बनियों की दुकान में गद्दी का महत्व व उसके पीछे का रहस्य

भोलेनाथ शिव शंकर जी का बनिये को वरदान:

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कहते हैं कि एक बार पार्वती जी ने भोलेनाथ जी से आग्रह किया कि आप समाज के प्रत्येक वर्ग को मुंह मांगा वरदान दीजिए। भला माता पार्वती जी की बात को भोलेनाथ कैसे टाल सकते थे। जो जैसी ईच्छा लेकर आया उसे वैसा ही वरदान मिलता गया और वो हंसी खुशी लौटता गया। सुबह से लेकर शाम हो गई, शाम के समय एक बनिया आया तब तक सबकुछ समाप्त हो चूका था। माता पार्वती ने बनिये से कहा कि तुम इतनी देर से क्यूँ आये। क्या तुम्हें मालूम नहीं था कि आज समाज के हर वर्ग को मुंह मांगा वरदान दिया जा रहा है। तो बनिये ने कहा माते पास ही के गांव में मेरी दुकान है और दुकानदारी करते करते मुझे आने में इतनी देर हो गई जिसके लिए मैं माफी चाहता हूँ। माता पार्वती ने कहा कि क्या तुम्हारी एक दिन की दुकानदारी से इतनी कमाई हो गई कि जो तुमने सही समय पर वरदान लेने आना भी उचित नहीं समझा। बनिये ने कहा माते मैं दुकानदारी सिर्फ पैसा कमाने के लिए ही नहीं करता, आज के दिन मेरे गांव में मजदूरों को उनकी मजदूरी का पैसा मिलता है। जिसे देकर वो राशन पानी खरीदते हैं, यदि मैं आज दूकान नहीं खोलता तो आज किसी के घर में भी चूल्हा नहीं जल पाता। जो कि शायद आपको भी अच्छा नहीं लगता। रही बात वरदान की तो आप दोनों की कृपा से मेरे पास सबकुछ है, मैं तो आपके दर्शनों की अभिलाषा लेकर आया था जो कि पूरी हो गई। बस आपका आशीर्वाद मुझ पर और मेरे परिवार पर सदैव बना रहे, मेरे लिए इतना ही बहुत है। बनिये की बात सुनकर शिव शंकर भोलेनाथ बहुत ही प्रसन्न हुए और कहा ये गद्दी मैं आपको सौंप रहा हूँ। जिस पर बैठकर मैंने समाज के समस्त वर्गों को वरदान दिए हैं। आज के बाद ये गद्दी जहां लगा दोगे वहीं तुम्हारा काम धंधा चलने लगेगा। दिन पर दिन पनपने लगेगा।

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नोट: शायद यही कारण है कि आपको बनियों की दूकान पर आज भी गद्दी दिखाई देती है। जब तक गद्दी की मान मर्यादा रही तब तक बनियों का व्यापार खूब चला भी और आज भी खूब चल रहा है। हर चीज़ का अपना कुछ महत्व होता है, कुछ रहस्य होता है। मैंने फेसबुक पर प्राप्त एक पोस्ट के आधार पर इस कहानी को बयान किया है। कहीं किसी प्रकार की कोई गल्ती हो गई हो तो माफी चाहूंगा।

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आपका वैश्य बंधु: अग्रवंशी प्रदीप सिंघल

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