बनिये की डयूटी (कर्तव्य ओर कर्म)


जब भी कोई व्यक्ति किसी #बनिये भाई की दूकान, प्रतिष्ठान, कार्यस्थल को देखता है तो आमतौर पर यही कहता है कि देखो इसका काम कितना अच्छा चल रहा है। रोज़ाना खूब पैसे कमा रहा है। जबकि मेरा मानना है कि बनिया नहीं उसकी डयूटी, उसकी बैठक कमा रही है। अपने काम काज के प्रति उसकी मेहनत और समर्पण कमा रहा है। सुबह 5-6 बजे प्रभु का नाम लेकर दुकान को नुचकारते हुए खोलना और रात्रि को 10-11 बजे प्रभु का शुक्रिया करते हुए अपनी दूकान को बढ़ाना। लगातार 15-16 घंटे डयूटी देना। हर किसी से आप और जी कहकर बात करना, अपने स्वभाव से लोगों के दिलों को जीतना। कई घंटों की कड़ी मेहनत व कठिन तपस्या के बावजूद हर किसी से अच्छा व्यवहार करना। ना जाने ऐसी कितनी ही खूबियों का भंडार ले अपने कर्तव्य का पालन करना। दूकान पर आने वाले किसी भी धार्मिक और जन कल्याण संस्थाओं के सदस्यों का अपनी क्षमता व सामर्थ्य अनुसार सहयोग करना।

🙏🙏🙏🙏🙏
नोट: मैं मध्यम वर्गीय से हूँ, जो चीज़ जो खूबी अपने बनिये भाइयों में देखता हूँ उसे ही राष्ट्रीय अग्रवाल महासभा फेसबुक समूह के माध्यम से आप सभी अग्रबंधुओं के बीच शेयर करता हूँ। ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे अपनी बात, अपना अनुभव आप सभी के बीच रखने के लिए इस समूह से जुड़ने का मौका मिला। कहीं कोई कुछ बात गल्त लगे तो माफी चाहूँगा।
-आपका वैश्य बंधु प्रदीप सिंघल
💟💟💟💟💟
singhalpardeep.blogspot.com

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ना बेटी मारो (Lyrics & Voice -नरसी जी)

31मई 2020 (दुखद समाचार)

खाटू-धाम आणा-जाणा मन्ने आच्छा लागै सै (L&V:- Naresh Narsi Ji~Fatehabad)