बाणिया (-Pardeep Singhal)

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जहां तक मुझे जानकारी है और मैंने सुना व पढ़ा है। पूरी धरती पर हमारे समाज को ऐसे ही सम्मान पूर्वक पुकारा जाता जा रहा है और रहती दुनिया तक पुकारा जाता रहेगा।

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बनिये।
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बाणिये।
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लाला जी।
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सेठ जी।
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महाजन।
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गुप्ता जी।
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वैश्य बंधु।
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अग्रवाल साहब।
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अग्रबंधु।
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अग्रवंशी।
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लक्ष्मी पुत्र।
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गोत्र के साथ साहब ( जैसे कि सिंघल साहब)
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लेकिन उसके बावजूद भी कुछ भाई बंधु कहते हैं कि ये मत कहो वो मत कहो। ऐसे कहो वैसे कहो। आखिर ऐसा क्यों। कुछ लोग तो अपने कमेंटस तक में अपनी भाषा, अपनी मर्यादा तक भूल जाते हैं। ये नहीं देखते कि सामने वाला कौन है..? उसकी पोस्ट का उद्देश्य क्या है। क्या उसकी पोस्ट में समाज हित की बात नहीं है। क्या उस व्यक्ति का हौंसला व मनोबल बढ़ाना हमारा दायित्व नहीं है। जो समाज की जानकारी हम तक पहुंचा रहा है। अपना कीमती समय समाज को दे रहा है। उसका शुक्रिया करने की बजाय उसी को बुरा भला कहने लग जाते हैं। इस धरती पर सबसे सभ्य व सबसे शांत समाजों में हमारी गिनती होती है। लेकिन उसके बावजूद भी एक दूसरे के साथ दुर्व्यवहार क्यों। हमारे यहां अक्सर कहा जाता हैै कि यदि .. "गुड़ नहीं दे सकते तो क्या हुआ गुड़ जैसी बात तो कर ही सकते हो" आशा करूंगा जो भाई बंधु गल्त कमेंटस करते हैं। इस पोस्ट के बाद वो अपने व्यवहार में परिवर्तन लाने की कोशिश करेंगे। कुछ गल्त लगे तो माफी चाहूंगा।
-आपका वैश्य बंधु प्रदीप सिंघल

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