हर व्यक्ति के काम की बात
सिर्फ मन की ही नहीं, काम की भी बात:
ये सत्य है कि चाहे कोई कितना ही अमीर हो या फिर कितना ही गरीब, एक न एक दिन सभी को मर जाना है और ये भी सत्य है कि मनुष्य चाहे कितनी ही धन संपदा इकट्ठी करले, वो उसमें से एक रूपया भी साथ नहीं लेकर जा सकता है। ये भी सत्य है कि सुख और दुख जीवन का एक हिस्सा है, चाहे कोई अमीर हो या गरीब इनसे नहीं बच सकता उन्हें इनका सामना करना ही पड़ेगा। लेकिन ये भी तो जरूरी नहीं कि मनुष्य दुखों का सामना और अपने जन्म से लेकर मृत्यु तक का सफर गरीबी, बदहाली, लाचारी व बेबसी के साथ ही करे। एक व्यक्ति साइकिल पर चलते हुए, छोटी से घर में रहते हुआ अपना दुख प्रकट करे और लोगों को कहे कि मैं दुखी हूँ, परेशान हूँ। दूसरा व्यक्ति दुखी तो है, परेशान भी है लेकिन वो अपने महंगे बंगले, ए सी ऑफिस, महंगी गाड़ी में बैठकर दुखों का सामना करता है, उस लड़ाई को लड़ता है, तो जीवन किसका बेहतर कहलायेगा। मेरे ख्याल से तो उसका जो भौतिक सुखों के साधनों संग अपना जीवन बीता रहा है न कि उसका जो वही पुरानी घीसी-पीटी बातों को अपने जीवन का आधार मान अपना जीवन बीता रहा है। बहुत से लोग कई तरह के उदाहरण देते हैं जैसे कि सिकंदर ने पूरी दुनिया पे जीत हासिल की, बेशुमार दौलत इक्ट्ठी की, लेकिन जब वो दुनिया से गया तो उसके हाथ बिल्कुल खाली थे, वो कुछ भी साथ न ले जा सका। अब इसी उदाहरण में एक बात सामने निकलकर आती है कि, जिस कॉल में सिकन्दर की मृत्यु हुई, उस कॉल में न जाने और भी कितने ही लोगों की मृत्यु हुई होगी, लेकिन जिक्र आज भी सिकन्दर का ही होता है। सिकन्दर क्या बहुत से लोग खाली हाथ गए होंगे और रहती दुनिया तक जाते रहेंगे। शायद इसलिए कि सिकन्दर एक धनवान व्यक्ति था न कि एक साधारण सा गरीब इन्सान। जब से ये सृष्टि बनी दुनिया चढ़ते सूरज को सलाम करती है और जो ऊंचाईयों पर चढ़ता है, आगे बढ़ता है। उसी कि महिमा का बखान करती है। साहित्यकारों ने भी अपने साहित्य में उन्हीं लोगों को स्थान दिया, जो कुछ बन गए, किसी मुकाम पर पहुंच गए, जिन्होंने कुछ हासिल किया। गरीब की कहानी कोई नहीं लिखता और कोई भुला बिसरा लिख भी दे, तो उसे कोई पढ़ना पसंद नहीं करता। मुझे भी किताबें पढ़ने को शौक है, लेकिन उन्हीं हस्तियों की जो शिखर पर हैं। कई महान हस्तियों की जीवन से संबंधित किताबें पढ़ी और जब भी समय मिलता है आज भी पढ़ता रहता हूँ। पर ऐसे लोगों की जिनसे शिक्षा व प्रेरणा मिले, जिन्हें हम अपना आदर्श मान अपना जीवन सफल बना सकें, जाने से पहले दुनिया को कुछ नया-कुछ हटकर दे सकें।
लेखक: प्रदीप सिंघल
singhalpardeep.blogspot.com

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