अपनी भक्ति का दो वरदान बाबा (Lyrics-Shyam Sundar Sharma Ji & Voice-रोमी जी)

अपनी भक्ति का दो वरदान बाबा।

मैं नित्त ही करता रहूँ तेरा गुणगान बाबा।


तेरी दुनिया का धंधा कुछ समझ ना आया है।

मोह माया का कैसा भ्रम जाल बिछाया है।

इस जाल में फंस करके तुझको ही भुलाया है।

जो अब तक पाया था सारा ही गंवाया है।

अब दया करो तुम दे दो मुझको ज्ञान बाबा।

अपनी भक्ति का....


स्वार्थ ने मुझको प्रभु अंधा बना दिया।

बद से बदत्तर मैंने हर खोटा कर्म किया।

अपना था जिसे समझा वो एक भुलावा था।

इक तू ही हमें अपना मिला जग में श्याम पिया।

दुःखडों का मारा हूँ करो कल्याण बाबा।

अपनी भक्ति का....


तेरे चरणों की सेवा का यदि मौका मिल जाये।

इस अधम जीव की भी ज़िन्दगानी बन जाये।

तेरी रूप माधुरी का जी भर रस पान करूँ।

मन पाप बसे मेरे उनकी जड़ हिल जाये।

बदनाम हुआ मैं तो दिलादो मान बाबा।

अपनी भक्ति का....


मैं प्रात: उठकर के तेरे कुण्ड में नहाऊँगा।

चरणों में ध्यान लगा तेरी महिमा गाऊँगा।

बन तेरा दीवाना तुझ में खो जाऊँगा।

कर भक्तों की सेवा किस्मत चमकाऊँगा।

फिर एक साथ बैठे भक्त - भगवान बाबा।

अपनी भक्ति का....


इतना जो कर दोगे नहीं तुझे सताऊँगा।

सारी दुनिया को मैं यही बात बताऊँगा।

हो दीन दयालु तुम करूणा के सागर हो।

जिनका ना कोई जग में तेरी राह दिखाऊँगा।

तेरे दर का "श्याम सुन्दर" बने दरबान बाबा।

अपनी भक्ति का....


लेखक: श्यामलीन श्री श्याम सुन्दर शर्मा जी।

(पालम वाले)

स्वर: सरदार श्री हरमहेंद्र सिंह "रोमी" जी।

(खलीलाबाद)


🙏🙏🙏🙏🙏

आप दोनों को मेरा कोटि कोटि नमन।

नमनकर्ता: प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले)


भजन प्रेषक: राधेश्याम वत्स

(नांगलोई - दिल्ली)


नोट: ये भजन श्री श्याम गीत पुष्पांजली में पृष्ठ नंबर 393-394 पर प्रकाशित है।

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