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मेरे मनपसंद भजन:

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दिल में तू श्याम नाम की ये ज्योति जला के देख।

आऐगा मेरा साँवरा दिल से बुला के देख।

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मैं के बोलूं श्याम धनी तन्नै सब बाता का बेरा सै।

पिछले साल घणे तारे पर इबकै नंबर मेरा सै।

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मेरा संकट कटग्या जी मेहन्दीपुर के दरबार में।

मेरा संकट कटग्या जी मेहन्दीपुर के दरबार में।

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आओ भक्तों तुमको खाटू की सैर कराएं।

राजस्थान की धरती पे श्री श्याम ध्वजा लहराएं।

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इन्तजाम कर दिया है तुमने रोजी रोटी का।

विश्वकर्मा जी से नक्शा पास करा दे कोठी का।

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दुनिया में डंका बाज्या अंजनी के लाल का।

लाल लंगोटा संग में सोटा कमाल का।

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वक्त वक्त की बात बताऊँ वक्त बड़ा बलवान सुनो।

इन्साँ क्या इस वक्त के आगे झुक गए खुद भगवान सुनो।

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मतलब की दुनिया सारी मतलब की रिश्तेदारी।

मतलब के लोग यहां मतलब की है सब यारी।

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ऐ श्याम दीवाने पे इतना उपकार कीजिए।

दो आंसू ले कर आया हूँ स्वीकार कीजिए।

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ओ बाबा जाट के घर मैं आज्या।

आ के रोट राबड़ी खाज्या।

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खाटू आले श्याम इक काम कर दे।

सारी दुनिया मैं मेरा नाम कर दे।

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नाच रहे हनुमान छमाछम नाच रहे हनुमान।

हाथों में खड़ताल बिराजे सीने में सीयाराम।

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फर्क नहीं है बेटे बेटी में समझो माँ के प्यारो।

ना बेटी मारो - ना बेटी मारो।

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बोलो बोलो प्रेमियों श्याम बाबा की जय।

श्याम बाबा की जय खाटू वाले की जय।

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सच्चे हृदय से तू देख बुला के आऐगा साँवरिया।

प्रेमी जनों को छोड़ बता कहां जाऐगा साँवरिया।

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रै बाबा तेरा सोटा करै कमाल तन्नै पूजे दुनिया सारी।

यो मेहन्दीपुर शनि मंगलवार तेरा मेला लागै भारी।

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देख लिया जापान यो सारा देख्या अमरीका सै।

खाटू नगरी के आगै तो लंदन भी फीका सै।

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सोटा बाला का जद घुमै करै कमाल।

इसके आगै तो थर थर कांपै काल।

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कर बाबा से प्यार पता नहीं के दे दे।

कोठी बंगले कार पता नहीं के दे दे। 

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भगत हरियाणे का - भगत हरियाणे का।

सौ कोस से पैदल आया नहीं घबराने का।

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आ जा साँवरे आ जा साँवरे।

चरणों की दे दो मुझे छाँव रे।

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सौ सौ के बना दे तू करोड़ साँवरे।

मैं भी खड़ा हूँ हाथ जोड़ साँवरे।

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तू सै मोटा साहूकार म्हारा मन्दा है व्यापार।

आज्या बाबा आज्या दे दे हारे नै सहारा।

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खाटू में आया पहली बार मेरी बिगड़ी बना दे मेरे साँवरे।

खाटू में आया पहली बार मेरी बिगड़ी बना दे मेरे साँवरे।

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खाटू धाम की माटी म्हारै रास आ गई।

बाबा थारे धाम की माटी म्हारै रास आ गई।

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दे दे एक गुलाबी नोट मन्नै खाटू जाणा सै।

खाटू जा के बाबा श्याम रिझाणा सै।

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माना कठिन डगर है मेरी पर मंजिल पा जाऊँगी।

बेटी हूँ तो क्या बेटे से ज्यादा फर्ज़ निभाऊँगी।

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झूठी गर्दन हिलाते हो कीर्तन में क्यों भक्ति करने को सच्चा जिगर चाहिए।

खींचा दौड़ा चला आऐगा साँवरा तेरी आंहो में इतना असर चाहिए।

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तुम्हें प्रीत मेरी निभाना पड़ेगी मुझे श्याम अपना बनाकर तो देखो।

बिछा दूंगा पलकें राहों में तेरी कभी मेरी कुटिया में आकर तो देखो।

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है भक्त की पहचान ये दिलदार साँवरा।कहता हूँ छाती ठोक मेरा यार साँवरा। 

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दुनिया क्या देखते हो खाटू में आ के देखो ना।

बाबा की नगरी अगर जायेगा बिगड़ा मुकद्दर संवर जायेगा।

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चलती है और चलती रहेगी खाटू की सरकार।

खुला रहेगा यूगों युगों तक ये इनका दरबार।

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रै सुण खाटू आले तेरे बिना ना रोटी भावे।

ज्यूँ ज्यूँ ग्यारस नीड़े आवे याद कसूती आवे। 

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बाबा मेरी बेटी को ऐसा परिवार मिले।

जहाँ सेवा हो तेरी ऐसा परिवार मिले। 

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परिवार का बोझा जो कंधो पे ढ़ोता है।

कोई और नहीं प्यारे वो पिता ही होता है। 

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लेखक व गायक: श्री नरेश नरसी जी।

फतेहाबाद - हरियाणा।

मोबाइल नंबर: 94-162-41-061

On Fb: Naresh Narsi

On Fb Page: Naresh Narsi Fans

On YouTube: Legend Naresh Narsi 

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ऐसी सैकड़ों रचनाओं के रचनाकार आदरणीय श्री नरेश नरसी जी (फतेहाबाद), जिन्होंने अपनी लेख्नी और अपनी गायकी के साथ साथ अपने सरल स्वभाव और मिलनसार अंदाज़ से लोगों के दिलों में जगह बनाई। इनके चाहने वाले इन्हें बड़े ही सम्मान के साथ नरसी भाई कहकर पुकारते हैं। मैं भी इनका एक साधारण सा प्रशंसक हूँ।

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जब जब इनसे मिलने का मौका मिला ऐसा लगा जैसे किसी अपने से मिल रहा हूँ। ऐसी महान हस्ती को मेरा कोटि कोटि नमन।

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नमन कर्ता: प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले)

नजफगढ़ - नई दिल्ली।

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नोट: उद्देश्य सिर्फ इतना ही कि नरसी भाई की लिखी रचनाएँ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचे।

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।। जय श्री श्याम जी।।



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