अच्छी बातों और अच्छे विचारों का प्रचारक (-Pardeep Singhal)
एक व्यक्ति लिखने में बहुत ही अच्छा माहिर है। वो प्रतिदिन अपनी डायरी में कुछ ना कुछ जरूर लिखता। रोजाना लिखता है और डायरी को अपनी अलमारी में रख देता है। नित प्रतिदिन ऐसा ही करता है। एक दिन वो दुनिया से चला जाता है और वो डायरी अलमारी में ही रखी रह जाती है। उसके जाने के बाद अब वो डायरी महज एक घर का पुराना समान बनकर रह जाती है। ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो लोगों के बीच पहुंचनी चाहिए। लेकिन नहीं पहुँच पाती। कहीं हमारा अभिमान, तो कहीं हमारी अज्ञानता, तो कहीं हमारी नासमझी, तो कहीं हमारी झिझक के चलते वो अच्छी चीजें अलमारी तक ही सीमित रह जाती हैं। मैं इसीलिए सभी से आग्रह करता हूँ कि एक दूसरे के विचार, एक दूसरे की लिखी बातें जो आपको अच्छी लगती हैं, आपको उनकी ओर खींचती हैं, आकर्षित करती हैं। कोशिश किया कीजिये उन्हें ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की। मेरे कुछ मित्र बहुत ही अच्छा लिखते हैं। मैं कोशिश भी करता हूँ कि सोशल मीडिया के हर मंच से उनकी लिखी रचनाएँ, उनके लिखे भजन ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे। ये कार्य मैं किसी लालच या फिर लोभ से दूर निस्वार्थ भावना के साथ करने का प्रयास करता हूँ। जिसके चलते उन मित्रों की जो प्रतिक्रिया मिलती है उसे पढ़कर बहुत ही अच्छा लगता है कि प्रदीप भाई ये स्नेह यूं ही बना रहे। मैं भी उन्हें यही कहता हूँ कि आप लोगों की लिखी रचनाओं को पढ़ने और सुनने का सिलसिला जीवन भर यूं ही चलता रहे।
लेख: प्रदीप सिंघल।
(जीन्द वाले)
नजफगढ़ - नई दिल्ली।
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