खाटू धाम की माटी म्हारै रास आ गई (Lyrics-नरसी जी)
सुप्रसिद्ध भजन: कण - कण में तेरा वास प्रभु। जो करे दुखों का नाश प्रभु। दुनिया भर की खुशियां मेरे पास आ गई। थारे धाम की माटी म्हारै रास आ गई। कोई नहीं दिख्यो अपणो, जद तू ही नजर मनै आयो। खाटू नगरी आ बैठयो, जब मेरो जी घबरायो। पैर धरयो खाटू मैं, सांस मै सांस आ गई। खाटू धाम की माटी.... खाटू की माटी का, हमने देखा अजब नजारा। क्या निर्धन क्या सेठ, सभी को इसने पार उतारा। दुनिया सारी करके, ये विश्वास आ गई। थारे धाम की माटी.... रेत नहीं मामूली, ये तो है संजीवन बूटी। मौज करूं दिन साँवरा, सोऊं तान के खूंटी। होली और दीवाली, बारहों मास आ गई। खाटू धाम की माटी.... तेरी इस पावन मिट्टी में, मैं मिट्टी हो जाऊँ। सदा - सदा के लिए, तेरे इन चरणों में सो जाऊँ। "नरसी" के होंठो पे, इतनी प्यास आ गई। खाटू धाम की माटी.... लेखक एवं गायक: श्री नरेश "नरसी" जी। फतेहाबाद - हरियाणा। मोबाइल: 94-162-41-061 🙏🙏🙏🙏🙏 भजन प्रेषक : प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले)