अग्रवाल समाज (-Pardeep Singhal)
अग्रवाल समाज एक ऐसा समाज जिसका जिक्र शब्दों में कर पाना इतना आसान नहीं।
धार्मिक, सामाजिक, राजनैतिक, व्यापारिक तकरीबन हर क्षेत्र में आपको अग्रवाल समाज के लोग आगे आगे मिलेंगे। इस समाज ने एक से एक से व्यापारी, एक से एक अधिकारी, एक से एक डॉक्टर, एक से एक लेखक, एक से गायक दिये। जिन्होंने अपनी काबिलियत से अपने गाँव, अपने शहर ही नहीं अपने देश का भी नाम रोशन किया। जब दानवीरता की बात आती है तो ये समाज अपने सामर्थ्य अनुसार दिल खोल कर दान भी करता है। जिसका जिक्र हमारे इतिहास के पन्नों में भी दर्ज है। लेकिन कई बार दुख भी होता है जब इस समाज के लोगों के बारे में कुछ लोग कहते हैं कि बनिया कंजूस होता है। क्या पैसे को बचाना या फिर बेवजह खर्च ना करना कंजूसी कहलाता है। मैं ये नहीं कहूंगा कि बनिया समाज को कंजूस कहना गल्त है। लेकिन क्या एक दानवीर समाज को कंजूस कहकर संबोधीत करना गल्त नहीं है। ये सच है कि हमारा समाज व्यापारी है और व्यापारी की तरह सोचता है। लेकिन व्यापार तो हमारा कर्म है और कर्म ही हमारा धर्म भी है। पर ये बात भी सत्य है कि जब जब कोई हमारी चौखट पर उम्मीद लेकर आया। हमने प्रभु का नाम लेकर अपने सामर्थ्य अनुसार हर वो सहायता करने कि कोशिश की जिसके लिए हम समर्थ थे। मेरा आपसे आग्रह है कि हमारे समाज कि जो खूबियां हैं उन्हें भी दुनिया तक लाएं। ताकि हमारा और हमारे बच्चों का मनोबल और होंसला बढ़े और वो कुलदेवी महामाया माँ लक्ष्मी और कुलपिता महाराजा श्री अग्रसेन जी व कुलमाता महारानी माधवी जी के आशीर्वाद से सदैव समाज कल्याण हेतू आगे रहें।
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लेख: अग्रवंशी प्रदीप सिंघल।
(जीन्द वाले)
नजफगढ़ - नई दिल्ली।
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