कहानी व्यापारी की

ये एक ऐसी कहानी होगी जिसे पढ़ने वालों को अपने व्यापारी होने पर गर्व होगा। अपने सामाजिक और धार्मिक होने पर खुशी महसूस होगी। जिससे उन अच्छे व्यवहारिक लोगों का हौंसला तो बढ़ेगा ही साथ ही साथ समाज को उनसे शिक्षा और प्रेरणा भी मिलेगी कुछ सीखने की। लेकिन कुछ लोगों को इससे पीड़ा भी होगी। क्यूंकि व्यापारी का गहना उसके द्वारा बनाई ऊंची इमारतें और बड़े कारोबार नहीं, उसका व्यवहार होता है, उसकी जुबान होती है। कुछ इससे सीखेंगे तो कुछ इस कहानी में स्वयं को महसूस भी करेंगे। अपनी गल्तियों का एहसास होगा तो अपने व्यापार से जुड़े लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी का भी ज्ञान भी मिलेगा। ये किसी एक व्यापार या फिर किसी एक व्यापारी की कहानी नहीं होगी। आशा करूंगा कि आप मुझे इस कहानी को देश के हर कोने तक पहुंचाने में मदद करेंगे।
व्यापारी की कहानी सिंघल की जुबानी।

                              ✍🏻 प्रदीप सिंघल।

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