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25 नवंबर सांय 6 बजे के करीब मेरे पिता जी का स्वर्गवास हो गया (-Pardeep Singhal)

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मेरे पिता जी ने मुझे सदा सरलता व सादगी के साथ जीवन व्यतीत करने की शिक्षा दी। उन्हें ढोंग-दिखावे से सख्त नफरत थी। उनका मानना था कि यदि दिल में प्यार प्रेम नहीं तो जुबां से कहने का क्या फायदा। जब मैं छोटा था तो उन्होंने मुझे अपनी साइकिल पर बैठा खूब घुमाया और जब 1998 के बाद पढ़ाई छोड़ मैंने कामकाज संभाला तो उन्होंने मेरे साथ दोपहिया वाहन पर पीछे बैठ खूब सफर तय किया। हमारे दो पहिया वाहन पर लोगों को अक्सर दो हैलमेट नजर आते थे। लगभग 22 साल उन्होंने मेरे पीछे बैठ सिर्फ पिता ही नहीं एक अच्छे दोस्त, अच्छे भाई, अच्छे संगी की तरह साथ निभाया। हमने दिल्ली की सड़को पर कई हजार किलोमीटर का सफर एक साथ तय किया। सिर्फ घर से अपने व्यवसायी स्थल ही नहीं, रिश्तेदारी से लेकर भाईचारे तक और घूमने फिरने तक हमने कई यात्राएं एक साथ की। स्वयं चाहे कैसा भी पहना और खाया पर मुझे अच्छे से अच्छा पहनाने और खिलाने का प्रयास किया। ऐसे पिता के लिए जितना लिखा जाये शायद उतना ही कम है। आप में से बहुत से प्रतिष्ठित मेरे फेसबुक मित्र उनसे दो चार बार मिले भी हैं। जिसके लिए मैं आपका हृदय से आभार करता हूँ और आप सभी से आग्रह करता हू...

लेखक का कर्तव्य (-Singhal)

लेखक का कर्तव्य सत्य लिखना है ना कि किसी की झूठी प्रशंसा करना। जो चीज़ उसने महसूस ही नहीं कि, जिससे वो स्वयं रूबरू ही नहीं हुआ। उसके बारे में कुछ भी झूठ, मनगढंत लिखकर वो सिर्फ स्वयं का ही नहीं, बल्कि पूरे समाज का दोषी कहलाता है। लोगों ने उसे अपना आदर्श माना है, उसे अपना प्रेरणा स्रोत समझा है। ना कि कोई मदारी जो कि अपना पेट भरने के लिए खेल तमाशा दिखाये और सबका मन बहलाये। -प्रदीप सिंघल

सत्य (-श्री नरेश नरसी जी की कलम से)

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मर्मस्पर्शी भजनों के लेखक व गायक सरदार श्री हरिमहेन्द्र सिंह "रोमी" जी

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भजन लीरिक्स: स्थाई: अगर दिल खोला होता उस दिलदार से। खुलवाना ना पड़ता फिर औज़ार से। दिल की होती तुमको कभी बीमारी ना। दिल की बातें कर लेते दिलदार से। (1) प्यार के दो पल मिले उसे प्यार से जी ले। श्याम का अमृत मिला उसे प्यार से पी ले। अगर तुमने संभाला होता दिल को प्यार से। खुलवाना ना पड़ता.... (2) रो रहा है क्यों तू प्यारे क्यों है तू गुमसुम। दिल की अपने बात पगले इक बारी तो सुन। अगर दिल को लुटाया होता उस दिलदार पे। खुलवाना ना पड़ता.... (3) दिल की हकीकत को सदा दिलदार ही जाने। हाल-ए-दिल "रोमी" साँवरा यार ही जाने। मरहम रखवाया होता अगर साँवरे यार से। खुलवाना ना पड़ता.... लेखक व गायक: सरदार श्री हरिमहेन्द्र सिंह "रोमी" जी। को मेरा कोटि कोटि प्रणाम। 🙏🙏🙏🙏🙏 प्रेषक: प्रदीप सिंघल (नोट: उद्देश्य सिर्फ इतना ही कि अच्छी रचनाएं अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे) 🙏🙏🙏🙏🙏

17 अक्टूबर कुलपिता महाराजा श्री अग्रसेन जी की जयंती पर प्रस्तुत है ये गीत (-SARC)

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भजन लीरिक्स: श्री राम प्रभु के वंशज है हम और माधवी के लाल। हम गर्व से सीना तान के कहते हम है अग्रवाल। हम अग्रवंश के बेटों का सारे जग में डंका बजता है। हर दान धर्म में अग्रवंश ही सबसे आगे रहता है। कुलदेवी है महालक्ष्मी और है नागलोक ननिहाल। हम गर्व से..... म्हारे अग्रसेन ने सत्य अहिंसा राह पे हमको चलाया है। व्यापार करो सत्कर्म करो हमको तो ये समझाया है। जो भी इनकी राह पे चलता हो जाता वो निहाल। हम गर्व से..... इस अग्रवंश की शान देखकर हर कोई आहें भरता है। हमको भी इसमें जन्म मिले ये सबकी जुबां पे रहता है। महालक्ष्मी की छाया "संजय" हम पे रहती हर हाल। हम गर्व से..... लेखक व गायक: अग्रविभुति श्री संजय अग्रवाल जी। रायगढ़ - छतीसगढ़। मोबाइल: 810-945-95-55 ।। जय श्री अग्रसेन जयते नम:।। आप सभी अग्रबंधुओं को कुलपितामह महाराजा श्री अग्रसेन जी की जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ। प्रेषक: अग्रवंशी प्रदीप सिंघल।  

बात दिल की जुबां पे आ जाये तो क्या होता है, वही होता है जो मंजूरे खुदा होता है।

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नाम सिंघल है मेरा दिल की खिड़की से बात करता हूँ। दिमाग से नहीं दिल से रिश्ते नाते निभाता हूँ। तुम कुछ भी समझो, तुम कुछ भी कहो, मैं तो बस दिल की बात दिल से करता हूँ। -प्रदीप सिंघल

कुलपितामह महाराजा श्री अग्रसेन जी पर भजन (लेखक व गायक: -राजेन्द्र अग्रवाल जी)

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Bhajan Lyrics:- जय अग्रसेन महाराज तेरी महिमा भारी।  बजता डंका जग में पूजे दुनिया सारी। जय अग्रसेन महाराज.... महाभारत के रण में कन्हैया के साथ थे। सुना है गरीबों के तुम्ही दीनानाथ थे। तेरे वंश पे लक्ष्मी का उपकार है भारी। जय अग्रसेन महाराज.... ईंट एक रूपया लेकर किया कल्याण था।  सारे गुणों के धारी नहीं अभिमान था। सुर नर मुनि गण भी थे तेरे आभारी। जय अग्रसेन महाराज.... अग्रोहा में लगता जैसे आज भी बसेरा है। मिलता है सब कुछ दर से बना जो भी तेरा है। "राजू" पर भी भगवन करो नज़र तुम्हारी।  जय अग्रसेन महाराज.... लेखक व गायक: राजेन्द्र अग्रवाल जी। प्रषेक: प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले) सभी अग्रबंधुओं को....  ।। जय जय महालक्ष्मी ।। ।। जय जय श्री अग्रसेन ।।