अग्रसेन जी के वंशज
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आओ मिलके चलें इस कदर साथ हम।
सबसे ऊंचा जहाँ में रहे अग्रवंश।
ले के हाथों में अग्रसेन जी के निशान,
उनकी राहों में आगे ही बढ़ते रहो।
राह में गर तुम्हें कोई अपना मिले,
उसको सीने से अपने लगाते चलो।
बांट लो मिलके उसके है जितने भी गम,
सबसे ऊंचा जहाँ में रहे अग्रवंश।
आओ मिलके चलें....
साथ सुख दुख में अब ना ये छुटे कभी,
आओ मिलके ही खाते हैं हम ये कसम।
अग्रवंशी हैं हम देश की शान हैं,
धन्य हैं ऐसे वंश में जन्मे हैं हम।
हर जनम में मिले हमको इसमें जनम,
सबसे ऊंचा जहाँ में रहे अग्रवंश।
आओ मिलके चलें....
रचियता एवं स्वर:
अग्रविभूति संजय अग्रवाल जी।
(रायगढ़ - छत्तीसगढ़)
मो० 810-94-595-55
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