हम गुनहगार है तेरे (Lyrics & Voice -रोमी जी)
हम गुनहगार हैं तेरे श्याम वर्षों से ।
मांगते हैं क्षमा तुझसे - तेरे भक्तों से ।।
तूने सृष्टि की खातिर था शीश का दान दिया।
तूने धर्म की रक्षा की सबका कल्याण किया।
वीरों के वीर थे तुम शूरवीर थे।
याचक बने श्रीकृष्ण तुम तो दानवीर थे।
धर्म जो तूने हमें सिखलाया कर्म जो तूने करके दिखलाया।
भूले बैठे हैं सारे आज देखो कलयूग में।
हम गुनहगार हैं तेरे....
तेरी इस कुर्बानी से नहीं कुछ भी सीखा हमने।
स्वार्थ ही स्वार्थ है प्रभु हम सबके जीवन में।
दर तेरे आते हैं पिकनिक मनाते हैं।
घर लौटकर बलिदान तेरा भुल जाते हैं।
अहम में चूर हैं सत्य से दूर हैं।
बनके प्रेमी तेरे फिर भी मशहूर हैं।
दिखावा ही दिखावा है सबके जीवन में।
हम गुनहगार हैं तेरे....
मेरी ये विनती है हमें सच्ची लग्न लगा।
हमको भी थोड़ी सी भक्ति की राह दिखा।
पड़े ना दिखावे में जग के छलावे में।
हम बहके ना प्रभु ढोंगियो के छल - बहकावे में।
मन में ईमान हो कभी ना गुमान हो।
तेरे प्रेमी की जग में ऐसी पहचान हो।
रखना तुम दूर "रोमी" को बुरे कर्मों से।
हम गुनहगार हैं तेरे....
मर्मस्पर्शी रचनाओं के रचनाकार व दिलकश आवाज के मालिक....
Sh. Singh Harimahendra Pal "रोमी" जी को मेरा कोटि - कोटि नमन।
🙏🙏🙏🙏🙏
नमन कर्ता: प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले)
भजन प्रेषक: राजेश सोनी जी - नजफगढ़।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
आपका हृदय से आभार।