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अग्रसेन जी का भजन: (लेखक:- हेमन्त गोयल "गोपाल" जी)

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  👉 👉 Lyrics: 👇👇👇👇👇 अग्रसेन जी पिता हमारे, माधवी हमारी माता है-੨ अग्रोहा राजधानी हमारी, जिससे हमारा नाता है-੨ 👇👇👇👇👇 सत्य-अहिंसा-धर्म-दान का, हमको पाठ पढ़ाया है। एक ईंट और एक रुपये से, समरसता सीख सिखाया है। छोटी सी है रीत मगर ये, सीख बड़ी सिखाता है। अग्रोहा राजधानी.... 👇👇👇👇👇 क्षत्रिये कुल में जन्म लिया, वैश्य धर्म स्वीकार किया। कलम-तराजू के दम पर, जीत सारा संसार लिया। जहाँ भी बसे है अग्रवंश, वहीं का वो हो जाता है। अग्रोहा राजधानी.... 👇👇👇👇👇 लक्ष्मी पुत्र कहाते हैं हम, महालक्ष्मी का वरदान है। फैली बेल चहूँ दिशा में, पाते सदा सम्मान हैं। कहे "गोपाल" बड़भागी, जो #अग्रवाल कहलाता है। अग्रोहा राजधानी....  👇👇👇👇👇 ©®श्री हेमन्त गोयल "गोपाल" जी (श्याम कृपा)  👉 गायक: अभिजीत कोहर जी 🙏🙏🙏🙏🙏 👉 प्रेषक: प्रदीप सिंघल 👉 https://youtu.be/ft8O668UIBU

साल़ाहेली//Salaheli (©®ताऊ शेखावाटी//Tau Sekhawati)

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  👉 पारिवारिक हास्य कविता:- साल़ाहेली ..................... मित्रों!       👉 रिश्तों की दुनिया में हर रिश्ते में स्वार्थ का बोलबाला है। उदाहरण के लिए माँ-बाप बेटे को इसलिए लाड करते हैं, कि वो उनके बुढ़ापे का सहारा है। वहीं सास-ससुर अपने जंवाई को इसलिए मान देते हैं, कि वो उनकी बेटी के सुख दुख का साथी है...... आदि, आदि। ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ 👉 ऐसे में मात्र एक रिश्ता ऐसा है, जो जवानी से लेकर बुढ़ापे तक आपको भरपूर निश्वार्थ मान-सम्मान देने में कभी नहीं अघाता, वह रिश्ता होता है "सालाहेली" का। आप जब भी ससुराल जाते हैं। यह रिश्ता हर्षित मन "आवो नणदोई सा!" 👉 कहते हुए सदैव आपके स्वागत में पलक पांवड़े बिछाए तैयार मिलता है। तो कारोना के चल रहे इस उबाऊ पीरियड में आपके होठों पर क्षणिक मुस्कान लाने हेतु प्रस्तुत है.... उस निश्वार्थ रिश्ते पर कभी लिखी हुई मेरी प्रथम कृति "सालाहेली" की ये....... 👉 कविता:- साल़ाहेली ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ (1) सासरिए में सुख चाहो तो, मेरे यारो एक काम करो। सासू अर सुसरै सूं पैली, सालाहेली को मान करो।। ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ (2) सासू-ससुरा कै दिन का है, साली सासरिए जावैगी।  सालाहेली ही...

महाराजा श्री अग्रसेन जी की अमर कथा (-©®ताऊ शेखावटी)

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हमारे आदरणीय पंडित जी #ताऊ_शेखावटी_ (सीताराम शर्मा जी) द्वारा रचित "महाराजा श्री अग्रसेन जी की अमर कथा" आज सुबह ही वट्सअप पर प्राप्त हुई। जिसके लिए मैं उनका हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ और आग्रह करता हूँ कि आप अपनी कलम से इसी तरह अग्रकुल की गौरव गाथा बयान करते रहेंगे। ये कथा यूटयूब पर भी उपलब्ध है। अग्रबंधुओं यदि कथा आपको अच्छी लगे और आपको लगे कि ये अमर कथा जन जन तक पहुंचनी चाहिए तो, कृप्या इसे आगे बढ़ाने में हमारा सहयोग करें। https://youtu.be/TZktk-WQYxI https://youtu.be/TZktk-WQYxI  

महाराजा श्री अग्रसेन जी की गौरव गाथा (-रेखा मोहिनी बंसल@RMB)

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अग्रवंश के कुलपितामह महाराजा श्री अग्रसेन जी की गौरव गाथा: 💟💟💟💟💟💟 श्री अग्रसेन महाराज की, हम गाथा गाते हैं हम गाथा गाते हैं। श्री अग्रजनक के चरणों में हम शीश झुकाते हैं, हम शीश झुकाते हैं। जय अग्रसेन महाराज, जय जय अग्रवाल समाज-੨ ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ (1) महारानी भगवती देवी थी, राजा वल्लभसेन वल्लभसेन के पिता थे, जिनका नाम था बृहतसेन-੨ हरियाणा में प्रतापनगर की कथा सुनाते हैं, हम कथा सुनाते हैं। श्री अग्रजनक के चरणों में हम शीश झुकाते हैं। हम शीश..... जय अग्रसेन महाराज, जय जय अग्रवाल समाज-੨ (2) कुंदसेन भाई छोटे थे वल्लभसेन के, केशी नाम का सेनापति रहता था संग उसके-੨ कुंदसेन और केशी दोनों घात लगाते हैं, दोनों घात लगाते हैं। श्री अग्रजनक के चरणों..... जय अग्रसेन महाराज..... (3) राजा वल्लभ भगवती देवी ने शिव ध्यान किया, प्रसन्न हो शिव ने दो पुत्रों का वरदान दिया-੨ भगवती देवी और वल्लभ जी खुशी मनाते हैं बड़ी खुशी मनाते हैं।  श्री अग्रजनक के चरणों में..... जय अग्रसेन महाराज..... (4) अश्विन शुक्ला प्रतिपदा को सुंदर फूल खिला, महेन्द्रकाल में वल्लभ जी घर पुत्र ने जन्म लिया-੨ जो श्री अग्रसेन जी नाम से जाने...

गर्व से कहते हैं कि हम बाणिये हैं (-Pardeep Singhal)

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  #गर्व_से_कहते_हैं_कि_हम_बाणिये_हैं_ ! ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ #हर समाज में कुछ ना कुछ खूबी जरूर होती है। ठीक उसी तरह हमारे समाज में भी बहुत सी खूबियां हैं। हमारे समाज के लोगों ने अपनी बुद्धिमता व व्यापारिक कला से सिर्फ अपना ही नहीं, अपने परिवार, अपने समाज, अपने देश तक का नाम रोशन किया। इसके सैंकड़ों उदाहरण मिल जाएंगे आपको। हमारे समाज में व्यापार के साथ एक कला और है जिसका जिक्र बहुत कम किया जाता है। अपनी मेहनत से व्यापार को ऊंचे स्तर पर ले जाने के साथ साथ, अपने व्यापार की आमदनी को संयम के साथ संजोने (संभालने) की कला। #हमारे गाँव देहात की तरफ अक्सर एक कहावत कही जाती है। हो सकता है आपने भी किसी बड़े बुजुर्ग से कभी सुना हो कि.. ⬇⬇⬇⬇⬇⬇ #शरीर_की_ताकत_को_भैंस_और_पैसे_की_ताकत_को_सिर्फ_बाणिया_ओट_ (संभाल) #सकै । कुछ लोग आज भी इस कहावत का मान बखूबी रख रहे हैं। सबकुछ होने के बावजूद भी वही सादा रहन सहन, सादा पहनावा, सादा खान पान। उनका व्यक्तित्व, उनकी उदारता, उनकी दरियादिली ही उनकी पहचान है। ऐसे प्रत्येक #बाणिये_भाई को हृदय से नमन जो आज भी अपने संस्कारों को जीवित रखने में अग्रसर हैं। -प्रदीप सिंघल 💟💟...

बाणिया (-Pardeep Singhal)

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⬇⬇⬇⬇⬇⬇ जहां तक मुझे जानकारी है और मैंने सुना व पढ़ा है। पूरी धरती पर हमारे समाज को ऐसे ही सम्मान पूर्वक पुकारा जाता जा रहा है और रहती दुनिया तक पुकारा जाता रहेगा। 💟💟💟 💟💟 बनिये। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ बाणिये। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ लाला जी। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ सेठ जी। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ महाजन। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ गुप्ता जी। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ वैश्य बंधु। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ अग्रवाल साहब। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ अग्रबंधु। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ अग्रवंशी। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ लक्ष्मी पुत्र। ⬇ ⬇⬇⬇⬇ गोत्र के साथ साहब  ( जैसे कि सिंघल साहब) 💟💟💟💟💟 लेकिन उसके बावजूद भी कुछ भाई बंधु कहते हैं कि ये मत कहो वो मत कहो। ऐसे कहो वैसे कहो। आखिर ऐसा क्यों। कुछ लोग तो अपने कमेंटस तक में अपनी भाषा, अपनी मर्यादा तक भूल जाते हैं। ये नहीं देखते कि सामने वाला कौन है..? उसकी पोस्ट का उद्देश्य क्या है। क्या उसकी पोस्ट में समाज हित की बात नहीं है। क्या उस व्यक्ति का हौंसला व मनोबल बढ़ाना हमारा दायित्व नहीं है। जो समाज की जानकारी हम तक पहुंचा रहा है। अपना कीमती समय समाज को दे रहा है। उसका शुक्रिया करने की बजाय उसी को बुरा भला कहने लग जाते हैं। इस धरती पर सबसे सभ्य व सबसे शांत समाजों में हमारी गिनती होती है। लेकिन उसके बावज...

बनिये की डयूटी (कर्तव्य ओर कर्म)

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जब भी कोई व्यक्ति किसी #बनिये भाई की दूकान, प्रतिष्ठान, कार्यस्थल को देखता है तो आमतौर पर यही कहता है कि देखो इसका काम कितना अच्छा चल रहा है। रोज़ाना खूब पैसे कमा रहा है। जबकि मेरा मानना है कि बनिया नहीं उसकी डयूटी, उसकी बैठक कमा रही है। अपने काम काज के प्रति उसकी मेहनत और समर्पण कमा रहा है। सुबह 5-6 बजे प्रभु का नाम लेकर दुकान को नुचकारते हुए खोलना और रात्रि को 10-11 बजे प्रभु का शुक्रिया करते हुए अपनी दूकान को बढ़ाना। लगातार 15-16 घंटे डयूटी देना। हर किसी से आप और जी कहकर बात करना, अपने स्वभाव से लोगों के दिलों को जीतना। कई घंटों की कड़ी मेहनत व कठिन तपस्या के बावजूद हर किसी से अच्छा व्यवहार करना। ना जाने ऐसी कितनी ही खूबियों का भंडार ले अपने कर्तव्य का पालन करना। दूकान पर आने वाले किसी भी धार्मिक और जन कल्याण संस्थाओं के सदस्यों का अपनी क्षमता व सामर्थ्य अनुसार सहयोग करना। 🙏🙏🙏🙏🙏 नोट: मैं मध्यम वर्गीय से हूँ, जो चीज़ जो खूबी अपने बनिये भाइयों में देखता हूँ उसे ही राष्ट्रीय अग्रवाल महासभा फेसबुक समूह के माध्यम से आप सभी अग्रबंधुओं के बीच शेयर करता हूँ। ये मेरा सौभाग्य है कि मु...