(तर्ज: मेरे पाछै पाछै आवण का) सुप्रसिद्घ हरियाणवी भजन: ⬇⬇⬇⬇⬇ मैं के बोलूं श्याम धणी, तन्ने सब बातां का बेरा सै। पिछले साल घणे तारे, पर इबके नंबर मेरा सै। (1) मेरे अगड़ पड़ोसी सारे, तन्ने उनका काम बनाया सै। किसी ने गाड ली कोठी, किसी ने महल सजाया सै। तन्ने यो के हाल बणाया सै, मेरा दो कमरां मैं डेरा सै। पिछले साल.... (2) तू दोनों हाथ लुटावै, तेरे घणे खजाने भरे पड़े। हम रोटी पूरी करते, और कमा-कमा के मरे पड़े। 56 करोड़ का बम्पर खुल ज्या, इतना माल भतेरा सै। पिछले साल.... (3) मेरा सपना पूरा होगा, ना छोड़ी इब तक आस मन्ने। तू सुणेगा विनती मेरी, यो सै पक्का विश्वास मन्ने। देर सही अन्धेर नहीं, "नरसी" ने इतना बेरा सै। ⬇⬇⬇⬇⬇ लेखक व गायक: आदरणीय श्री नरेश नरसी जी। फतेहाबाद - हरियाणा मोबाइल: 94-162-41-061 💟💟💟💟💟 हमारी जानकारी के मुताबिक ये रचना लगभग सन् 2004 में लिखी गई। जिसे लिखे हुए आज लगभग 17 वर्ष से ज्यादा हो गये। लेकिन हरियाणवी भजनों में ये रचना आज भी श्याम प्रेमियों की पहली पसंद है। इस सदाबहार व सुप्रसिद्घ रचना के रचयिता को मेरा कोटि-कोटि प्रणा...