क्या क्या कमाया हमने (Lyrics-रोमी जी)

आत्म चिंतन:

क्या क्या कमाया हमने आओ हिसाब कर लें।

दुनिया की बात छोड़े अपनी किताब पढ़ लें।


कितनों का दिल दुखाया कितनों के दिल को तोड़ा।

कितनों का प्यार पाया कितनों को खुद से जोड़ा।

क्या क्या गंवाया हमने आओ हिसाब कर लें।

क्या क्या कमाया....


कितनी करी है सेवा कितना करा दिखावा।

कितना छला जगत को बनकर के इक छलावा।

कैसे बिताया जीवन आओ हिसाब कर लें।

क्या क्या कमाया....


कितना फर्ज निभाया कितना किया कर्म है।

अब तक क्या हमने जाना अपना भी क्या धर्म है।

कैसे निभाया रिश्ता आओ हिसाब कर लें।

क्या क्या कमाया....


हम जागरण में जागे ज्योति सदा जलाई।

जयकारे खूब बोले नाचे कमर हिलाई।

कितना जगाया मन को "रोमी" हिसाब कर लें।

क्या क्या कमाया....


इस भजन के लेखक व गायक:

सरदार श्री हरमहेन्द्र सिंह "रोमी" जी को मेरा कोटि कोटि नमन।

नमनकर्ता: प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले)

🙏🙏🙏🙏🙏

भजन प्रेषक: राजेश सोनी जी।
नजफगढ़ - नई दिल्ली।

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