6/6/2020 (Happy Happy Birthday To You Singh Sahab)
सरदार श्री हरमहेंद्र सिंह रोमी जी -मर्मस्पर्शी भजनों के लेखक व गायक (सिंह साहब) को हमारी ओर से जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी एफ बी पोस्ट व भजन रचनाओं से बहुत कुछ सीखा हम ने जिसका शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता।
(1)
उगता है अगर सुबह को सूरज, सांझ को वो ढ़ल जाता है।
ये जीवन भी इसी तरह है, सुख दुख आता जाता है।
(2)
जीवन तो प्यारे इक रेल है, कभी पैसेंजर कभी मेल है।
सुख दुख की पटरी पे दौड़ लगाती है, फिर भी मंजिल पे बढ़ती जाती है, स्वासों का जब तक इसमें तेल है।
(3)
चेहरे पे एक चेहरा झूठी शक्ल हमारी, दे दे धोखे सबको ये जिंदगी गुजारी।
(4)
हम हो गये हैं कैसे जब ये मैं सोचता हूँ, रोता हूँ रोमी छुपके खुद को ही कोसता हूँ।
(5)
जय बाबा की कहने की अब आदत हो गई।
जय श्री श्याम कहने की अब आदत हो गई।
🙏🙏🙏🙏🙏
ऐसी बहुत सी बातें हैं जो आपकी ही रचनाओं की देन है। आप इसी तरह लिखते रहें और हम उन रचनाओं को सुनने के साथ साथ, जीवन में काम आने वाली बातें स्वयं तो सीखें ही। अपने बच्चों को भी सिखाते रहें। आपका आशीर्वाद हम पर सदैव बना रहे।
शुभचिंतक -सिंघल परिवार जीन्द वाले।
-प्रदीप सिंघल।
नजफगढ़ -नई दिल्ली ।
(1)
उगता है अगर सुबह को सूरज, सांझ को वो ढ़ल जाता है।
ये जीवन भी इसी तरह है, सुख दुख आता जाता है।
(2)
जीवन तो प्यारे इक रेल है, कभी पैसेंजर कभी मेल है।
सुख दुख की पटरी पे दौड़ लगाती है, फिर भी मंजिल पे बढ़ती जाती है, स्वासों का जब तक इसमें तेल है।
(3)
चेहरे पे एक चेहरा झूठी शक्ल हमारी, दे दे धोखे सबको ये जिंदगी गुजारी।
(4)
हम हो गये हैं कैसे जब ये मैं सोचता हूँ, रोता हूँ रोमी छुपके खुद को ही कोसता हूँ।
(5)
जय बाबा की कहने की अब आदत हो गई।
जय श्री श्याम कहने की अब आदत हो गई।
🙏🙏🙏🙏🙏
ऐसी बहुत सी बातें हैं जो आपकी ही रचनाओं की देन है। आप इसी तरह लिखते रहें और हम उन रचनाओं को सुनने के साथ साथ, जीवन में काम आने वाली बातें स्वयं तो सीखें ही। अपने बच्चों को भी सिखाते रहें। आपका आशीर्वाद हम पर सदैव बना रहे।
शुभचिंतक -सिंघल परिवार जीन्द वाले।
-प्रदीप सिंघल।
नजफगढ़ -नई दिल्ली ।

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आपका हृदय से आभार।