The Thinking Of Pardeep Singhal
मेरा ये मानना है कि जिस तरह प्रभु श्री कृष्ण जी के लिए माता देवकी जी और माता यशोद्धा जी दोनों ही वंदनीय थी। एक ने जन्म दिया और दूसरी ने पालन पोषण किया। ठीक उसी तरह हर व्यक्ति को अपनी जन्मभूमि और कर्मभूमि को कभी नहीं भूलना चाहिए। एक भूमि पर हमारा जन्म हुआ और दूसरी पर हमारी मेहनत, हमारी लग्न के बलबूते हमारे और हमारे परिवार के सपने साकार हुए। सोशल मीडिया के माध्यम से मैं अपनी जन्मभूमि और कर्मभूमि का शुकराना करने का हमेशा प्रयास करता हूँ। बहुत से लोग मुझे मेरी जन्मभूमि के नाम प्रदीप सिंघल जीन्द वाले के नाम से भी जानते हैं। आज हमारे दिल्ली के घर के बाहर लगी नाम प्लेट भी हमारी जन्मभूमि का हृदय से आभार व्यक्त करती है। इक हसरत है मेरी जब जब लोगों की जुबां पर मेरा नाम आए, लोगों की जुबां पर मेरा जन्मभूमि और कर्मभूमि से प्रेम भी याद आ जाए। लेख: अग्रवंशी प्रदीप सिंघल।