Chatak-Matak // चटक-मटक // सुप्रसिद्ध हरियाणवी गीत के लीरिक्स
👉 सुप्रसिद्घ हरियाणवी गीत: चटक-मटक
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👉 ओ घाल्ली आख्याँ मैं स्याही, रे बिन्दी माथे पे लाई।
👉 बहू सब कर दी गाम की फैल, मैं बण-ठण के जब आई।
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👉 ओ सारे देवर-जेठां के, मैं गई खटक-खटक।
👉 ओ गज़ का घूंघट काढ़, चाल्ली मैं तो मटक-मटक।
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👉 ओ चूड़ा हाथां मैं खणकै, तागड़ी छण-छण छणके।
👉 घूमाती चोटी नै निकड़ी, गाल मैं मोरणी बणके।
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👉 "बिट्टू सोरखी" इशारे में, गया रे झटक।
👉 ओ गज़ का घूंघट काढ़, चाल्ली मैं तो मटक-मटक।
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👉 टोकणी डूंगे धर राख्खी, मटकनी चाल करे चाला।
👉 मेरे गौरे रंग पै, सूट यो जच रया पटियाला।
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👉 जो मन्ने देखै सांस जावै, उसकी अटक-अटक।
👉 ओ गज़ का घूंघट काढ़, चाल्ली मैं तो मटक-मटक।
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इस सुप्रसिद्घ हरियाणवी गीत "चटक-मटक" से जुड़ी पूरी टीम को हार्दिक शुभकामनाएँ!
प्रेषक: प्रदीप सिंघल
singhalpardeep.blogspot.com
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