयं चाहे कैसा भी पहना और खाया पर मुझे अच्छे से अच्छा पहनाने और खिलाने का प्रयास किया। ऐसे पिता के लिए जितना लिखा जाये शायद उतना ही कम है। आप में से बहुत से प्रतिष्ठित मेरे फेसबुक मित्र उनसे दो चार बार मिले भी हैं। जिसके लिए मैं आपका हृदय से आभार करता हूँ और आप सभी से आग्रह करता हू...

लेखक का कर्तव्य (-Singhal)

लेखक का कर्तव्य सत्य लिखना है ना कि किसी की झूठी प्रशंसा करना। जो चीज़ उसने महसूस ही नहीं कि, जिससे वो स्वयं रूबरू ही नहीं हुआ। उसके बारे में कुछ भी झूठ, मनगढंत लिखकर वो सिर्फ स्वयं का ही नहीं, बल्कि पूरे समाज का दोषी कहलाता है। लोगों ने उसे अपना आदर्श माना है, उसे अपना प्रेरणा स्रोत समझा है। ना कि कोई मदारी जो कि अपना पेट भरने के लिए खेल तमाशा दिखाये और सबका मन बहलाये। -प्रदीप सिंघल