जीवन तो प्यारे इक रेल है (Lyrics -रोमी जी)
मेरी मनपसंद रचना:
जीवन तो प्यारे, इक रेल है।
कभी पैसेंजर - कभी मेल है।
सुख-दुख की पटरी पे, दौड़ लगाती है।
फिर भी मंजिल पे, बढ़ती जाती है।
स्वासों का जब तक, इसमें तेल है।
कभी पैसेंजर - कभी मेल है।
जीवन तो प्यारे....
यात्री ज्यूँ चढ़ते और उतरते हैं।
रिश्ते भी मिलते और बिछड़ते हैं।
गौड़ के सिग्नल का, ये खेल है।
कभी पैसेंजर - कभी मेल है।
जीवन तो प्यारे....
अच्छे कर्मों का टिकट, कटाना है।
टीटी जब मांगे, टिकट दिखाना है।
वर्ना नर्कों की, होगी जेल है।
कभी पैसेंजर - कभी मेल है।
जीवन तो प्यारे....
"रोमी" कोई ना, बोझ उठायेगा।
पाप की गठरी, अगर ले जायेगा।
अंतिम यात्रा में, फिर तु फेल है।
कभी पैसेंजर - कभी मेल है।
जीवन तो प्यारे....
Singh Harimahendra Pal "रोमी" जी एक ऐसा नाम जिनकी लिखी हर रचना शिक्षाप्रद व प्रेरणादायी होती है। लेखक होना भी ऐसा चाहिए जो अपने चाहने वालों को सच से रूबरू करवाये। उसकी लिखी रचनाएँ ही उसकी पहचान हो।
आपने इस भजन रचना में जीवन का बहुत ही अच्छा वर्णन किया है।
बिलकुल सही कहा आपने पूरा जीवन इसी कश्मकश में बीतता है, सुख-दुख आते जाते रहते हैं जीवन बीतता रहता है।
आपको मेरा कोटि कोटि नमन।
नमनकर्ता: प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले)
नजफगढ़ - नई दिल्ली।

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